Saturday, June 24, 2017

चिरौंजी लाल की पत्नी और उनकी गर्लफ्रैंड

चिरौंजी लाल हमारे कॉलेज के दिनों के मित्र है, कॉलेज में वो अपनी खामोशी के लिए प्रसिद्ध थे, इश्क़ हो या मुश्क सारा काम को अपनी खामोशी से निपटा देते थे।

कॉलेज में वो जिस लड़की से प्यार करते थे कभी उससे अपनी मोहब्बत का इज़हार न किया। बस ठंडी आहे भरते रहे , उसके सामने आने पर उनके चेहरे पर गजब की मुस्कान छा जाती।

छुट्टी के दिनों में वो उसकी एक झलक पाने को  गर्ल्स हॉस्टल के बाहर खड़े रहते थे। उसे देखने के बाद ही घर वापस आता,  कॉलेज खत्म होते होते दोनों में अच्छी दोस्ती तो हो गयी थी पर भाई ने कभी अपनी मोहब्बत ज़ाहिर नही की उसके सामने।

कॉलेज खत्म हुआ हम नौकरी की तलाश में भटकने लगे , नौकरी लगी फिर हम सबके समझाने पर उससे मोहब्बत का इज़हार करने का मन बनाया। चिरौंजी ने उसे बुलाया मिलने के लिए, बस वो मोहब्बत का इज़हार करने को था, कि लड़की ने अपनी शादी का कार्ड उसे थमा दिया। कार्ड ले वो वो घर आ गया।

कार्ड देख चिरौंजी लाल हम सबसे लिपट कर खूब रोया। उसके हालात देख हमसे रहा नही जा रहा था। बहुत समझने के बाद भाई कुछ संभला ही था कि उसकी शादी की डेट आ गयी। चिरौंजी लाल का हौसला भी गजब का था। उसकी शादी में जाने को भी तैयार हो गया,  कार्ड हमे भी आया था इसलिए  हम भी साथ हो लिए।

उसके घर पहुचने पर हमारे ठहरने की अच्छी व्यवस्था थी। हम उससे मिलने भी उसके घर गए, बहुत खुश थी वो अपनी शादी में , दूल्हा जो उसकी ही पसंद का था।  जैसे तैसे शादी निपटी। वक्त बिदाई का भी आया। लड़की को रोता देख चिरौंजी लाल के आंखों से आंसू छलक उठे जैसे उसके सामने से उसकी दुनिया जा रही हो,  हम उसे सबकी नजरों से बचते हुए घर के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए निकल लिए।

धीरे धीरे उसकी यादे भी ओझल हो गयी। सब अपनी नौकरी में व्यस्त हो गए। चरौंजी लाल भी अब एक अच्छी कंपनी में जॉब करने लगा था, पर खामोशी की आदत अभी में नही गयी थी। हमारे हर विवाद में वो बस खामोशी से ही काम लेता था।

घर वालो ने भी उसकी शादी तय कर दी। लड़की छोटे शहर से बड़े तेज़ दिमाग वाली मिली थी, सगाई में भी वो खूब पटर पटर बोल रही थी, उसे देख हमे लगने लगा था कि ये लड़की चिरौंजी लाल की खामोशी तोड़ेगी।

शादी हुई हम खूब नाचे, दुल्हन ले वो घर आया। चिरौंजी लाल भी बहुत खुश था, दोनों जीवन का आनंद ले ही रहे थे कि एक दिन चिरौंजी लाल के फ़ोन पर एक दिन घंटी बजती है और उधर से आवाज़ आती है , पहचानो कौन, चिरौंजी लाल तुरंत खड़े हो बालकनी में निकल लेते है, फिर अंदर से आवाज़ आती है, किसका फ़ोन है, चिरौंजी आवाज़ को इग्नोर कर फोन में व्यस्त हो जाता है, खूब ढेर सारे गेस करने के बाद उधर से वो अपना  नाम सुमन बताती है, नाम सुन चिरौंजी का सर फिर से चकरा जाता है। कॉलेज का प्यार फिर से आंखों के सामने आ जाता है, चेहरे के हाव भाव चिरौंजी लाल की पत्नी देख लेती है और पूछती है कि, कौन है? किसका फ़ोन है? चिरौंजी बिना कुछ बताए फ़ोन काट देते है और बोलते है ऐसे की किसी दोस्त का फ़ोन था।

अब सुमन और चिरौंजी दोनों व्हाट्सएप्प पर चैट करने लगते थे अपनी पत्नी से छुपकर, एक दिन उसकी पत्नी उसका फ़ोन पा जाती है और दोनों की बाते पढ़ लेती है उसमें सुमन ने लिखा था कि

तुम मुझे याद नही करते, मैं तो तुम्हे बहुत याद करती हूं। कॉलेज के आखिरी दिनों में हम कितना साथ रहते थे, मैं तुम्हे अपनी सारी बात बताती थी, हम दोनो कितना हँसते थे, तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त थे अगर मेरी ज़िंदगी मे आदित्य नही आते तो मैं तुमसे शादी कर लेती। आई लव यू .........

इतना पढ़ते ही चिरौंजी की पत्नी का रौद्र रूप देखने लायक था। जिस चिरौंजी की आवाज़ सुनने को दुनिया तरसती थी और आजकल चिरौंजी के कराहने की आवाज़ दो घर आगे और दो घर पीछे तक आती है। 
चिरौंजी की इस बेवकूफी पर हम भी कुछ बोल न पाए और जो खामोशी चिरौंजी ने अपनाई थी आजकल हमने अपना ली है।

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