Saturday, August 1, 2015

बाप का जूता

आदि अब एक साल का हो गया है ,
कुछ दिन पहले,  मै जब ऑफिस जाने के लिए  तैयार हो रहा था , कपडे पहन ही  रहा था की देखता हूँ आदि लड़खड़ाते हुए अपने हाथो में मेरा जूता लेकर आ रहा था, मै उसे देख दांग था , की उसे अब यह अहसास होने लगा है की पापा ऑफिस जाते वक्त इसे पहन कर जाते है।  जूता लाकर उसने मेरे पैरो के पास रख दिया।  मैंने झट से उसे अपनी गोद में उठाकर प्यार किया। 

Sunday, July 26, 2015

बप्पा- तुम एक सितारा थे

बप्पा  … मेरे लिए सिर्फ एक शब्द नहीं है इसकी एक परिभाषा है, वो आप है.
आपके जाने के बाद मैंने जब आपके जीवन पर एक नज़र डाली तो मुझे ऐसा लगा की आपका जीवन तो एक सितारे की तरह था।


आपने एक सितारे की तरह हमसबको प्रकाशित किया।

एक सितारा जन्म लेने से पहले अपने आस पास की हर चीज़ को अपने गुरुत्वाकर्ष से आकर्षित करता है.. फिर वह हर चीज़ को अपने में समाहित कर लेता है .. फिर वह अपने ज्ञान से एक प्रकाश उत्पन्न करता है और वह प्रकाश पूरी दुनिया पर छा जाता है, तब जाकर एक सितारे का जन्म होता है।

आपने भी एक सितारे की तरह जन्म लिया।  जितना मैंने अपने पापा से आपके बारे में सुना है की  आपने भी अपने आस पास के हर व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व से आकर्षित किया। उन्हें अपना बनाया।  आपने संघर्ष करते हुए लोगो को अपनी कठिनाइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया। आपने गरीबी, सामाजिक असमानता से लड़ते हुए एक ऐसा प्रकाश उत्पन्न किया जिससे सब प्रकाशित हुए. आपने अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।  मुनसिब बने, आपकी सफलता को देख पूरी पीढ़ी आपके पद्चिन्नो पर चलने का प्रयाश करने लगी, पापा बताते है उन दिनों वो आपके कितने मुरीद थे। पापा ने भी जीवन के संघर्ष के साथ अपनी पढाई करते रहे और सफलता प्राप्त की।

जब सितारा जवान होता है तो वह अपना प्रकाश दूर दूर तक फैलाता है , प्रकाश इतना तेज़ होता है की अपने अगल - बगल के छोटे सितारों की रौसनी को काम कर देता है। उसके प्रभाव से या तो उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है या वो उनसे दूर चले जाते है । उसके अगल-बगल कोई और सितारा नहीं होता है।  फिर वो सितारा एकाकी हो जाता है , उसके अगल बगल सिर्फ गृह ही  चक्कर लगते है।  जो सिर्फ उस तारे के प्रकाश पर ही निर्भर रहते है।

आपने भी सफलता प्राप्त करने के बाद अपनी ख्याति दूर दूर तक फैलाई सिर्फ हम ही नहीं ,सब प्रभावित थे आपसे। आपके अगल बगल सिर्फ आपका ही प्रकाश था किसी और का प्रकाश आपतक नहीं पहुचा, आपने जिन सितारों को जन्म दिया, जो स्वयं में भी  एक सितारा थे , आप जान ही नहीं पाये की उनमे भी अपना प्रकाश है , आपके प्रभाव में उनका भी प्रकाश छुप गया।  वो भी आपअपने को खोजने में आपसे दूर होते रहे  और आपको पता भी नहीं लगा. आप सिर्फ अपने प्रकाश के मद में रहे,  की वो प्रकाश जैसे कभी खत्म न होगा ।  आपसे भी ज्यादा चमकदार कोई और सितारा हो सकता है ऐसा आपने कभी नहीं सोचा।

