Tuesday, December 2, 2014

रणछोड़ दास चाचड़

मेरा जन्मदिन बस बीता ही था की सुबह तड़के फ़ोन आया।
मुकुल: भाई मै मुकुल बोल रहा हूँ बिलेटेड हैप्पी बर्थडे टू यू।
मै :  थैंक्स
मुकुल : भाई में दमन में हूँ।
मै: वहां क्या कर रहे हो तुम।
मुकुल : भाई,  मै बिना घर पर बताए यहाँ दमन में आ गया हूँ जॉब करने।  एक होटल है इंटरनेट पर सर्च करना दमन दा डेल्टिन  . मै वही ज्वाइन करने आया हुँ।
मै : क्यों घर में क्यों नहीं बताया।  घर वाले सब परेशान होंगे।
मुकुल: अगर  मै घर पर बता कर आता तो कोई मुझे आने नहीं देता इस लिए बिना बताए आ गया।
 मै: भाई तुम पहले घर पर फ़ोन  कर के बता दो की तुम दमन गए हो.
मुकुल :  मै बता दूंगा।
 मै: तुमने ये फैसला अचानक कैसे ले लिया, वहां क्या होगा पापा ने जो तुम्हारे लिए दुकान खोली है।  इतना इन्वेस्ट भी किया है।  नहीं करना था तो तुम पहले बता देते।  इत्ता सामान इकठ्ठा किया फिर सब कुछ छोड़ कर निकल लिए तुम।
मुकुल : वहाँ कोई ग्रोथ नहीं थी ।  मेरे फील्ड से हटकर काम हो रहा था।  मुझे पसंद नहीं है किराने की दुकान खोलना।  मेरे पास इत्ते पैसे भी नहीं थे की ठीक से जी सकूँ।  पापा मेरी शादी के लिए भी देख रहे थे।  पैसे नहीं होते तो उसे खिलता कैसे।
 मै: ये काम तुम पहले भी कर सकते थे।  लखनऊ में भी जॉब कर सकते थे।  तुम्हे ऑफर भी आए थे।  पर तुमने जॉब नहीं की क्यों।
मुकुल : मुझे लखनऊ नहीं रहना था। वहाँ कुछ नहीं है।



















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