Wednesday, April 8, 2015

आदरणीय पापा

आदरणीय पापा,
आज आपका जन्मदिन  है।  बहुत बहुत मुबारक हो।
 मै आपके पास नहीं हूँ अभी,  पर मै आपको बहुत मिस कर रहा हूँ।
मै बहुत ही सौभाग्यशाली हूँ की मैंने आपके पुत्र के रूप में जन्म लिया है।
आपने बहुत संघर्ष किया है हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए।  आपने मुझे अच्छी शिक्षा दी।  अच्छे संस्कार दिए जिससे की मै अपने जीवन  में आई चुनौतियां का सफलता पूर्वक सामना कर सका और आपके उन्ही संस्कारो  के द्वारा मै भविष्य में आने वाली चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करूँगा।
  मै अब बड़ा हो गया हूँ और अब आपका जूता मेरे पैरो में आने लगा है।  मै आपकी स्थिति समझने की कोशिश करने लगा हूँ।  एक पिता होने की नाते आपके द्वारा दिए गए  संस्कारो को आगे बढ़ने का दायित्वा अब मेरे कंधो पर है।  मै पूरी कोशिश करूँगा की आपके द्वारा दिए गए संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुँचाऊँ।

मै आपके बेहतर स्वस्थ और लम्बी उम्र की कामना ईश्वर से करता हूँ।  

देव और दानव के बीच में है "मानव"


कोई व्यक्ति सिर्फ देव नहीं होता जो हमेशा सच्चा हो  ना ही कोई व्यक्ति दानव होता है जो हमेशा झूठा हो।  वो मानव है थोड़ा सा बुरा,  थोड़ा सा अच्छा, थोड़ा सा सच्चा और थोड़ा सा झूठा , यह अलग बात है की वो देव के नज़दीक है या दानव के ,  यदि हम अपने आपको सिर्फ मानव ही माने और देव या दानव बनाने की कोशिश न करे तो हम अपने अच्छे और बुरे का आंकलन ठीक से कर सकते है,  जिससे हमारे अंदर सुधार की अपार संभावनाए उत्पन्न हो सकती है।  

Wednesday, January 21, 2015

पा पा पा पापा

Date 21 Jan 2015

कुछ दिन पहले मेरे बेटे ने अपने आप ही पा पा पा पापा बोलना शुरू किया है।  पहले मुझे लगता था की वो बस ऐसे ही कुछ बोलने के लिया बोलता है पर आज कल वो मुझे देख कर पा पा पापा बोलता है।  स्वाति दिन भर उसे पापा बोलना सिखाती है।  ऑफिस से जब घर पहुचता हूँ तो अपने बेटे के मुँह से पापा सुन कर,  दिन भर की थकान मनो चली सी जाती है।  

Monday, January 12, 2015

जॉकी की खरीदारी

नए साल के रेसोलुशन  में  हमने सोंचा की हम अपने लिए नयी चड्ढियां खरीदेंगे वो भी जॉकी की , हमारे बाकि मित्र इसी ब्रांड की चड्ढियां पहनते है।  उनकी चड्ढी का ब्रांड उनके झुकते वक्त पीछे दिखाई दे जाता है।  तो हम नए साल के मौके पर अपनी पत्नी के साथ एक दुकान में पहुंचे,  साथ में हमारे मित्र टनटन जी भी अपनी पत्नी के  साथ थे।  भाभी को सैंदर्य का कुछ सामान लेना था।  मेरी पत्नी जी को भी कुछ सामान पसंद आया तो उन्होंने भी कुछ ले लिया।  दुकान काफी अच्छी थी तो मैंने सोंचा की थोड़ा टहल लूँ।  दुकान  देख ही रहा था की एक आवाज़ आई की,   भाई साहब आपके लिए भी सामान है यहाँ पर,  जॉकी पर १५% डिस्काउंट है।  मुझे लगा अच्छा मौका है जॉकी की चड्ढियां खरीदने का।  मैंने अपनी पत्नी को बोला की चलो लेते है।  फिर हम बेसमेंट में बानी उनकी दुकान में पहुंचे।  मर्दो की चड्ढी बेचने के लिए कोई मर्द नहीं था सारी जनाना ही थी।  मुझे अलग -अलग तरह की जॉकी की चड्ढियां दिखाने लगी।  फिर पूछने लगी आपका साइज क्या है।  घबराहट में मै तो अपनी चड्ढी का साइज ही भूल गया था।  फिर मैंने अपनी पत्नी से पूछा की सुनती हो मेरा साइज क्या है।  वो भी घबरा गयी की क्या बताऊ, और बोली आप पहनते हो तो आपको नहीं पता क्या?  फिर टनटन बोलता है लार्ज साइज दिखाना। फिर ३ जननीयां मुझे लार्ज साइज की अलग अलग तरह की चड्ढियां दिखने लगी। पट्टे वाली,  बिना पट्टे वाली, समझ में नहीं आ रहा था की कौन सी लूँ।  फिर मैंने बोला की सिंपल सी कोई भी दे दो।  फिर बात आई की किस  रंग की ली जाए।  मुझे समझ में नहीं आ रहा था की कौन से रंग की लूँ।  फिर मैंने अपनी पत्नी को आवाज़ लगई की सुनती हो किस रंग की लूँ चड्ढियां। इतनी महँगी खरीद रहा था तो पत्नी की सहमति भी जरुरी थी , फिर मेरी पत्नी बोली काले रंग की मत लेना बहुत ढेर सारी है आपके पास।  फिर मैंने बोला तुम ही बता दो कौन से रंग की  लूँ।  जनानिया ढूंढने लगी अलग अलग रंग की चड्डियाँ। उन्होंने निकली लाल रंग की चड्ढी , फिर मेरी पत्नी की आवाज़ आई लाल रंग की चड्डी मत लो कोई और रंग नहीं है क्या ? बड़ी मशक्कत से हमने ३ अगल अलग रंग की चड्ढियां ले ली ।  मैंने पैक करा ली।  मेरी पत्नी ने भी कुछ लिया था। बिल आया, हमने पे किया फिर बाकि का सामान लेने के लिया हम दूसरी दुकान पर चल दिए ।

