इस जन्मास्टमी हम अपने भाई और भाभी के साथ श्री कृष्ण जी के दर्शन करने की लिए स्कॉन टेम्पल गए। भीड़ देख हमने ये फैसला किया की हम बाहर से ही दर्शन कर लेंगे और फिर भाभी अपना व्रत तोड़ देंगी और हमे ये सन्तुस्टी मिल जाएगी की हमने उनके दर्शन किये, पर हमारी किस्मत कहाँ इतने तेज़ थी। हम बहार से दर्शन तो क्या मंदिर के पास तक न भटक सके, इतनी भीड़ थी की देख मन विचलित होने लग।
गार्ड भाई से हमने हज़ारो बार मिन्नतें की कि वो हमे पास जाने दे, पर उनसे ये हो न सका। फिर मेरे मन में विचार आया यदि भगवन को सबके लिए सबके सामने लाया जाये वो सबके लिए उपलब्ध हो. की सभी दर्शन कर सके बिना लाइन लगाये बिना धक्का मुक्की किये। हर मंदिर में ये सुविधा हो की कोई भी कभी भी दर्शन कर सकते। फिर चाहे कोई भी त्यौहार हो। श्री राम का जन्म हो या श्री कृष्णा है। हर भक्त दर्शन पाये वो भी बिना किसी तकलीफ के। हम ये विचार ले कर वापस आए और एक छोटे से मंदिर में जी भर के अपने भगवन के दर्शन किये, भाभी ने व्रत तोडा और हम अपने भगवन से संवाद कर के खुश हुए।
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