Monday, January 27, 2025

रिश्तों का नया अध्याय


अभी कल ही हम भांजी की शादी में शामिल हो घर आये है, रिस्तो का ताना बना भी अजीब है, अनुषा की शादी के बाद अब हम ससुर हो गए। 

अपने आंखों के सामने देखते देखते न जाने कब बच्चे बड़े हो गए। अहसास ही नही हुआ कि उनके साथ हम कब इतने बड़े हो गए। 
माँ बाप पर ससुर होने का तमगा लगा तो आम बात थी पर हम अब उसी दौर में है। अब हमारा हाथ आशीर्वाद देने के लिए अपने आप ही उठ जाता है। 

ईश्वर से बस यही कामना करता हूँ कि दोनों सदैव प्रसन्नचित रहकर अपने दाम्पत्य जीवन का निर्वाहन करे और हर संभव खुशियाँ उनके कदम चूमे। 

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