Saturday, December 24, 2022

निहिस्वार्थ- माँ बाप?

सुना है, माँ-बाप अपने सभी बच्चो लिए हमेशा निहिस्वार्थ भाव से उनका भरण पोषण करते है। किसी भी वक़्त, वो किसी का भी पक्ष लिए बिना अपना फैसला देते है।

मैंने अभी तक जितना भी अनुभव अर्जित किया है उसके हिसाब से, मेरा इस पर एक प्रश्नचिन्ह है। 

ऐसा नही होता है, यह एक कटु सत्य है कि माँ बाप का भी अपना अपना पसंदीदा बच्चा होता है। कठिन समय मे जब भी फैसला लेना होता है, तो माँ बाप भी अपने पसंदीदा बच्चे के हित एवं अनहित को ध्यान में रखकर फैसला करते है।

चाहे वो कितना भी सच्चा या झूठा क्यों न हो। 
अक्सर माँ बाप पूर्वाग्रह से भी ग्रसित होकर फैसले लेते है। 

निःस्वार्थ भाव एक प्रपंच है। वक्त के साथ इसकी परिभाषा बदलती रहती है।  इस दुनिया मे सब स्वार्थी है बस स्वार्थ के दायरे बदलता रहता है। 



Thursday, December 22, 2022

अपने हिस्से का संघर्ष

हर किसी को अपने हिस्से का संघर्ष कभी न कभी करना पड़ता है। कोई आज कर लेता है तो कोई कल । करना तो सबको पड़ेगा। बस आने हिस्से का संघर्ष दूसरी पीढ़ी तक न जाये

Thursday, December 15, 2022

बहन


कभी दीदी को मैं अपने दिल की हर बात बताता था। वो चाहे अच्छी हो या बुरी, सब बताता था। बिना सोंचे वो क्या सोंचेगी। वो दुनिया की मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी। उसे सोते हुए जगा देता था और अपने सारी परेशानियां उसे बता कर रज़ाई ओढ़ कर चैन से सो जाता था।  फिर,  वो जगती रहती थी, रात भर। 

वक्त ने सब बदल दिया। अब मैं उसे कुछ नही बताता, बस खामोश हो जाता हूँ उसे देख कर। 

Saturday, September 10, 2022

बेटी एक बोझ?



अभी हाल ही कि बात है एक सज्जन पुरुष अपनी बेटी का रिश्ता ले कर किसी और सज्जन पुरुष के यहां गए। फ़ोटो एवं बॉयोडाटा का आदान प्रदान हुआ। परिवारों ने फ़ोटो देखी और कुंडली मिलाई, जब सब सन्तुष्ट हुए, फिर दोनों के अभिभावकों ने सहमति दे दी, एक नए रिश्ते के लिए। 

अब बात आगे बढ़ी, बेटी का पिता अपने अभिभावकों को लेकर लड़के के पिता से मिलने के लिए उनके घर पहुँचे।  लड़के के पिता बोले कि, मुझे कुछ नही चाहिए, मेरे पास कार है, सोफा है , मुझे किसी भी चीज़ की कमी नही है, आप जो कुछ भी देंगे अपनी बेटी को देंगे। आप फर्नीचर देंगे तो अपनी बेटी को और वो जहां रहेंगे वही दिलवा दीजियेगा, हमारे बच्चो की माँग, कार की है, बाकी जो सिस्टाचार में देंगे वो तो है ही। 

कार की बात सुनते ही बेटी के पिता असहज हो गए, उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का व्योरा दिया, कार न दे पाने की अपनी असमर्थता जताई और बोले अगर कार पर आप समझौता करे तो बात आगे बढ़ाई जाए। लड़के के पिता कार से नीचे उतरने को तैयार नही हुए और बोलने लगे, आप कार लोन पर ले कर भी दे सकते है। 

लड़की वाले उठे और उन्हें प्रणाम कर, अपने घर की तरफ मुड़ लिए। जब यह बात मेरे कानों तक आयी, तो समझ नही आ रहा था कि हम जैसे नए-नए बने पिताओ को,  लड़की कें पैदा होने पर क्या करना चाहिए। 

- क्या उसकी शिक्षा पर खर्च करना चाहिए?
- क्या दहेज जमा करने के लिए लड़की को सामान्य पढ़ाई करा कर घर में बैठाना चाहिए?
- क्या सिर्फ एक बोझ समझ कर उसके सामान्य अधिकार छीन लेने चाहिए और सिर्फ दहेज इकट्ठा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ?

हम अपनी लड़की को किस दृष्टि से देखे, कही भी बेटी का रिश्ता ले कर जाओ, तो मुँह खुल जाता है दहेज के लिए। 

हमने भी विवाह किया , बिना दहेज के लालच के, तो क्या सिर्फ यह एक आदर्शवाद है या इसका धरातल पर कोई अनुकरण भी करता है। 

हमने अक्सर यह भी देखा है कि जब लड़की वाला अपनी बेटी की शादी करता है तो दर्द में दहेज दहेज चिल्लाता है और जब वह अपने बेटे की शादी करता है तो खुशी से दहेज दहेज चिल्लाता है। 

