कभी दीदी को मैं अपने दिल की हर बात बताता था। वो चाहे अच्छी हो या बुरी, सब बताता था। बिना सोंचे वो क्या सोंचेगी। वो दुनिया की मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी। उसे सोते हुए जगा देता था और अपने सारी परेशानियां उसे बता कर रज़ाई ओढ़ कर चैन से सो जाता था। फिर, वो जगती रहती थी, रात भर।
वक्त ने सब बदल दिया। अब मैं उसे कुछ नही बताता, बस खामोश हो जाता हूँ उसे देख कर।
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