यह मेरे निजी विचार है
मुझे लगता है यही किसी को मृत्यु के पश्चात अंग दान करने की उचित कीमत मिले तो वह उत्साहित होगा अपने अंग दान करने को, जिससे जरुरतमंद को सही अंग उपलब्ध होगा , जब चाहे वो अपना अंग बदलवा ले सही कीमत दे कर। वैसे भी गरीब आदमी के बस में नहीं है अंगप्रत्यारोपित करवाना। बस पैसे वाले ही ऐसा करवा पाते है। एक दिन हॉस्पिटल का खर्च भी उठा एक गरीब आदमी के बस के बात नहीं है। कम से कम वो अपनी मृत्यु के पश्चात अपने अंग से मिले हुए पैसे से अपने परिवार का भविष्य सुरछित कर सकता है। यह अंगदान उसके परिवार को इन्सुरेंस की तरह काम करेगा।
अंग दान करने वाले फॉर्म पर नॉमिनी का नाम होना चाहिए जैसा की वसीयत के समय होता है। नाम गुप्त रखा जाता है उसका नाम जिसे अमुक व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी जयजात में हिस्सा मिलेगा।
अंग की गुडवत्ता के हिसाब से उसकी कीमत का निर्धारण होगा। जितना अच्छा अंग उतनी अच्छी कीमत। फिर लोग अपने आपसे प्यार भी करेंगे कुछ भी ऐसा नहीं खाएंगे या पिएंगे जिसे उनके अंगो को हानि पहुंचे। अपने अंग की कीमत बढ़ने के लिए पौस्टिक आहार लेंगे। स्वस्थ्य सम्बन्दी सारी जानकारी रखेंगे क्या खाने से क्या लाभ होग। अपने जीवन से साथ साथ अपनी मृत्यु का भी ध्यान रखेंगे। इंसान की कीमत बढ़ेगी। अंगो की कमी से जूझ रहा देश अंग एक्सपोर्ट करने की स्थिति में आ जाएगा।
अंगो को दोबारा प्रयोग करने के लिए शोध होंगे उसके लिए पैसा भी इकठ्ठा हो सकेगा। अलग अलग अंगो के लिए बैंक बनेगे। इंसानो की कीमत होगी इंसान ऐसे ही सड़को पर भीख नहीं मागेंगे, उनका सम्मान बढ़ेगा।
मुझे लगता है यही किसी को मृत्यु के पश्चात अंग दान करने की उचित कीमत मिले तो वह उत्साहित होगा अपने अंग दान करने को, जिससे जरुरतमंद को सही अंग उपलब्ध होगा , जब चाहे वो अपना अंग बदलवा ले सही कीमत दे कर। वैसे भी गरीब आदमी के बस में नहीं है अंगप्रत्यारोपित करवाना। बस पैसे वाले ही ऐसा करवा पाते है। एक दिन हॉस्पिटल का खर्च भी उठा एक गरीब आदमी के बस के बात नहीं है। कम से कम वो अपनी मृत्यु के पश्चात अपने अंग से मिले हुए पैसे से अपने परिवार का भविष्य सुरछित कर सकता है। यह अंगदान उसके परिवार को इन्सुरेंस की तरह काम करेगा।
अंग दान करने वाले फॉर्म पर नॉमिनी का नाम होना चाहिए जैसा की वसीयत के समय होता है। नाम गुप्त रखा जाता है उसका नाम जिसे अमुक व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसकी जयजात में हिस्सा मिलेगा।
अंग की गुडवत्ता के हिसाब से उसकी कीमत का निर्धारण होगा। जितना अच्छा अंग उतनी अच्छी कीमत। फिर लोग अपने आपसे प्यार भी करेंगे कुछ भी ऐसा नहीं खाएंगे या पिएंगे जिसे उनके अंगो को हानि पहुंचे। अपने अंग की कीमत बढ़ने के लिए पौस्टिक आहार लेंगे। स्वस्थ्य सम्बन्दी सारी जानकारी रखेंगे क्या खाने से क्या लाभ होग। अपने जीवन से साथ साथ अपनी मृत्यु का भी ध्यान रखेंगे। इंसान की कीमत बढ़ेगी। अंगो की कमी से जूझ रहा देश अंग एक्सपोर्ट करने की स्थिति में आ जाएगा।
अंगो को दोबारा प्रयोग करने के लिए शोध होंगे उसके लिए पैसा भी इकठ्ठा हो सकेगा। अलग अलग अंगो के लिए बैंक बनेगे। इंसानो की कीमत होगी इंसान ऐसे ही सड़को पर भीख नहीं मागेंगे, उनका सम्मान बढ़ेगा।
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