आपके पास  सिर्फ आपको सही कहने वाले लोग ही रहे।  कोई नहीं था जो आपको आपकी गलतियों के लिए आपको आपसे कुछ कहे ।  जो थे आपको आपकी गलतियों पर आपको कुछ बोल सके उन्हें धीरे धीरे अपने से दूर कर दिया।  उनकी बाते आपको शूल की तरह चुभती थी । आपके इस व्यवहार ने आपको और अकेला कर दिया।
जब सितारा बूढा होता है तब वो समझ ही नहीं पता है की उसका प्रकाश काम हो गया है । उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आता है , अब उसका गुरुत्वाकर्ष उतना तीव्र नहीं होता है की अपने सरे ग्रहो को खुद से बांधे रख सके।  सब उससे दूर हो जाते है और रह जाता है वो सिर्फ अकेला।

आपके साथ भी कुछ ऐसा हुआ।  जब आप  रिटायर हुए तो आप समझ नही पाए की अब वो प्रकाश आपके पास नहीं रहा ।  आपका व्यवहार समय के साथ नहीं बदला।  आपने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की अब आपको बदलना चाहिए, आपने जिन सितारों जो जन्म दिया था उनके प्रकाश को आप अपना प्रकाश बना उनका प्रकाश बढ़ाते। इसके विपरीत आप उनसे अलग अपनी नयी दुनिया बनाने निकल पड़े,  बिना किसी का साथ लिए।  आप और बस आपकी तन्हाई आपके पास रही।  आपने सबसे मिलना जुलना भी बंद कर दिया।  आपने अपने अनुभव को बांटना बंद कर दिया जिसे समझ का कल्याण हो सके।  अपने पुराने मित्रो और सम्बन्दियो को साथ लेने के बजाये आपने अकेले रहना पसंद किया।  दीवारो के बीच आपने अपना जीवन सीमित कर लिया।

जब एक सितारा अपने जीवन की अंतिम पड़ाव पर होता है तो वह फिर से अपने अगल बगल के सारी चोजो को आकर्षित करता है।  पर इस बार प्रकाश देने के लिए नहीं उनके प्रकाश को अपने में समाहित करने के लिए ।    फिर वो ब्लैकहोल हो जाता है कुछ भी  उससे बाहर नहीं जाता है और अंत में एक विस्फोट से साथ अपना अंत कर लेता है। शायद नए जीवन की तलाश में वो पूरे ब्राम्हण में फ़ैल जाता है।

आप भी अपने जीवन के अंतिम दिनों में इतने निराशा वादी हो गए थे की आशा की एक भी किरण आपतक नहीं पहुंची। . जो पहुंची उसे भी आपने अपने अंदर समां लिया।  उसे बहार निकलने नहीं दिया । सबकुछ होने के बाद भी आपके पास कुछ नहीं था।
और आपने भी अपना अंत भी एक विस्फोट के साथ किया।

आप अपने आपको भी दान कर गए इस धरती पर नए जीवन की खोज के लिए ।


आपका जीवन एक मिसाल है हमसब के लिए.. आपके जीवन से हम हमेशा प्रेरणा लेते रहेंगे।




Wednesday, April 8, 2015

आदरणीय पापा

आदरणीय पापा,
आज आपका जन्मदिन  है।  बहुत बहुत मुबारक हो।
 मै आपके पास नहीं हूँ अभी,  पर मै आपको बहुत मिस कर रहा हूँ।
मै बहुत ही सौभाग्यशाली हूँ की मैंने आपके पुत्र के रूप में जन्म लिया है।
आपने बहुत संघर्ष किया है हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए।  आपने मुझे अच्छी शिक्षा दी।  अच्छे संस्कार दिए जिससे की मै अपने जीवन  में आई चुनौतियां का सफलता पूर्वक सामना कर सका और आपके उन्ही संस्कारो  के द्वारा मै भविष्य में आने वाली चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करूँगा।
  मै अब बड़ा हो गया हूँ और अब आपका जूता मेरे पैरो में आने लगा है।  मै आपकी स्थिति समझने की कोशिश करने लगा हूँ।  एक पिता होने की नाते आपके द्वारा दिए गए  संस्कारो को आगे बढ़ने का दायित्वा अब मेरे कंधो पर है।  मै पूरी कोशिश करूँगा की आपके द्वारा दिए गए संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुँचाऊँ।

