कोई व्यक्ति सिर्फ देव नहीं होता जो हमेशा सच्चा हो ना ही कोई व्यक्ति दानव होता है जो हमेशा झूठा हो। वो मानव है थोड़ा सा बुरा, थोड़ा सा अच्छा, थोड़ा सा सच्चा और थोड़ा सा झूठा , यह अलग बात है की वो देव के नज़दीक है या दानव के , यदि हम अपने आपको सिर्फ मानव ही माने और देव या दानव बनाने की कोशिश न करे तो हम अपने अच्छे और बुरे का आंकलन ठीक से कर सकते है, जिससे हमारे अंदर सुधार की अपार संभावनाए उत्पन्न हो सकती है।
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