शाम जब हम अपने घर पर इकठ्ठा हुए तो फिर से चड्डियों पर चर्चा शुरू हो गयी. टनटन बोला तुम कितने बेशरम हो भाई, वहां तुम भाभी से पूछ रहे थे की मेरा साइज क्या है।  किस रंग की चड्ढी खरीदू।  इसमें भाभी का क्या रोले। मुझे अभी चड्डियाँ खरीदनी थी मैंने तो शर्म के मरे खरीदी ही नहीं,  मैंने बोला की भाई जब भी चड्ढियो का विज्ञापन आता है तो उसमे भी जननीयां ही तो दिखाई देती है।  अमुक ब्रांड की चड्ढी पहनो तो पूरे  शरीर पर चुम्बन के निशान हो जाते है, कही तो पुरुष लड़कियों को बचाता है वो भी सिर्फ चड्ढी पहन कर। अपने पास तो एक सुपर हीरो है वो पैंट की ऊपर चड्ढी पहनता है,   हर एक विज्ञापन में औरतो होती है।  तो क्या मै अपनी पत्नी की पसंद से चड्ढी नहीं खरीद सकता।  

Saturday, January 10, 2015

अमेरिका से आया हूँ

आज अजीब सा वाक़िया हुआ हमारे साथ,  सुबह-सुबह हम ऑफिस पहुंचे ही थे की हमें पता लग गया की एक सज्जन व्यक्ति आज ही अमेरिका से सीधे इस भारत भूमि पर पधारे है, थोड़ी देर की बाद उनके दर्शन भी हुए, हमसबसे मुलाकात हुई ऐसा लग रहा था की भाई जंग जीत कर आया है, आते ही कुछ लोगो के चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी और कुछ की मायूसी ,  थोड़ी देर बाद आवाज़ आई चॉकलेट ले लो, हम टूट पड़े अमेरिकी कंपट पर , छीना झपटी में हमारे हाथ एक- दो कम्पट लग गयी।  हम बहुत खुश हुए की कुछ तो हाथ लगा, फिर हम अपने काम में व्यस्त हो गए ,  लंच टाइम  हुआ,  हम खाना खा ही रहे थे की अमुक व्यक्ति हमारे पास आए और शुरू किया अमेरिकी यात्रा वृतांत , कैसे वो अमेरिका पहुंचे और क्या क्या उपलब्धिया पाई है उन्होंने वहाँ , अमुक व्यक्ति ने बोलना शुरू किया -बहुत मज़ा आया बस मै अपना ड्रीम जी रहा था वहाँ पर।  चारो तरफ हॉलीवुड था और बीच में हमारे ऑफिस की बिल्डिंग। गूगल खोलो मै तुम्हे दिखता हूँ कहाँ था हमारा ऑफिस। जल्दी से सिस्टम खोला गया और गूगल पर सर्च किया गया, कुछ नीचे स्क्रोल करने पर  ऑफिस की फोटो भी आ गयी,  दिखने में बिल्डिंग बहुत खूबसूरत थीं नज़ारा कुछ हॉलीवुड पिक्चरों  जैसा था  ।  हमे ख़ुशी से ज्यादा जलन हो रही थी। वहां उनके काम से अमेरिकी उनके मुरीद हो गए।  वो बोले हमने दिन रात इतना काम किया की वो चकित थे की कोई इतना काम भी कर सकता है। चार चार सिस्टम पर हमने टेस्टिंग की है वो भी एक साथ।   जी यू आई बिलकुल भी ब्रेक नहीं होने चाहिए थी।  ऐसे ऐसे टूल्स पर हमने काम किया फिर पता चला की ऐसा भी हो सकता है।   हम सिर्फ २ घंटे सोते थे बाकि दिन काम काम और सिर्फ काम, हम  सिर्फ एक दिन छुट्टी लेते थे।  वीकेंड तो हमारा सोने में ही निकल जाता था।  आज मुझे लग रहा है की मै अब कम्पनी का असली रिसोर्स हो गया हूँ।  फिर हमने अपने आपको देखा समझ में नहीं आ रहा था की कैसा एक्सप्रेशन दूँ , मुझे लगा की  शायद हम किसी लायक ही नहीं है।  फिर बोलते है अब मेरी बात डायरेक्ट कम्पनी की मालिक हो होती है।  उन्होंने भी हमारे काम हो काफी सराहा है।  मैंने वहां जा कर कई  सारे डाक्यूमेंट्स बनाए।  सब बहुत खुश हुए। हमारा काम तो १० दिन पहले ही खत्म हो गया था , फ्लाइट्स की टिकट नहीं मिले नहीं तो मै जल्दी आ जाता।  खली वक्त कटे नहीं काट रहा था,  वो शहर मेरा पहले से घूमा हुआ था इसलिए कही घूमने नहीं आया।  छुट्टियों मै बहुत बोर हुआ ।  मै वहां कही नहीं जा सकता था वहां के लोग हमजैसे नहीं है , रात में भी कोई दरवाज़ा खटखटा की भाग जाता है ।  मै बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हूँ इसलिए इधर उधर घूमने भी नहीं गया।  (लडकिया समझ नहीं पाएंगी की इसमें धार्मिकता कहा से आ गयी)  हालत बहुत ख़राब थी।  अब मै वहां दोबारा नहीं जाऊंगा, बोर बहुत हुआ हूँ , कोई बात करने  वाला नहीं था। मै बस यहाँ आने के लिए बेताब था। अबकी जाऊंगा तो सिर्फ पैसे कमाने जाऊंगा।  अपने शौक से नहीं जाऊंगा।  इतनी बात सुन मुझे याद आया की मुझे अपनी पत्नी को फ़ोन करना है।  नहीं किया तो घर जा कर क्या जवाब दूंगा।  मै उठ लिया वहां से और पत्नी को फ़ोन मिलाया।  वापस आया तो महाशय जा चुके थे।  एक घंटे तक लोगो को अपनी गाथा सुनाई।  सब उनकी बाते सुन भावविभोर हो गए। 