मै आपके बेहतर स्वस्थ और लम्बी उम्र की कामना ईश्वर से करता हूँ।  

देव और दानव के बीच में है "मानव"


कोई व्यक्ति सिर्फ देव नहीं होता जो हमेशा सच्चा हो  ना ही कोई व्यक्ति दानव होता है जो हमेशा झूठा हो।  वो मानव है थोड़ा सा बुरा,  थोड़ा सा अच्छा, थोड़ा सा सच्चा और थोड़ा सा झूठा , यह अलग बात है की वो देव के नज़दीक है या दानव के ,  यदि हम अपने आपको सिर्फ मानव ही माने और देव या दानव बनाने की कोशिश न करे तो हम अपने अच्छे और बुरे का आंकलन ठीक से कर सकते है,  जिससे हमारे अंदर सुधार की अपार संभावनाए उत्पन्न हो सकती है।  

Wednesday, January 21, 2015

पा पा पा पापा

Date 21 Jan 2015

कुछ दिन पहले मेरे बेटे ने अपने आप ही पा पा पा पापा बोलना शुरू किया है।  पहले मुझे लगता था की वो बस ऐसे ही कुछ बोलने के लिया बोलता है पर आज कल वो मुझे देख कर पा पा पापा बोलता है।  स्वाति दिन भर उसे पापा बोलना सिखाती है।  ऑफिस से जब घर पहुचता हूँ तो अपने बेटे के मुँह से पापा सुन कर,  दिन भर की थकान मनो चली सी जाती है।  

Monday, January 12, 2015

जॉकी की खरीदारी

नए साल के रेसोलुशन  में  हमने सोंचा की हम अपने लिए नयी चड्ढियां खरीदेंगे वो भी जॉकी की , हमारे बाकि मित्र इसी ब्रांड की चड्ढियां पहनते है।  उनकी चड्ढी का ब्रांड उनके झुकते वक्त पीछे दिखाई दे जाता है।  तो हम नए साल के मौके पर अपनी पत्नी के साथ एक दुकान में पहुंचे,  साथ में हमारे मित्र टनटन जी भी अपनी पत्नी के  साथ थे।  भाभी को सैंदर्य का कुछ सामान लेना था।  मेरी पत्नी जी को भी कुछ सामान पसंद आया तो उन्होंने भी कुछ ले लिया।  दुकान काफी अच्छी थी तो मैंने सोंचा की थोड़ा टहल लूँ।  दुकान  देख ही रहा था की एक आवाज़ आई की,   भाई साहब आपके लिए भी सामान है यहाँ पर,  जॉकी पर १५% डिस्काउंट है।  मुझे लगा अच्छा मौका है जॉकी की चड्ढियां खरीदने का।  मैंने अपनी पत्नी को बोला की चलो लेते है।  फिर हम बेसमेंट में बानी उनकी दुकान में पहुंचे।  मर्दो की चड्ढी बेचने के लिए कोई मर्द नहीं था सारी जनाना ही थी।  मुझे अलग -अलग तरह की जॉकी की चड्ढियां दिखाने लगी।  फिर पूछने लगी आपका साइज क्या है।  घबराहट में मै तो अपनी चड्ढी का साइज ही भूल गया था।  फिर मैंने अपनी पत्नी से पूछा की सुनती हो मेरा साइज क्या है।  वो भी घबरा गयी की क्या बताऊ, और बोली आप पहनते हो तो आपको नहीं पता क्या?  फिर टनटन बोलता है लार्ज साइज दिखाना। फिर ३ जननीयां मुझे लार्ज साइज की अलग अलग तरह की चड्ढियां दिखने लगी। पट्टे वाली,  बिना पट्टे वाली, समझ में नहीं आ रहा था की कौन सी लूँ।  फिर मैंने बोला की सिंपल सी कोई भी दे दो।  फिर बात आई की किस  रंग की ली जाए।  मुझे समझ में नहीं आ रहा था की कौन से रंग की लूँ।  फिर मैंने अपनी पत्नी को आवाज़ लगई की सुनती हो किस रंग की लूँ चड्ढियां। इतनी महँगी खरीद रहा था तो पत्नी की सहमति भी जरुरी थी , फिर मेरी पत्नी बोली काले रंग की मत लेना बहुत ढेर सारी है आपके पास।  फिर मैंने बोला तुम ही बता दो कौन से रंग की  लूँ।  जनानिया ढूंढने लगी अलग अलग रंग की चड्डियाँ। उन्होंने निकली लाल रंग की चड्ढी , फिर मेरी पत्नी की आवाज़ आई लाल रंग की चड्डी मत लो कोई और रंग नहीं है क्या ? बड़ी मशक्कत से हमने ३ अगल अलग रंग की चड्ढियां ले ली ।  मैंने पैक करा ली।  मेरी पत्नी ने भी कुछ लिया था। बिल आया, हमने पे किया फिर बाकि का सामान लेने के लिया हम दूसरी दुकान पर चल दिए ।

