Thursday, May 11, 2017

हैप्पी मदर्स डे

प्रिय दोस्तों ,

मै अपने जीवन की एक प्रमुख घटना आप सबसे साझा करना चाहता हूँ , बात मेरे छुटपन की है , गर्मी की छुट्टिया चल रही थी, हमारे दिन कैरमबोर्ड़, शाम क्रिकेट और रात छुपन छुपाई खेल बीत रहे थे।  हम खेल में इतने व्यस्त रहते थे की अक्सर माँ द्वारा पुकारा जाना हमे सुनाई ही नहीं देता था।  माँ जब तक डंडा लेकर खुद नहीं आती थी तब तक हमे साफ़ सुनाई नहीं देता था। वो डंडा मारती कम थी पटकती ज़्यादा थी, हमे चोट कम लगती थी और चिल्लाते ज़्यादा थे,  एक दिन की बात है जब माँ ने हमे फिर से आवाज़ लगायी पर हमे सुनाई नहीं दी, थक कर हम जब घर पहुंचे तो माँ डंडा लेकर बैठी हुई थी।  माँ ने फिर से हमे डांट लगायी फिर इस बार न जाने क्या हुआ मेरे मुँह से शायद कोई गाली निकल गयी।  फिर क्या था , माँ का वो रौद्र रूप मुझे आज भी याद है, वो मर्दानी बन मुझे दबोच लिया और पास में रखी हरी मिर्च मेरे मुँह में लगा दी, और बोली मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है की मेरा बेटा किसी को गाली दे।  मेरे मुँह में लगी मिर्च देख पुरे मोहल्ले वाले आ गए।  कोई मुझे पानी से मुँह धुला रहा था तो कोई देसी घी लगा रहा था।  माँ मेरे पास बिल्कुल भी नहीं आयी।  कुछ घंटो के बाद जब मिर्च की जलन शांत हुई तो मैं जब माँ के पास आया तो देखा, माँ किचन में बैठी रो रही थी।  पता नहीं, माँ के उस रुदन का मेरे दिल पर बहुत असर हुआ।  माँ ने गले लगा मुझसे वादा लिया की मै कभी भी किसी को गाली नहीं दूंगा।  उस दिन के बाद से मैंने उस वादे को निभाया है।


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