Friday, January 2, 2015

सब ब्रांडेड है

आजकल एक ही बात मेरे सामने बार बार आ रही है। यदि आप गलती से भी किसी व्यक्ति के कपड़ो की तारीफ कर दे तो फिर शुरू हो जाता है ब्रांड्स का बखान.
उदाहरण के लिए यही आप किसी व्यक्ति से बोलते है की उसकी जैकेट अच्छी लग रही है तो वो बिना वक्त गवाए बोलता है,  ये अमुक  ब्रांड की है , अमुक दुकान से और अमुक जगह से लिया है और बहुत महँगी है।  इशारो में शायद ये समझाना चाहते है की ये जैकेट आपकी औकात से बहार है।  समझ में नहीं आता की मै आगे से उनकी तारीफ करू या न करू। 



Tuesday, December 2, 2014

रणछोड़ दास चाचड़

मेरा जन्मदिन बस बीता ही था की सुबह तड़के फ़ोन आया।
मुकुल: भाई मै मुकुल बोल रहा हूँ बिलेटेड हैप्पी बर्थडे टू यू।
मै :  थैंक्स
मुकुल : भाई में दमन में हूँ।
मै: वहां क्या कर रहे हो तुम।
मुकुल : भाई,  मै बिना घर पर बताए यहाँ दमन में आ गया हूँ जॉब करने।  एक होटल है इंटरनेट पर सर्च करना दमन दा डेल्टिन  . मै वही ज्वाइन करने आया हुँ।
मै : क्यों घर में क्यों नहीं बताया।  घर वाले सब परेशान होंगे।
मुकुल: अगर  मै घर पर बता कर आता तो कोई मुझे आने नहीं देता इस लिए बिना बताए आ गया।
 मै: भाई तुम पहले घर पर फ़ोन  कर के बता दो की तुम दमन गए हो.
मुकुल :  मै बता दूंगा।
 मै: तुमने ये फैसला अचानक कैसे ले लिया, वहां क्या होगा पापा ने जो तुम्हारे लिए दुकान खोली है।  इतना इन्वेस्ट भी किया है।  नहीं करना था तो तुम पहले बता देते।  इत्ता सामान इकठ्ठा किया फिर सब कुछ छोड़ कर निकल लिए तुम।
मुकुल : वहाँ कोई ग्रोथ नहीं थी ।  मेरे फील्ड से हटकर काम हो रहा था।  मुझे पसंद नहीं है किराने की दुकान खोलना।  मेरे पास इत्ते पैसे भी नहीं थे की ठीक से जी सकूँ।  पापा मेरी शादी के लिए भी देख रहे थे।  पैसे नहीं होते तो उसे खिलता कैसे।
 मै: ये काम तुम पहले भी कर सकते थे।  लखनऊ में भी जॉब कर सकते थे।  तुम्हे ऑफर भी आए थे।  पर तुमने जॉब नहीं की क्यों।
मुकुल : मुझे लखनऊ नहीं रहना था। वहाँ कुछ नहीं है।