शाम जब हम अपने घर पर इकठ्ठा हुए तो फिर से चड्डियों पर चर्चा शुरू हो गयी. टनटन बोला तुम कितने बेशरम हो भाई, वहां तुम भाभी से पूछ रहे थे की मेरा साइज क्या है।  किस रंग की चड्ढी खरीदू।  इसमें भाभी का क्या रोले। मुझे अभी चड्डियाँ खरीदनी थी मैंने तो शर्म के मरे खरीदी ही नहीं,  मैंने बोला की भाई जब भी चड्ढियो का विज्ञापन आता है तो उसमे भी जननीयां ही तो दिखाई देती है।  अमुक ब्रांड की चड्ढी पहनो तो पूरे  शरीर पर चुम्बन के निशान हो जाते है, कही तो पुरुष लड़कियों को बचाता है वो भी सिर्फ चड्ढी पहन कर। अपने पास तो एक सुपर हीरो है वो पैंट की ऊपर चड्ढी पहनता है,   हर एक विज्ञापन में औरतो होती है।  तो क्या मै अपनी पत्नी की पसंद से चड्ढी नहीं खरीद सकता।  

Saturday, January 10, 2015

अमेरिका से आया हूँ

आज अजीब सा वाक़िया हुआ हमारे साथ,  सुबह-सुबह हम ऑफिस पहुंचे ही थे की हमें पता लग गया की एक सज्जन व्यक्ति आज ही अमेरिका से सीधे इस भारत भूमि पर पधारे है, थोड़ी देर की बाद उनके दर्शन भी हुए, हमसबसे मुलाकात हुई ऐसा लग रहा था की भाई जंग जीत कर आया है, आते ही कुछ लोगो के चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ी और कुछ की मायूसी ,  थोड़ी देर बाद आवाज़ आई चॉकलेट ले लो, हम टूट पड़े अमेरिकी कंपट पर , छीना झपटी में हमारे हाथ एक- दो कम्पट लग गयी।  हम बहुत खुश हुए की कुछ तो हाथ लगा, फिर हम अपने काम में व्यस्त हो गए ,  लंच टाइम  हुआ,  हम खाना खा ही रहे थे की अमुक व्यक्ति हमारे पास आए और शुरू किया अमेरिकी यात्रा वृतांत , कैसे वो अमेरिका पहुंचे और क्या क्या उपलब्धिया पाई है उन्होंने वहाँ , अमुक व्यक्ति ने बोलना शुरू किया -बहुत मज़ा आया बस मै अपना ड्रीम जी रहा था वहाँ पर।  चारो तरफ हॉलीवुड था और बीच में हमारे ऑफिस की बिल्डिंग। गूगल खोलो मै तुम्हे दिखता हूँ कहाँ था हमारा ऑफिस। जल्दी से सिस्टम खोला गया और गूगल पर सर्च किया गया, कुछ नीचे स्क्रोल करने पर  ऑफिस की फोटो भी आ गयी,  दिखने में बिल्डिंग बहुत खूबसूरत थीं नज़ारा कुछ हॉलीवुड पिक्चरों  जैसा था  ।  हमे ख़ुशी से ज्यादा जलन हो रही थी। वहां उनके काम से अमेरिकी उनके मुरीद हो गए।  वो बोले हमने दिन रात इतना काम किया की वो चकित थे की कोई इतना काम भी कर सकता है। चार चार सिस्टम पर हमने टेस्टिंग की है वो भी एक साथ।   