यह किस्सा मेरे कॉलेज के दिनों का है, मै अपने कॉलेज से बस चंद मिनटों की दूरी पर अपने मित्र के साथ रहा करता था। मै कॉलेज में अपनी बेफिक्री के लिए मशहूर था, जगजीत सिंह की गज़ले कंप्यूटर पर लगा, घंटो गुनगुनाता रहता था। मेरा रूम मेट, वह बहुत ही व्यवस्थित तरीके से रहता था। उसका हर सामान सही समय पर, सही जगह ही रहता था और मेरा हर सामान बिस्तर पर ही। वह हर वक्त मुझे सलीके से रहने के लिए बोलता था और मै अपनी ही धुन में। उसे सफ़ेद रंग बहुत पसंद था , उसकी हर चीज़ सफ़ेद थी। चादर, तकिया और रज़ाई का लिहाफ सब कुछ सफ़ेद , वह ज़्यादातर कपडे भी सफ़ेद ही पहनता था। जबकि मेरे पसंदीदा रंग के बस कुछ कपडे ही थे, वो भी गहरे रंग के थे। हमारी तकिया, बिस्तर और रज़ाई के लिहाफ, सब गहरे रंग के होते थे , वह भी इसलिए की मुझे बार बार उन्हें धुलना न पड़े।
मै जब भी अपने घर जाता तो माँ, उसे ठीक से धुल देती थी ,जबकि मेरा मित्र हर दूसरे -तीसरे दिन अपनी चादर और तकिया धुला करता था। सफाई की इतनी धुन थी उसे की पूछो मत। मुझे वह हर हफ्ते, बार-बार यही कहता था की भाई चादर तकिया गंदे हो गए होंगे, तुम धुल लो, पर मेरे कानो पर ज़ू तक नहीं रंगति थी। एक बार की बात है जब उसके लाख कहने पर मैंने बिछाने वाली चादरे भिगो दी, धुलने के लिए। एक दिन भीगी रही वो चादरे, तभी मेरा रूममेट आया और बोला भाई तुम धुल ले, नहीं तो चादर ख़राब हो जाएगी, पर मुझे लगा की कुछ दिन और भीगी रहेगी तो थोड़ा और साफ़ हो जाएगी। आलस्य चरम पर था, कब दो दिन से सात दिन हो गए पता ही नहीं लगा। रूम मेट ने एक दिन मुझे पकड़ लिया और बोला भाई जिस बाल्टी में तुमने चादरों को भिगोया था, उससे बदबू आ रही थी, इसलिए मैंने उसे उठाकर बहार खुली जगह में रख दिया है। जब भी वक्त मिले तो धुल लेना। मैं जैसे ही बहार गया और देखा, की चादरों का तो बुरा हाल हो गया था। बदबू इतनी थी की बर्दास्त नहीं हो रही थी। किसी तरह मैंने उसका पानी फेका और अपने पैरो का प्रयोग करके धुल डाला । चादर फैलाते समय , मै देखता क्या हूँ की दोनों चादरों का असली रंग तो जा चूका था। दोनों पर तीसरा ही रंग चढ़ गया था। चादरों को जब मेरे रूम मेट ने देखा तो वह दंग रह गया। उस दिन के बाद उसने मुझे कभी भी चादरों को धुलने की सलाह नहीं दी।
इतने बरस बीत जाने के बाद , मेरे मित्र ने उस चादर की घटना को विस्तार पूर्वक मेरी पत्नी को बताई। पूरी कहानी सुनाने के बाद, मेरी पत्नी के चेहरे की भावभंगिमा मुझे समझ में नहीं आ रहा है। उस घटना पर वो गर्व करे या शर्म।
kabhi aalas na karo chadar dhone mai..
ReplyDeletePal unh he na gavao soane mai..
Aur bhi kisse kahaniya hoge tumhre pass e mere dost...
unhe nikalo dil ke kisi kone se