Wednesday, October 8, 2014

हम भारतीय कितना थूकते है

मै अपने स्कूटर से रोज़ घर से ऑफिस जाता हूँ रास्ते भर बड़ी सावधानी से इधर उधर देखता रहता हूँ कही थूक का शिकार न हो जाऊ और मेरा नहाना बर्बाद न हो जाए।

कोई पान खा कर थूकता है,
कोई गुटका खा कर,
कोई कुछ न हो तो ऐसे ही थूकता है।

चाहे वो कार से हो,  पैदल हो, साइकिल से हो , बस में हो, सच मानो कही भी हो. बस थूक देते है।
इसमें औरत और मर्द में कोई भेद नहीं है दोनों खूब जम कर थूकते है।

" कभी कभी मुझे वो थूक वाला संवाद याद आ जाता है की अगर हम सवा सौ करोड़ लोग थूके तो पूरा पाकिस्तान डूब जायेगा"

शायद हम उसी दिन के इंतज़ार में है की एक दिन पाकिस्तान पर थूकने का मौका मिलेगा इसलिए हम अपनी आदत बनाए  रखना चाहते है।

आज एक साइकिल पर सवार एक सज्जन इधर देखा न उधर थूक दिया।  पीछे मै थे।  बाल-बाल बचा,  नहीं तो आज नहाना व्यर्थ हो जाता।  भाई को मैंने समझाया की भाई ऐसा मत किया करो  और आगे से ध्यान रखे।
ये बोल मै ऑफिस से लिए निकला लिया।

कभी कभी मेरा मन करता है की मै इन महानुभावो को सम्मान दू।

  

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