दिल्ली के चुनावो के दौरान मै आम आदमी पार्टी का घर समर्थक हुआ करता था ऑफिस में लोगो से उनके लिए वाद विवाद किया करता था दिल्ली में उनकी सरकार बनी, फिर गिरी, मै फिर भी उनके साथ था, मगर समय के साथ मैंने देखा की वो हर वो चीज़ जो पहले से चली आ रही है उसका विरोध करने लगते है। अभी तक जैसे कुछ अच्छा हुआ ही न हो। पुरानी सरकारों का विरोध तो ठीक था। बीजेपी का भी विरोध ठीक था। धीरे धीरे जनतंत्र का भी विरोध। बस अपने आपको ही सही बोलना बाकि सबका विरोध। देश के आम चुनावो में उन्होंने कई खुलासे किये , चाहे वो नितिन गडकरी हो या प्रियंका की पति देव का , पर सबूत मांगने पर कुछ न दिया। मानहानि के केस में जेल गए तो बांडभरने की जगह हाई कोर्ट का भी विरोध की सब कुछ बेकार हो. निरंकुश लोग है कोई अंकुश बर्दास्त ही नहीं करता चाहते है। विरोधी राजनैतिक न हुआ व्यतिगत हो गया। देश में सबको साथ ले कर चलना होता है न की सिर्फ अकेले अकेले।
उम्मीद करता हूँ की वक्त के साथ साथ इनको भी अक्ल आएगी और देश के लिए कुछ करेंगे।
उम्मीद करता हूँ की वक्त के साथ साथ इनको भी अक्ल आएगी और देश के लिए कुछ करेंगे।
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