Sunday, September 21, 2014

मेरे गुमशुदा भाई- तेरे बिना कुछ कमी सी है !!!


मेरे गुमशुदा भाई ,
एक वक्त था , जब हम दिन-रात, सुबह -शाम सातो दिन एक साथ रहने के लिए बहाना ढूंढा करते थे। मैं अपनी हर छोटी बड़ी बात तुमसे साझा करने पर, कितना सकून मिलता था, इसका तो कोई अंदाज़ा ही नहीं। आप मेरी ख़ामोशी भी पढ़ लेते थे। मैंने जो कुछ भी सीखा है अपनी ज़िन्दगी में, तुमसे ही सीखा। आपने मुझे एक नजरिया दिया जो आज भी मुझे हर पल अपने आपको पहचाने में सहायता करता है और मैंने अपने आप को प्यार करने की कला भी आपसे ही सीखी। कोई ऐसा दिन शायद न आया हो जिस दिन आपको न याद करु, मै इसलिए आपको याद नहीं करता की आपसे बहुत प्यार करता हूँ। बल्कि इस लिए की आपको जीता हूँ।

मुझे अंदाज़ा तो है की आप मुझसे क्यों रूठे, आज करीब २ साल होने को है, हमने बात नहीं की, नाराज़गी का कारण भी हमने शेयर नहीं किया, हमने वो सरे रस्ते बंद कर दिए जिस के द्धारा हम एक दूसरे से संपर्क कर सकते थे। मुझे आगे आने वाले वक्त में भी उम्मीद नहीं है की हम कभी एक साथ बैठ कर बात करेंगे।
मै सिर्फ एक बात जनता हूँ आगे आने वाले वक्त में भी मै आपको जीता रहूँगा, मेरे ज़िन्दगी में आपकी छवि हमेश दिखेगी। आप मेरे नज़दीक रहो या दूर। आप कही भी रहो। मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता। 

 तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है॥

जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफिल है "

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