Saturday, January 10, 2015

अमेरिका से आया हूँ

आज अजीब सा वाक़िया हुआ हमारे साथ,  सुबह-सुबह हम ऑफिस पहुंचे ही थे की हमें पता लग गया की एक सज्जन व्यक्ति आज ही अमेरिका से सीधे इस भारत भूमि पर पधारे है, थोड़ी देर की बाद उनके दर्शन भी हुए, हमसबसे मुलाकात हुई ऐसा लग रहा था की भाई जंग जीत कर आया है, आते ही कुछ लोगो के चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी और कुछ की मायूसी ,  थोड़ी देर बाद आवाज़ आई चॉकलेट ले लो, हम टूट पड़े अमेरिकी कंपट पर , छीना झपटी में हमारे हाथ एक- दो कम्पट लग गयी।  हम बहुत खुश हुए की कुछ तो हाथ लगा, फिर हम अपने काम में व्यस्त हो गए ,  लंच टाइम  हुआ,  हम खाना खा ही रहे थे की अमुक व्यक्ति हमारे पास आए और शुरू किया अमेरिकी यात्रा वृतांत , कैसे वो अमेरिका पहुंचे और क्या क्या उपलब्धिया पाई है उन्होंने वहाँ , अमुक व्यक्ति ने बोलना शुरू किया -बहुत मज़ा आया बस मै अपना ड्रीम जी रहा था वहाँ पर।  चारो तरफ हॉलीवुड था और बीच में हमारे ऑफिस की बिल्डिंग। गूगल खोलो मै तुम्हे दिखता हूँ कहाँ था हमारा ऑफिस। जल्दी से सिस्टम खोला गया और गूगल पर सर्च किया गया, कुछ नीचे स्क्रोल करने पर  ऑफिस की फोटो भी आ गयी,  दिखने में बिल्डिंग बहुत खूबसूरत थीं नज़ारा कुछ हॉलीवुड पिक्चरों  जैसा था  ।  हमे ख़ुशी से ज्यादा जलन हो रही थी। वहां उनके काम से अमेरिकी उनके मुरीद हो गए।  वो बोले हमने दिन रात इतना काम किया की वो चकित थे की कोई इतना काम भी कर सकता है। चार चार सिस्टम पर हमने टेस्टिंग की है वो भी एक साथ।   जी यू आई बिलकुल भी ब्रेक नहीं होने चाहिए थी।  ऐसे ऐसे टूल्स पर हमने काम किया फिर पता चला की ऐसा भी हो सकता है।   हम सिर्फ २ घंटे सोते थे बाकि दिन काम काम और सिर्फ काम, हम  सिर्फ एक दिन छुट्टी लेते थे।  वीकेंड तो हमारा सोने में ही निकल जाता था।  आज मुझे लग रहा है की मै अब कम्पनी का असली रिसोर्स हो गया हूँ।  फिर हमने अपने आपको देखा समझ में नहीं आ रहा था की कैसा एक्सप्रेशन दूँ , मुझे लगा की  शायद हम किसी लायक ही नहीं है।  फिर बोलते है अब मेरी बात डायरेक्ट कम्पनी की मालिक हो होती है।  उन्होंने भी हमारे काम हो काफी सराहा है।  मैंने वहां जा कर कई  सारे डाक्यूमेंट्स बनाए।  सब बहुत खुश हुए। हमारा काम तो १० दिन पहले ही खत्म हो गया था , फ्लाइट्स की टिकट नहीं मिले नहीं तो मै जल्दी आ जाता।  खली वक्त कटे नहीं काट रहा था,  वो शहर मेरा पहले से घूमा हुआ था इसलिए कही घूमने नहीं आया।  छुट्टियों मै बहुत बोर हुआ ।  मै वहां कही नहीं जा सकता था वहां के लोग हमजैसे नहीं है , रात में भी कोई दरवाज़ा खटखटा की भाग जाता है ।  मै बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हूँ इसलिए इधर उधर घूमने भी नहीं गया।  (लडकिया समझ नहीं पाएंगी की इसमें धार्मिकता कहा से आ गयी)  हालत बहुत ख़राब थी।  अब मै वहां दोबारा नहीं जाऊंगा, बोर बहुत हुआ हूँ , कोई बात करने  वाला नहीं था। मै बस यहाँ आने के लिए बेताब था। अबकी जाऊंगा तो सिर्फ पैसे कमाने जाऊंगा।  अपने शौक से नहीं जाऊंगा।  इतनी बात सुन मुझे याद आया की मुझे अपनी पत्नी को फ़ोन करना है।  नहीं किया तो घर जा कर क्या जवाब दूंगा।  मै उठ लिया वहां से और पत्नी को फ़ोन मिलाया।  वापस आया तो महाशय जा चुके थे।  एक घंटे तक लोगो को अपनी गाथा सुनाई।  सब उनकी बाते सुन भावविभोर हो गए। 

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