Monday, July 25, 2016

चाणक्य -सिद्धांत ‍और नीतियाँ

आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्‍यात हुए। 

इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत ‍और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन और जीवानानुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्‍देश्य से अभिव्यक्त किया।

वर्तमान दौर की सामाजिक संरचना, भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन को सुचारू ढंग से बताई गई ‍नीतियाँ और सूत्र अत्यधिक कारगर सिद्ध हो सकते हैं। चाणक्य नीति के द्वितीय अध्याय से यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ अंश - 

1. जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं।

2. झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, दुस्साहस करना, छल-कपट करना, मूर्खतापूर्ण कार्य करना, लोभ करना, अपवित्रता और निर्दयता - ये सभी स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं। चाणक्य उपर्युक्त दोषों को स्त्रियों का स्वाभाविक गुण मानते हैं। हालाँकि वर्तमान दौर की शिक्षित स्त्रियों में इन दोषों का होना सही नहीं कहा जा सकता है।

3. भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं।

4. चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

5. चाणक्य का मानना है कि वही गृहस्थी सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है। पिता का भी कर्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे। इसी प्रकार ऐसे व्यक्ति को मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो।

6. जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

7. जिस प्रकार पत्नी के वियोग का दुख, अपने भाई-बंधुओं से प्राप्त अपमान का दुख असहनीय होता है, उसी प्रकार कर्ज से दबा व्यक्ति भी हर समय दुखी रहता है। दुष्ट राजा की सेवा में रहने वाला नौकर भी दुखी रहता है। निर्धनता का अभिशाप भी मनुष्य कभी नहीं भुला पाता। इनसे व्यक्ति की आत्मा अंदर ही अंदर जलती रहती है।

8. ब्राह्मणों का बल विद्या है, राजाओं का बल उनकी सेना है, वैश्यों का बल उनका धन है और शूद्रों का बल दूसरों की सेवा करना है। ब्राह्मणों का कर्तव्य है कि वे विद्या ग्रहण करें। राजा का कर्तव्य है कि वे सैनिकों द्वारा अपने बल को बढ़ाते रहें। वैश्यों का कर्तव्य है कि वे व्यापार द्वारा धन बढ़ाएँ, शूद्रों का कर्तव्य श्रेष्ठ लोगों की सेवा करना है।

9. चाणक्य का कहना है कि मूर्खता के समान यौवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति कामवासना के आवेग में कोई भी मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु इनसे भी अधिक कष्टदायक है दूसरों पर आश्रित रहना।

10. चाणक्य कहते हैं कि बचपन में संतान को जैसी शिक्षा दी जाती है, उनका विकास उसी प्रकार होता है। इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उन्हें ऐसे मार्ग पर चलाएँ, जिससे उनमें उत्तम चरित्र का विकास हो क्योंकि गुणी व्यक्तियों से ही कुल की शोभा बढ़ती है।

11. वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, जिन्होंने बच्चों को ‍अच्छी शिक्षा नहीं दी। क्योंकि अनपढ़ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूँछ के जानवर जैसा होता है, इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जिससे वे समाज को सुशोभित करें।

12. चाणक्य कहते हैं कि अधिक लाड़ प्यार करने से बच्चों में अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए यदि वे कोई गलत काम करते हैं तो उसे नजरअंदाज करके लाड़-प्यार करना उचित नहीं है। बच्चे को डाँटना भी आवश्यक है।

13. शिक्षा और अध्ययन की महत्ता बताते हुए चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का जन्म बहुत सौभाग्य से मिलता है, इसलिए हमें अपने अधिकाधिक समय का वे‍दादि शास्त्रों के अध्ययन में तथा दान जैसे अच्छे कार्यों में ही सदुपयोग करना चाहिए।

14. चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

15. चाणक्य के अनुसार नदी के किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है, क्योंकि नदियाँ बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उजाड़ देती हैं। इसी प्रकार दूसरे के घरों में रहने वाली स्त्री भी किसी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है। इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देने वाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। इसमें जरा भी संदेह नहीं करना चाहिए।

17. चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह वेश्या धन के समाप्त होने पर पुरुष से मुँह मोड़ लेती है। उसी तरह जब राजा शक्तिहीन हो जाता है तो प्रजा उसका साथ छोड़ देती है। इसी प्रकार वृक्षों पर रहने वाले पक्षी भी तभी तक किसी वृक्ष पर बसेरा रखते हैं, जब तक वहाँ से उन्हें फल प्राप्त होते रहते हैं। अतिथि का जब पूरा स्वागत-सत्कार कर दिया जाता है तो वह भी उस घर को छोड़ देता है।

