Monday, August 19, 2019

कहानी मेरी जान की

आम दिनों की तरह ही, मै आज सुबह तैयार होकर ऑफिस जाने के लिए उठा, तो सोचा मोबाइल पर मेसेज चेक कर लूं। एक एक कर मेसेज चेक ही कर रहा था कि, देखता क्या हूं, ऑफिस के एक ग्रुप में ढेर से मैसेज आए हुए है। मैंने सोचा इतने मैसेज, कुछ खास हुए है क्या?आज।  ग्रुप में देखा तो सिर्फ मेरी ही चर्चा हो रही थी।  मुझे लगा कुछ बवाला हो गया, मेरे नाम से।  लोग सिर्फ जान की बात कर रहे थे। प्रश्नों का अंबार लगा हुआ था।

कोई बोला राहुल कल ज्यादा चढ़ गई थी क्या?
किसी ने बोला यह मैसेज किस जान को किया है तुमने?
कौन जान है तुम्हारी?
स्वाति को खबर करूं की तुम्हारी कोई और भी जान है।

स्क्रॉल किया तो देखता क्या हूं, जो मैसेज मैंने कल रात को अपनी पत्नी को किया था,  वो पता नहीं कैसे इस ग्रुप में दिख रहा था। मेरे दिमाग में कल रात की सारी बात याद आ गई।

कल रात स्वाति जो कि अभी अपने मायके में है से बात हो रही थी।  सोने से पहले स्वाति ने एक प्यार भरा मैसेज भेजा था। उसका जवाब मैंने "आई लव यू मेरी जान" लिख कर दिया था पर ना जाने वो मैसेज ऑफिस के ग्रुप ने कैसे चला गया पता नहीं।  

मैंने उस मैसेज को झट से रिमूव किया, पर काफी देर हो चुकी थी। सबने पढ़ लिया था। मै यही सोंच रहा था कि, ऑफिस में आज तो सब मेरा खूब मज़ाक उड़ाएंगे । खैर डरते डरते मै ऑफिस पहुंचा। चेयर पर बैठा भी ना था कि दोस्तो की आवाज़ आ गई।

भाई जान आ गए!!!
भाई जान, तुम्हारी जान कैसी है?
कौन है तुम्हारी जान?
हम भी जाने कौन है वो?

मैंने उन्हें पूरी घटना विस्तार से बताई कि, भाई गलती से वो मैसेज ग्रुप में चला गया था, पर कोई भी मेरे मजे लेने का मौका हाथ से कैसे जाने देता। क्योंकि आज उनका दिन था। मेरा नहीं।

सब एक दूसरे से बात भी कर रहे थे तो बस जान शब्द का प्रयोग ज्यादा कर रहे थे। जब भी जान शब्द वाक्य में आता तो तेज बोलते।
दिन भर जान पर ही बात होती रही।

उनमें से कुछ वाक्य है।

- आज मेरी जान में जान आ गई।
- मेरी बहुत लोगो से जान पहचान है।
- मै अनजान लोगो से बात नहीं करती।
- तुम्हारी बातें तो जानलेवा है।
- तुम्हें जाना हो तो जाओ।
- भाई जान, ऐसा मत कर , नहीं तो जान से जाओगे।
- जानेदो जान।
- जाने वालो को जाने दो।
- बच्चे की जान लोगे क्या?
- कोई जान से खिलवाड़ नहीं करेगा।
- मै जान पे खेलता हूं।
- हम जान हथेली पर लेकर चलते है।
- ये काम जान बूझ कर मत करना।
- जान दे भाई।
- आज मै सब कुछ जान गया।
- जाने दो।
- जानते हैं हम सब।
- जानदार काम किया है भाई जान।
- बेजान सा हो गया है जानवर।

एक दोस्त ने कहा कि तुम आज ट्रेन से जा रहे हो तो,  अनजान लोगो से जान पहचान मत बढ़ाना, नहीं तो जान को खतरा हो जाएगा।
होशियार रहना, क्योंकि जान है तो जहान है।

शाम ढली, तो मेरी भी जान में जान आई। मै भी अपने जान पहचान वाले लोगों के साथ बस में जाने का मौका मिला । अपनी जान से बात करते करते अनजानी जगह पहुंचा।  फिर अनजाने लोगो की मदद से जानी पहचानी जगह नई दिल्ली आ गया।  अनजाने में ही सही लोगो को जान पर बात करने का मौका मिला।

No comments:

Post a Comment