कॉलेज को शुरु हुए कुछ ही दिन हुए थे, रैगिंग से डरे सहमे हुए हम लोग क्लास में ही कैद रहते थे। ऐसे ही किसी रोज़ अचानक, पहले लेक्चर में एक लड़की लड़खड़ाते और हाँफते हुए, दरवाज़े पर दस्तक देती है मानो कही से भाग कर आई हो,और टीचर से पूछती है की, क्या ये सेक्शन "ऐ " है? इतना सुन सब की नज़र उस लड़की पर जा टिकी। तीखे नैन नक्स वाली, उस लड़की ने अपने सिर पर तेल तो ऐसे लगाया था जैसे की वो तेल की पूरी बोतल ही उड़ेल कर आयी हो। उसके कपडे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी से मांग कर लायी हो। लम्बी सी वह लड़की टीचर की इज़ाज़त लेकर क्लास में अंदर आती है और बाकी लड़कियों के साथ जा कर बैठ जाती है। टीचर के पूछने पर वो अपना नाम बताती है और टीचर अपने विषय को आगे बढ़ाते है।
क्लास ख़त्म होने के बाद हमे पता चला की वो हॉस्टल में रह रही है और हॉस्टल के प्रोटोकॉल के हिसाब से ही, ऐसे कपड़ें और सिर में तेल लगा कर आयी थी। सीनियर्स अक्सर रैगिंग के नाम पर उससे तरह तरह की एक्टिविटी कराते थे। कभी गाना गाने को बोलते, तो कभी कविता सुनाने को। वो हर चीज़ में पारंगत थी जैसे को कोई ट्रेनिंग ले कर आयी हो। धीरे धीरे उसकी फैन फोल्लोविंग भी बढ़ती जा रही थी। अब हमारी क्लास की पहचान अब उसके नाम से होने लगी थी। फ्रेशर पार्टी में मिस फ्रेशर के ख़िताब की वो प्रबल दावेदार थी। कॉलेज में रैगिंग पर सख्ती होने के साथ हमारी रैगिंग भी कम हो गयी और सीनियर्स अब हमसे दोस्ताना व्यवहार करने लगे थे, उसी के साथ साथ, हम सब के अपने रंग में कॉलेज आने लगे। हम सबके कपड़े भी स्टाइलिश होते जा रहे थे पर, उसकी बात ही निराली थी, फैशन क्या होता है उसे देख कर पता लगने लगा।
फ्रेशर पार्टी का भी दिन आया सबने एक मत से उसे "मिस फ्रेशर" का ख़िताब दे दिया। अब वो कॉलेज के हर दिल पर राज करने लगी थी , उसके बात करने का अंदाज़ ही कुछ ऐसा था की वो एक पल में किसी को भी अपना बना लेती थी, हर किसी को यह अहसास होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगता था की वो उसकी ड्रीम गर्ल है। कभी भी उसका ज़िक्र आता तो लड़के मंद मंद मुस्कुराने लगते और कुछ की तो ज़ुबान ही लड़खड़ा जाती थी, उसका नाम लेते और जब भी वो कॉलेज आती तो सबकी नजरें उन्ही को फॉलो करती रहती थी। मानो नज़रो ने बरसो से उनका दीदार ही न किया हो।
जब भी वो किसी लड़के के साथ घूमती हुई नजर आयी, बस कुछ दिनों में ही उसका पिटना तय था। लड़के आपस मे ही लड़ मरने को तैयार थे। बाकी कॉलेज की किसी लड़की को, कभी इतना भाव नही मिला। लड़कियां उसकी खूब बुराइयां करती थी, जी भर भर के कोसती थी, वो उसे देख कर जलती जो थी। कॉलेज में उसके दोस्त कम ही थे।
जिस दिन वो कॉलेज में नही दिखाई देती थी , उस दिन कॉलेज में मनहूसियत सी छा जाती थी। क्लास सूनी सूनी नज़र आती थी। न जाने कितने दबंग भाइयो ने उससे,अपने प्रेम का इज़हार किया पर कुछ न हो पाया। दिन यूँ ही बीत रहे थे। सेमिस्टर बीतते जा रहे थे और उनकी चर्चाएँ बढ़ती जा रही थी, एक साल बीता, हमारे जूनियर्स भी आये, फिर उनके जूनियर्स भी आये पर उनका जलवा काम न हुआ।
लम्बी छुट्टी के बाद एक दिन वो कॉलेज में दिखाई दी तो लोगो में ख़ुशी के लहर दौड़ गयी, पर साथ में ये किसी अज़नबी को भी लायी थी। लड़के आपस में तो यही बोल रहे थे की शायद उसका भाई है, जिसे कॉलेज दिखाने लायी है, पर उसने अपने दोस्तों को उस लड़के को अपने मंगेतर की तरह मिलवाया। ये खबर की उसकी सगाई हो गयी है जंगल की आग की तरह पूरे कॉलेज में फ़ैल गयी। उस दिन कॉलेज में मातम मनाया गया। हर लड़का उन्हें बधाई तो देने आया, पर निगाहों में अश्क भरे हुए था। कोई किसी को ज़ाहिर नही करना चाह रहा था कि उसे दिल को आघात लगा है या ग़मज़दा है। सीने में जज्बात भरे हर बन्दा लोगो को दिखा रहा था कि जैसे कुछ हुआ ही नही।