18. बुरे चरित्र वाले, अकारण दूसरों को हानि पहुँचाने वाले तथा अशुद्ध स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के साथ जो पुरुष मित्रता करता है, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। आचार्य चाणक्य का कहना है मनुष्य को कुसंगति से बचना चाहिए। वे कहते हैं कि मनुष्य की भलाई इसी में है कि वह जितनी जल्दी हो सके, दुष्ट व्यक्ति का साथ छोड़ दे।

19. चाणक्य कहते हैं कि मित्रता, बराबरी वाले व्यक्तियों में ही करना ठीक रहता है। सरकारी नौकरी सर्वोत्तम होती है और अच्छे व्यापार के लिए व्यवहारकुशल होना आवश्यक है। इसी तरह सुंदर व सुशील स्त्री घर में ही शोभा देती है।

Tuesday, July 19, 2016

मैनेजरियल क्वालिटीज़


Managerial Qualities

मैंने तो मैनेजमेंट की किताबो में पढ़ा था की एक मैनेजर वो होता है जो नीचे लिखी चीज़ो पर अमल करे
  1. प्लानिंग 
  2. ऑर्गनिजिंग 
  3. कमांडिंग 
  4. कोऑर्डिनेटिंग 
  5. कंट्रोलिंग 
इनके साथ साथ वो

  • एक अच्छा मोटिवेटर हो
  • अपने अंडर में काम करने वालो को सम्मान दे।
  • उन्हें ग्रो करने के उचित मौके प्रदान करे।
  • उनसे नॉलेज शेयरिंग करे।
  • उन्हें भी मैनेजर बनने के गुर सिखाए
  • कन्फ्लिक्ट मैनेज करे।   इत्यादि। . इत्यादि


पर मुझे आज जाकर पता लगा की वो मैनेजरियल क्वालिटी मैनेजमेंट की किताबो में नहीं।  कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मिलेगी।  जहां उन्होंने मित्र और शत्रु की परिभाषा की है।  मित्र से बढ़कर कोई शत्रु नहीं होता है, शत्रु का शत्रु आपका मित्र होता है ।  आप अपने मित्र पर भी यकीन न करे,  उसकी भी जासूसी करे।  हर वक्त अपने दिमाग को चौकन्ना रखे। किसी पर निर्भर न रहे।
देखता हूँ उसे भी पढ़कर शायद एक दिन मेरे अंदर मैनेजरियल क्वालिटी आ जाये।  

सम्मान से अपमान तक - "उसी का ईमा बदल गया है , कभी जो मेरा खुद रहा था "

मैं कुछ दिनों से ऐसा महसूस कर रहा हूँ की,  यदि आप किसी को ज्यादा सम्मान देते है,  उसकी पसंद या न पसंद का ध्यान रखते है  और हर काम करने से पहले उसकी सलाह लेते है और अपनी सफलता का कुछ श्रेय उसे देते है।    तो एक दिन ऐसा आएगा जब वो आपका सम्मान करना बंद कर अपने आपको आपका भगवन या भाग्यविधाता समझ बैठेगा।  वो भूल जाता है की जो व्यक्ति आपको सम्मान दे रहा है उसे भी सम्मान चाहिए । धीरे धीरे वो आपकी अर्जित सफलता को अपने अहसान  के तले दबा देता है।  फिर आप सम्मान करना बंद कर देते है।


फिर आता  वो वक्त जब वो आपका सम्मान  न पाकर झल्ला जाता है।  फिर दौर शुरू होता है आपके अपमानो का,  एक झड़ी  सी लग जाती है आपकी आत्मा पर चोट करने की जो कभी खत्म नहीं होती।

"उसी का ईमा बदल गया है , कभी जो मेरा खुद रहा था "

Saturday, June 18, 2016

अरेंज या लव मैरज

इन दिनों मैं कुछ ऐसे हालत देख रहा हूँ  की भविष्य में शायद अरेंज मैरज करना बीते दिनों की बात होगी। फलसफा कुछ ही दिन पुराना है जब एक लड़की ने अपनी सगाई के बाद लड़के को इस लिए रिजेक्ट कर दिया क्योकि  वो उसका ड्रीम बॉय नहीं था।
कल अगर आप खुद अपने लिए एक लड़की न ढूँढ सके तो शायद आप कवारे ही रह जायेंगे।  आपके माता पिता भी आपके लिए कुछ न कर पाएंगे।  आपकी पसंद की हुई लड़की को देखकर, वे  ये न बोल पाएंगे की मैं इससे भी अच्छी लड़की तेरे लिए ढूँढ देता। 