जी यू आई बिलकुल भी ब्रेक नहीं होने चाहिए थी।  ऐसे ऐसे टूल्स पर हमने काम किया फिर पता चला की ऐसा भी हो सकता है।   हम सिर्फ २ घंटे सोते थे बाकि दिन काम काम और सिर्फ काम, हम  सिर्फ एक दिन छुट्टी लेते थे।  वीकेंड तो हमारा सोने में ही निकल जाता था।  आज मुझे लग रहा है की मै अब कम्पनी का असली रिसोर्स हो गया हूँ।  फिर हमने अपने आपको देखा समझ में नहीं आ रहा था की कैसा एक्सप्रेशन दूँ , मुझे लगा की  शायद हम किसी लायक ही नहीं है।  फिर बोलते है अब मेरी बात डायरेक्ट कम्पनी की मालिक हो होती है।  उन्होंने भी हमारे काम हो काफी सराहा है।  मैंने वहां जा कर कई  सारे डाक्यूमेंट्स बनाए।  सब बहुत खुश हुए। हमारा काम तो १० दिन पहले ही खत्म हो गया था , फ्लाइट्स की टिकट नहीं मिले नहीं तो मै जल्दी आ जाता।  खली वक्त कटे नहीं काट रहा था,  वो शहर मेरा पहले से घूमा हुआ था इसलिए कही घूमने नहीं आया।  छुट्टियों मै बहुत बोर हुआ ।  मै वहां कही नहीं जा सकता था वहां के लोग हमजैसे नहीं है , रात में भी कोई दरवाज़ा खटखटा की भाग जाता है ।  मै बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हूँ इसलिए इधर उधर घूमने भी नहीं गया।  (लडकिया समझ नहीं पाएंगी की इसमें धार्मिकता कहा से आ गयी)  हालत बहुत ख़राब थी।  अब मै वहां दोबारा नहीं जाऊंगा, बोर बहुत हुआ हूँ , कोई बात करने  वाला नहीं था। मै बस यहाँ आने के लिए बेताब था। अबकी जाऊंगा तो सिर्फ पैसे कमाने जाऊंगा।  अपने शौक से नहीं जाऊंगा।  इतनी बात सुन मुझे याद आया की मुझे अपनी पत्नी को फ़ोन करना है।  नहीं किया तो घर जा कर क्या जवाब दूंगा।  मै उठ लिया वहां से और पत्नी को फ़ोन मिलाया।  वापस आया तो महाशय जा चुके थे।  एक घंटे तक लोगो को अपनी गाथा सुनाई।  सब उनकी बाते सुन भावविभोर हो गए। 

Friday, January 2, 2015

सब ब्रांडेड है

आजकल एक ही बात मेरे सामने बार बार आ रही है। यदि आप गलती से भी किसी व्यक्ति के कपड़ो की तारीफ कर दे तो फिर शुरू हो जाता है ब्रांड्स का बखान.
उदाहरण के लिए यही आप किसी व्यक्ति से बोलते है की उसकी जैकेट अच्छी लग रही है तो वो बिना वक्त गवाए बोलता है,  ये अमुक  ब्रांड की है , अमुक दुकान से और अमुक जगह से लिया है और बहुत महँगी है।  इशारो में शायद ये समझाना चाहते है की ये जैकेट आपकी औकात से बहार है।  समझ में नहीं आता की मै आगे से उनकी तारीफ करू या न करू।