Tuesday, August 9, 2022

“जो कभी कहानियाँ सुनाया करती थी , आज स्वयं एक कहानी है”, माँ


“जो कभी कहानियाँ सुनाया करती थी , आज स्वयं एक कहानी है”,  माँ 

माँ , आज तुम्हे गए,  एक बरस हो गए है, माँ के बिना कैसे जिया जाता है, अब हमने सीख लिया है।   तुम्हारे बिना, बदला तो कुछ खास नहीं है, समय अपनी ही गति से चल रहा है।  लोग सच ही कहते है कि जब तक कोई जीवित रहता है तबतक उसकी कीमत नहीं होती है और जब वो चला जाता है, तब पता लगता है कि उसका होना कितना महत्वपूर्ण था।  

तुम हथेली की पांचो उंगलियों को बांध कर रखने वाली वो शक्ति थी जिससे मुट्ठी बंधती थी।  बस आज वो मुट्ठी खुल गयी है ।
  बंद मुट्ठी लाख की खुल गयी तो ख़ाक की।  चरितार्थ हो रहा है।  लाल

सारी उंगलिया तुम्हारे जाने के बाद कट गयी। अब चाह कर भी कोई वापस जोड़ नहीं सकता।  जिस घर में तुम्हारी आवाज़ चिड़ियों की तरह चहचहाती थी, आज उसी घर मे अजीब सा सन्नाटा बसता है। 

घर कैसे बनता है, हमने तुमसे ही सीखा। तिनका तिनका जोड़ कर हमारे लिए तुमने एक घर बनाया, संस्कार दिए, जो आज हमारे काम आ रहे है। तुम हमारे साथ नही हो पर, साथ हो हमारे। 

मै आज भी सुबह सवेरे उठते ही माँ बुलाता हूँ, पहले लगता था कि आवाज़ माँ तक पहुंच रही होगी पर आज माँ एक शब्द है।  माँ पुकारने पर अब "बेटा" जैसी कोई  आवाज़ वापस नहीं आती है, वापस आता है वो भी एक “सन्नाटा”. 

ईश्वर की कृपा रही मुझपर कि  मैं अंत समय में तुम्हारे पास ही रहा।  नोयडा में नौकरी करते हुए मैं कभी सोंच भी नहीं सकता  था कि तुम्हारे पास इतना समय बिता पाउँगा और तुम्हारी सेवा भी कर पाऊंगा। धन्यवाद, ईश्वर का जिसने मुझे मौका दिया, अंत समय में तुम्हे बाहों में भर लेने का। 

सच है कि माँ के पास जाओ तो वह पूछती है कि खाना खाया की नही, बस माँ ही यह पूछती है बाकी कोई नही। 

माँ तुम्हारी बहू, तुम्हारा सिखाया बनाती तो सबकुछ है पर
माँ तेरे बिना अब वो भूख भी नही लगती। 




Tuesday, January 21, 2020

सच बोलना आता है मुझे- आदि

अपने साले की सगाई निपटा, मै रेलगाड़ी से दिल्ली कें लिए रवाना हुआ। लखनऊ पहुंचने वाला था और आप पास बैठे सहयात्रियों से बात हो रही थी। तभी स्वाति ने पूछा हम कितने बजे गाजियाबाद पहुंचेंगे। मैंने कहा अगर सब ठीक ठाक रहा और ट्रेन लेट ना हुई तो, हम सुबह  ३:३० तक गाजियाबाद पहुंच जाएंगे। 
तभी स्वाति ने बोला अगर हम टाइम से पहुंच गए तो आदि को स्कूल भेज देंगे। आदि जो कि सीट पर ऊपर नीचे कर रहा था आया और बोला कि कल शायद मै थक जाऊंगा और स्कूल नहीं जा पाऊंगा। मै स्कूल फिर कभी और चला जाऊंगा।

पहले भी जब कभी भी आदि का स्कूल जाने का मन नहीं करता था तो बोलता है कि मुझे बुखार आ सकता है या मेरा पेट दर्द कर रहा है। पूछने पर कि क्या तुम्हारा पेट दर्द कर रहा है तो बोलता है कि नहीं, अभी नहीं पर स्कूल में कर सकता है। 

इसी चर्चा में हमने बोला की आदि को सच और झूठ का मतलब भी नहीं पता है अभी। बच्चे सिर्फ बहाने बनाते है । सच या झूठ नहीं बोल पाते। तभी आदि बोलने लगा कि मै बहाने नहीं बनाता हूं और मै सच बोल लेता हूं। 

स्वाति के पास आ कर आदि ने बोला कि मै "सच" बोल लेता हूं।    तभी स्वाति ने बोला, सच क्या होता है जानते भी हो। ज़रा बोल कर दिखाओ। आदि बोला  सच सच सच.. बताओ कितनी बार बोलूं सच। आप भी बोलो १०० बार सच। तभी स्वाति भी सच का जाप करने लगी। १० बार ही हुए थे कि आदि बोलने लगा बस हो गया १०० बार। 

Saturday, January 18, 2020

प्याज़ का अर्क


जहां बाजार में प्याज ₹120 किलो बिक रहा है, लोग आजकल प्याज चूम कर काम चला रहे हैं और मेरी पत्नी प्याज का रस निकाल रही थी। मुझे क्या पता था,  खून पसीने की कमाई से खरीदे हुए प्याज का  प्रयोग मेरी पत्नी बालो की सुंदरता बढ़ाने के लिए करती है।