Tuesday, October 14, 2014

बेटी ने दिया माँ को जन्म

शनिवार शाम विवेक का अचानक फ़ोन आया और बोला कहाँ हो भाई? बहुत इमरजेंसी है प्रशांत की माँ को खून की जरुरत है, उनकी दोनों किडनियां  फेल हो गयी है और किडनी ट्रांस्प्लांट करनी है इसके लिए १५ यूनिट खून चाहिए। मैंने बोला भाई मै  तो लखनऊ में हूँ और दिल्ली इतनी पास भी नहीं है की तुरंत आ सकूँ। मैंने विवेक से बोला पूरी बात बताओ क्या हुआ ऐसा अचानक तो विवेक ने बताया की आंटी की तबियत ख़राब थी वो पिछले १५ दिनों से गंगाराम में भर्ती थी,  डॉक्टर ने बोला की उनकी दोनों किडनिया फेल हो गयी है।

प्रीती जो उनकी बेटी है सिर्फ २५ बरस की है अपनी एक किडनी अपनी आंटी को दे रही है।

सुनते ही मेरा सर चकरा गया की इतनी काम उम्र में वो अपनी किडनी अपनी माँ को दे रही है, क्या होगा उसका भविष्य, कैसे शादी होगी उसकी, क्या होगा उसका भविष्य,  वैसे भी लोग आजकल शादी नहीं करने जाते है, कोई सामन खरीदने जाते है।  हर पहलू में लड़की परफेक्ट होनी चाहिए फिर बिना किडनी के उससे शादी कौन करेगा। उसके सामने तो पूरी ज़िन्दगी पड़ी है। पता नहीं मेरा सोंचना सही था की गलत मै नहीं जनता।
अपनी किडनी देने का फैसला करना उसके लिए भी आसान नहीं रहा होगा।  निःस्वार्थ भाव से उसने ये फैसला किया होगा।  बहुत है बहादुर लड़की है प्रीती।  मै तुम्हारी इस भावना को सलाम करता हूँ।  

मै  कुछ नहीं कर सकता था, यह अफ़सोस  था मुझे।  मैंने विवेक को बोला की कुछ मित्रो को फ़ोन करता हूँ  अगर वो तैयार हो गए तो गए तो खून का इंतेज़ाम हो जायेगा

हमने(विवेक और मै) अपने कुछ पुराने मित्रो को फ़ोन मिलाया और बोला भाई प्रशांत की माँ को खून की जरुरत है क्या तुम अपना खून दे सकते हो, उन मित्रो ने हमारी सुनी और अपने कुछ और मित्रो को भी लेकर आए।  १० यूनिट का तो इंतेज़ाम हो गया  हो गया,  दूसरे दिन भी मै लखनऊ में ही था।  रात मै दिल्ली के लिए चला फिर मैंने विवेक को फ़ोन करके आंटी का हाल चाल लिया तो पता चला की ५ यूनिट और चाहिए।  फिर मै सुबह सीधे गंगाराम हॉस्पिटल ही पहुंच गया।  मैंने देखा की वह मेरे बाकि मित्र भी वही पहुंचे हुए है।  टनटन, विवेक,  शैलेन्द्र और संदीप  कुल मिलकर हम ५ थे। बाकि खून की आवश्यकता भी पूरी हो गयी।

मेरा ब्लड ग्रुप AB+ था फिर प्रशांत ने बताया की तुम्हारा ब्लड नहीं प्लेटलेट्स चाहिए।  मै तैयार हो गया, फॉर्म भरा और प्राथमिक जाँच के लिए गया, जाँच पूरी होने के बाद मेरा नाम पुकारा गया,  मै गया तोनर्स ने मुझे बोला की मेरी नसे काफी गहराई में है साफ़ दिख नहीं रही है प्लेटलेट्स के लिए जरुरी है की नसे साफ़ दिखे ।  प्लेटलेट्स के लिए १ घंटा लगता है, आप सिर्फ अपना रक्त दान कर दे। मै थोड़ा निराश था पर काम से काम मै अपना खून दान कर सका इसका सकूँ था।  

आंटी और प्रीती का ऑपरेशन चल ही रहा था,  १८ घंटे का ऑपरेशन है। खून दे कर हम ऑफिस के लिए चल दिए।   देर रात पता चला की प्रीती तो ठीक है और अब होश में भी आ गयी है पर आंटी ७२ घंटे के बाद होश में आएंगी तब पता चलेंगे की प्रीती की किडनी को आंटी के शरीर ने एक्सेप्ट किया है की नहीं हम इंतज़ार कर रहे है शुभ समाचार का। ईश्वर सब अच्छा करे और मेरी सारी संकाओ को दूर करे।

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