Saturday, August 1, 2015

बाप का जूता

आदि अब एक साल का हो गया है ,
कुछ दिन पहले,  मै जब ऑफिस जाने के लिए  तैयार हो रहा था , कपडे पहन ही  रहा था की देखता हूँ आदि लड़खड़ाते हुए अपने हाथो में मेरा जूता लेकर आ रहा था, मै उसे देख दांग था , की उसे अब यह अहसास होने लगा है की पापा ऑफिस जाते वक्त इसे पहन कर जाते है।  जूता लाकर उसने मेरे पैरो के पास रख दिया।  मैंने झट से उसे अपनी गोद में उठाकर प्यार किया। 

Sunday, July 26, 2015

बप्पा- तुम एक सितारा थे

बप्पा  … मेरे लिए सिर्फ एक शब्द नहीं है इसकी एक परिभाषा है, वो आप है.
आपके जाने के बाद मैंने जब आपके जीवन पर एक नज़र डाली तो मुझे ऐसा लगा की आपका जीवन तो एक सितारे की तरह था।


आपने एक सितारे की तरह हमसबको प्रकाशित किया।

एक सितारा जन्म लेने से पहले अपने आस पास की हर चीज़ को अपने गुरुत्वाकर्ष से आकर्षित करता है.. फिर वह हर चीज़ को अपने में समाहित कर लेता है .. फिर वह अपने ज्ञान से एक प्रकाश उत्पन्न करता है और वह प्रकाश पूरी दुनिया पर छा जाता है, तब जाकर एक सितारे का जन्म होता है।

आपने भी एक सितारे की तरह जन्म लिया।  जितना मैंने अपने पापा से आपके बारे में सुना है की  आपने भी अपने आस पास के हर व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व से आकर्षित किया। उन्हें अपना बनाया।  आपने संघर्ष करते हुए लोगो को अपनी कठिनाइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। आपने गरीबी, सामाजिक असमानता से लड़ते हुए एक ऐसा प्रकाश उत्पन्न किया जिससे सब प्रकाशित हुए. आपने अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।  मुनसिब बने, आपकी सफलता को देख पूरी पीढ़ी आपके पद्चिन्नो पर चलने का प्रयाश करने लगी, पापा बताते है उन दिनों वो आपके कितने मुरीद थे। पापा ने भी जीवन के संघर्ष के साथ अपनी पढाई करते रहे और सफलता प्राप्त की।

जब सितारा जवान होता है तो वह अपना प्रकाश दूर दूर तक फैलाता है , प्रकाश इतना तेज़ होता है की अपने अगल - बगल के छोटे सितारों की रौसनी को काम कर देता है। उसके प्रभाव से या तो उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है या वो उनसे दूर चले जाते है । उसके अगल-बगल कोई और सितारा नहीं होता है।  फिर वो सितारा एकाकी हो जाता है , उसके अगल बगल सिर्फ गृह ही  चक्कर लगते है।  जो सिर्फ उस तारे के प्रकाश पर ही निर्भर रहते है।

आपने भी सफलता प्राप्त करने के बाद अपनी ख्याति दूर दूर तक फैलाई सिर्फ हम ही नहीं ,सब प्रभावित थे आपसे। आपके अगल बगल सिर्फ आपका ही प्रकाश था किसी और का प्रकाश आपतक नहीं पहुचा, आपने जिन सितारों को जन्म दिया, जो स्वयं में भी  एक सितारा थे , आप जान ही नहीं पाये की उनमे भी अपना प्रकाश है , आपके प्रभाव में उनका भी प्रकाश छुप गया।  वो भी आपअपने को खोजने में आपसे दूर होते रहे  और आपको पता भी नहीं लगा. आप सिर्फ अपने प्रकाश के मद में रहे,  की वो प्रकाश जैसे कभी खत्म न होगा ।  आपसे भी ज्यादा चमकदार कोई और सितारा हो सकता है ऐसा आपने कभी नहीं सोचा।

