इस ब्लॉग में मेरे निजी विचार है। मैं इस ब्लॉग में अपने विचार व्यक्त करता हूँ और दुनिया से अपना विचार शेयर करता हूँ।
Monday, December 15, 2025
ऐ दोस्त
Sunday, December 7, 2025
मटर छीलने का मज़ा: जब कहानियाँ वही रहती हैं, बस किरदार बदल जाते हैं
मटर छीलने का मज़ा: जब कहानियाँ वही रहती हैं, बस किरदार बदल जाते हैं
आज मौसम की पहली मटर मेरे घर आई। प्लान बना कि सुबह का नाश्ता घुघरी से होगा और अगर मटर बची तो निमोना बनेगा।
योजना तो बन गई पर बिना मटर छीले तो कुछ होने वाला नहीं था। सुबह उठने के बाद मेरे पास डलिया भर मटर छीलने का प्रस्ताव आया, हम भी घुघरी के लिए तैयार थे। घुघरी के लिए कुछ भी करना पड़े, करेंगे!
मटर छीलना शुरू हुआ। तभी मैं अतीत में चला गया जब पापा और मम्मी बात करते-करते न जाने कितनी मटर छील लेते थे। वैसे पापा और मम्मी कम ही बैठते थे बात करने को, पर मटर एक ऐसी चीज़ थी जो घर को बाँध कर रखती थी। दुनिया भर की बातें मटर छीलते समय याद आती थीं।
'फलनवा ई किहिस', 'धमकावा ऊ किहिस' (यानी 'फलाँ ने क्या कहा', 'फलाँ ने क्या किया'), सब चर्चाएँ होती थीं।
अचानक देखता क्या हूँ कि श्रीमती जी भी स्वयं आ गईं मटर छीलने के लिए। वह कहती हैं:
कहानियाँ वही रहती हैं, बस किरदार बदल जाते हैं।
हमने भी शुरू की मटर छीलना और बातें शुरू हुईं 'फलनवा' और 'धमकावा' की।
किस मौसम में किसके घर बछिया बियान रही और किसका कब बियाह हुआ था—हमने कोई कोना नहीं छोड़ा होगा बात करने का।
और मटर न जाने कब छिल गई, पता ही नहीं लगा।
फ़्रोज़न मटर जिनके घर आती है, वो मटर छीलने का मज़ा उनकी किस्मत में नहीं है। दुनिया भर की बातें सिमट आती हैं इस मटर छीलने के छोटे से अंतराल में।
Saturday, September 13, 2025
छठ
आज यूट्यूब पर छठ मैया के गीत सुन रहा था, और हर शब्द याद आ रहा था।
जब तुम्हारे साथ छठ मैया की पूजा के लिए गया था। उस positive energy को मैं अपने कंधे पर आज भी महसूस करता हूँ। धन्यवाद मुझे इसका अहसास कराने के लिए।
Wednesday, September 3, 2025
नानी के घर का डिब्बा
Tuesday, September 2, 2025
बदले हुए रिश्ते- प्रिंस भैया का रिटायरमेंट
कल मुझे अचानक पता चला कि प्रिंस भैया अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त हो गए हैं और इसके उपलक्ष्य में उन्होंने एक पार्टी रखी थी। पर सबसे ज़्यादा हैरानी तब हुई जब हमें उसमें आमंत्रित नहीं किया गया। वहाँ सभी खास लोग मौजूद थे, पर हम नहीं थे। यह जानकर खुद को बहुत अकेला महसूस किया, और ऐसा लगा जैसे मैं अब उनकी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं हूँ। रात भर यही सोचता रहा कि उन्होंने मुझे क्यों नहीं बुलाया और क्या मैं उनकी ज़िंदगी में इतना ज़रूरी नहीं हूँ कि वो मुझे अपने इस खास मौके का गवाह बनाएँ।
यह मेरे लिए एक भावनात्मक क्षति (इमोशनल लॉस) थी। जब मैंने यह बात स्वाति को बताई, तो उसे भी बुरा लगा। मुझे लगा कि शायद उसे इस बात का अंदाज़ा नहीं होगा कि प्रिंस भैया मेरी ज़िंदगी से कितने जुड़े हुए हैं। खैर, यह भी अब यादों का हिस्सा बन जाएगा और स्मृति के किसी कोने में पड़ा रहेगा, क्योंकि भविष्य तो किसी ने नहीं देखा।
अब मुझे इसकी आदत सी होने लगी है। यह पहली बार नहीं हुआ है कि मुझे ऐसा एहसास हुआ हो। जब से मैं लखनऊ आया हूँ, तब से मुझे यह महसूस होने लगा है कि ऐसी भावनाएँ भी ज़िंदगी का एक हिस्सा हैं। होता है, कभी-कभी पुरानी यादें दामन छुड़ाकर नई यादों की ओर बढ़ जाती हैं, और हमें इन सब से आगे निकल जाना चाहिए।
यादों की महक
आज छत पर लगी लौकी और कद्दू की बेल के पास से गुजर रहा था। यह बेल काफी पुरानी है। अचानक मुझे एक ऐसी गंध महसूस हुई, जिसका रिश्ता मेरे बचपन से था। गंध नाक तक पहुंची ही थी कि उससे जुड़ी सारी यादें एक तस्वीर की तरह मेरी आँखों के सामने आ गईं।
वो गंध मिट्टी की सोंधी खुशबू जैसी थी, ठीक वैसी ही जो नानी के घर लगे पौधों के पास आती थी। शहरों में बरसों रहने के कारण, नानी का घर छोड़ने के बाद मुझे यह खुशबू फिर कभी नहीं मिली।
सच कहा जाए तो, सिर्फ सुगंध ही नहीं, हर एक महक की अपनी एक याद होती है। यह बात आज पता चली।
Monday, September 1, 2025
एक सफर फ्रेंड लिस्ट से ब्लॉकलिस्ट की ओर
जिसे मैं साजिशकर्ता समझता था, वह तो सिर्फ एक संदेशवाहक निकला। असली बुद्धि तो किसी और की थी। एक सफर के दौरान, मुझे घेरकर एक ऐसा कमिटमेंट कराने की कोशिश की गई जिससे मेरा परिवार तंगी की हालत में आ जाए।
उल्टी गिनती तभी चालू हो गई थी। पर एक दिन तो अति हो गई; समय की कमी के कारण जब मैं कुछ नहीं कर पा रहा था, लोगों ने मेरे हिस्से के निर्णय खुद ही लेना शुरू कर दिया।
मेरा तो चरित्र ही बदल गया।
जिन लोगों को मैं अपने बचपन से संभालकर रखा था, उन्हें चिट्ठी-पत्री, फोन, तार सब भेजा। और जब वे मिले तो इतना मिले कि एक दिन अजनबी हो गए। अब सामने पड़ने पर रास्ते बदल लेते हैं।
वक्त-वक्त की बात है, होता है, होता रहा है, होता रहेगा।
यह एक सफर है, 'फ्रेंड लिस्ट से ब्लॉक लिस्ट की ओर'।