मेरे विचार मेरे शब्द
इस ब्लॉग में मेरे निजी विचार है। मैं इस ब्लॉग में अपने विचार व्यक्त करता हूँ और दुनिया से अपना विचार शेयर करता हूँ।
Monday, February 16, 2026
विवाह के चौदह बरस
Thursday, February 12, 2026
दिखावे का महोत्सव और हाशिए पर दोस्ती: आडंबर और सच्ची दोस्ती के बीच का संघर्ष।
हम आज उस दौर में हैं, जिस दौर में कभी हमारे माता-पिता थे। कॉलेज के दिन बीत चुके हैं और शादी के बाद अब बच्चे भी बड़े हो गए हैं। बच्चे अब अपना ख्याल खुद रख सकते हैं। अब हमारे पास दोस्ती निभाने का वक्त और हौसला दोनों है, पर मैं देख क्या रहा हूँ?
समय के साथ दोस्ती के सारे समीकरण बदल रहे हैं। जो दोस्त हमारे साथ फकीरी में रहे, जिन्होंने एक ही थाली में निवाले तोड़-तोड़ कर खाए, अब उनका परिवेश बदल चुका है। उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार उनके मित्र और मंडली बदल गई है। हम अलग-अलग आर्थिक समूहों में बंट गए हैं, जहाँ एक समूह का व्यक्ति दूसरे समूह में अब सहजता से जा नहीं सकता।
यदि आप एक साधारण जीवन जीते हुए यह चाहते हैं कि सामने वाला भी वैसा ही सरल रहे, तो यह अब संभव नहीं लगता। आपकी सरलता कभी-कभी आपके लिए ही कठिनाई बन जाती है, क्योंकि जब आप सादगी चुनते हैं, तो सामने वाला आपके प्रति अपना व्यवहार कठिन (जटिल) कर लेता है।
दोस्त अब हमें हमारी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के अनुसार ही दावत पर बुलाते हैं। 'विशिष्ट' श्रेणी के मित्रों के लिए 'रिटर्न गिफ्ट' अलग से पैक होता है और यदि आप साधारण हैं, तो आपके हिस्से साधारण उपहार ही आता है।
जन्मदिन और विवाह की वर्षगांठ पर आपको घर तो बुलाया जाता है, पर उस दिन नहीं जिस दिन वास्तविक उत्सव होता है। आपको कुछ दिन पहले या बाद में बुलाया जाता है, क्योंकि उस मुख्य दिन पर तो उन्हें अपने 'खास' लोगों के साथ ही जश्न मनाना है।
हम बचपन से साथ रहे और हर पल साथ जिया, पर अब उन्हें पुरानी दोस्ती भी निभानी है और नए रसूखदार लोगों के साथ भी जुड़े रहना है। इसलिए असली दिन 'उनके' नाम रहता है और बाकी कोई दिन 'हमारे' नाम, ताकि उनके मन में कोई अपराधबोध (गिल्ट) भी न रहे और उनका महोत्सव भी संपन्न हो जाए।
Monday, February 9, 2026
Thursday, January 8, 2026
अमरनाथ — वादा जो पूरा न हुआ
Saturday, January 3, 2026
अव्यक्त प्रेम की सुंदरता
इसलिए हर किसी को प्यार करना चाहिए। हमने यह भी देखा है कि प्रेम कभी सिर्फ एक से नहीं होता है। काल, स्थान और परिस्थिति पर निर्भर करता है कि आपको किससे और कितना प्यार होगा।
प्रेम भाई, बहन, दोस्त—किसी से भी हो सकता है। प्रेम में इंसान सबकुछ लुटा सकता है और लुटाने के बाद भी उसे खुशी का ही अहसास रहता है।