आपके पास  सिर्फ आपको सही कहने वाले लोग ही रहे।  कोई नहीं था जो आपको आपकी गलतियों के लिए आपको आपसे कुछ कहे ।  जो थे आपको आपकी गलतियों पर आपको कुछ बोल सके उन्हें धीरे धीरे अपने से दूर कर दिया।  उनकी बाते आपको शूल की तरह चुभती थी । आपके इस व्यवहार ने आपको और अकेला कर दिया।
जब सितारा बूढा होता है तब वो समझ ही नहीं पता है की उसका प्रकाश काम हो गया है । उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आता है , अब उसका गुरुत्वाकर्ष उतना तीव्र नहीं होता है की अपने सरे ग्रहो को खुद से बांधे रख सके।  सब उससे दूर हो जाते है और रह जाता है वो सिर्फ अकेला।

आपके साथ भी कुछ ऐसा हुआ।  जब आप  रिटायर हुए तो आप समझ नही पाए की अब वो प्रकाश आपके पास नहीं रहा ।  आपका व्यवहार समय के साथ नहीं बदला।  आपने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की अब आपको बदलना चाहिए, आपने जिन सितारों जो जन्म दिया था उनके प्रकाश को आप अपना प्रकाश बना उनका प्रकाश बढ़ाते। इसके विपरीत आप उनसे अलग अपनी नयी दुनिया बनाने निकल पड़े,  बिना किसी का साथ लिए।  आप और बस आपकी तन्हाई आपके पास रही।  आपने सबसे मिलना जुलना भी बंद कर दिया।  आपने अपने अनुभव को बांटना बंद कर दिया जिसे समझ का कल्याण हो सके।  अपने पुराने मित्रो और सम्बन्दियो को साथ लेने के बजाये आपने अकेले रहना पसंद किया।  दीवारो के बीच आपने अपना जीवन सीमित कर लिया।

जब एक सितारा अपने जीवन की अंतिम पड़ाव पर होता है तो वह फिर से अपने अगल बगल के सारी चोजो को आकर्षित करता है।  पर इस बार प्रकाश देने के लिए नहीं उनके प्रकाश को अपने में समाहित करने के लिए ।    फिर वो ब्लैकहोल हो जाता है कुछ भी  उससे बाहर नहीं जाता है और अंत में एक विस्फोट से साथ अपना अंत कर लेता है। शायद नए जीवन की तलाश में वो पूरे ब्राम्हण में फ़ैल जाता है।

आप भी अपने जीवन के अंतिम दिनों में इतने निराशा वादी हो गए थे की आशा की एक भी किरण आपतक नहीं पहुंची। . जो पहुंची उसे भी आपने अपने अंदर समां लिया।  उसे बहार निकलने नहीं दिया । सबकुछ होने के बाद भी आपके पास कुछ नहीं था।
और आपने भी अपना अंत भी एक विस्फोट के साथ किया।

आप अपने आपको भी दान कर गए इस धरती पर नए जीवन की खोज के लिए ।


आपका जीवन एक मिसाल है हमसब के लिए.. आपके जीवन से हम हमेशा प्रेरणा लेते रहेंगे।




Wednesday, April 8, 2015

आदरणीय पापा

आदरणीय पापा,
आज आपका जन्मदिन  है।  बहुत बहुत मुबारक हो।
 मै आपके पास नहीं हूँ अभी,  पर मै आपको बहुत मिस कर रहा हूँ।
मै बहुत ही सौभाग्यशाली हूँ की मैंने आपके पुत्र के रूप में जन्म लिया है।
आपने बहुत संघर्ष किया है हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए।  आपने मुझे अच्छी शिक्षा दी।  अच्छे संस्कार दिए जिससे की मै अपने जीवन  में आई चुनौतियां का सफलता पूर्वक सामना कर सका और आपके उन्ही संस्कारो  के द्वारा मै भविष्य में आने वाली चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करूँगा।
  मै अब बड़ा हो गया हूँ और अब आपका जूता मेरे पैरो में आने लगा है।  मै आपकी स्थिति समझने की कोशिश करने लगा हूँ।  एक पिता होने की नाते आपके द्वारा दिए गए  संस्कारो को आगे बढ़ने का दायित्वा अब मेरे कंधो पर है।  मै पूरी कोशिश करूँगा की आपके द्वारा दिए गए संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुँचाऊँ।

मै आपके बेहतर स्वस्थ और लम्बी उम्र की कामना ईश्वर से करता हूँ।