वो दिन भी आया जब वो शादी कर विदेश जा बसी, अब सबकी निगाहें फेसबुक पर टिक गई, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई। वो खुशकिस्मत थे, जिनकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट हुई और वो बदकिस्मत जिनकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नही हुई, वो दूसरो के प्रोफाइल पर जा जा कर निहारते थे, शायद कोई टैग हो। वो मोहतरमा भी कम न थी। फेसबुक पर वो अक्सर कम ही आया करती थी, अपनी प्रोफाइल फोटो में सिर्फ उन्होंने अपने हाथ की फ़ोटो लगा रखी थी। एक पोस्ट में उन्होंने अपनी परछाई डाली । फिर फेसबुक पर कॉम्प्लिमेंट्स की झड़ी लग जाती। वो साल में एक या दो पोस्ट ही करती थी।
पिछले साल जब दीवाली पर उन्होंने अपनी पूरी तस्वीर लगाई, तो उनके चाहने वालो ने कॉम्प्लिमेंट्स के सारे रिकार्ड्स तोड़ डाले।ऐसा लगा मनो लोगो ने दीवाली फेसबुक पर ही मनाई। किसी ने कमेंट में कविताएँ लिखी किसी ने मोतियों जैसे शब्द चुने उन्हें कॉम्प्लिमेंट्स के लिए।
शादी के इतने सालो के बाद भी उन्हें देखकर ऐसा नहीं लगता है की उनमे कोई बदलाव आया है।
आज भी जब हम पुराने दोस्त इकट्ठा होते है तो उनके ज़िक्र के बिना बात खत्म नही होती। हमारे दोस्तो में एक ऐसा शख्स भी है जिसका दिल खूब धड़का था उसके लिए। अब दोस्त की शादी हो गयी, बच्चे भी हो गए पर, आज भी उसका ज़िक्र आते ही उसकी आंखों में अलग सी चमक आ जाती है पर वो डरता है कि ये बात अगर उसकी पत्नी को पता लगी तो हंगामा हो जाएगा।
क्लास ख़त्म होने के बाद हमे पता चला की वो हॉस्टल में रह रही है और हॉस्टल के प्रोटोकॉल के हिसाब से ही, ऐसे कपड़ें और सिर में तेल लगा कर आयी थी। सीनियर्स अक्सर रैगिंग के नाम पर उससे तरह तरह की एक्टिविटी कराते थे। कभी गाना गाने को बोलते, तो कभी कविता सुनाने को। वो हर चीज़ में पारंगत थी जैसे को कोई ट्रेनिंग ले कर आयी हो। धीरे धीरे उसकी फैन फोल्लोविंग भी बढ़ती जा रही थी। अब हमारी क्लास की पहचान अब उसके नाम से होने लगी थी। फ्रेशर पार्टी में मिस फ्रेशर के ख़िताब की वो प्रबल दावेदार थी। कॉलेज में रैगिंग पर सख्ती होने के साथ हमारी रैगिंग भी कम हो गयी और सीनियर्स अब हमसे दोस्ताना व्यवहार करने लगे थे, उसी के साथ साथ, हम सब के अपने रंग में कॉलेज आने लगे। हम सबके कपड़े भी स्टाइलिश होते जा रहे थे पर, उसकी बात ही निराली थी, फैशन क्या होता है उसे देख कर पता लगने लगा।
फ्रेशर पार्टी का भी दिन आया सबने एक मत से उसे "मिस फ्रेशर" का ख़िताब दे दिया। अब वो कॉलेज के हर दिल पर राज करने लगी थी , उसके बात करने का अंदाज़ ही कुछ ऐसा था की वो एक पल में किसी को भी अपना बना लेती थी, हर किसी को यह अहसास होने में ज़्यादा वक्त नहीं लगता था की वो उसकी ड्रीम गर्ल है। कभी भी उसका ज़िक्र आता तो लड़के मंद मंद मुस्कुराने लगते और कुछ की तो ज़ुबान ही लड़खड़ा जाती थी, उसका नाम लेते और जब भी वो कॉलेज आती तो सबकी नजरें उन्ही को फॉलो करती रहती थी। मानो नज़रो ने बरसो से उनका दीदार ही न किया हो।
जब भी वो किसी लड़के के साथ घूमती हुई नजर आयी, बस कुछ दिनों में ही उसका पिटना तय था। लड़के आपस मे ही लड़ मरने को तैयार थे। बाकी कॉलेज की किसी लड़की को, कभी इतना भाव नही मिला। लड़कियां उसकी खूब बुराइयां करती थी, जी भर भर के कोसती थी, वो उसे देख कर जलती जो थी। कॉलेज में उसके दोस्त कम ही थे।
जिस दिन वो कॉलेज में नही दिखाई देती थी , उस दिन कॉलेज में मनहूसियत सी छा जाती थी। क्लास सूनी सूनी नज़र आती थी। न जाने कितने दबंग भाइयो ने उससे,अपने प्रेम का इज़हार किया पर कुछ न हो पाया। दिन यूँ ही बीत रहे थे। सेमिस्टर बीतते जा रहे थे और उनकी चर्चाएँ बढ़ती जा रही थी, एक साल बीता, हमारे जूनियर्स भी आये, फिर उनके जूनियर्स भी आये पर उनका जलवा काम न हुआ।
लम्बी छुट्टी के बाद एक दिन वो कॉलेज में दिखाई दी तो लोगो में ख़ुशी के लहर दौड़ गयी, पर साथ में ये किसी अज़नबी को भी लायी थी। लड़के आपस में तो यही बोल रहे थे की शायद उसका भाई है, जिसे कॉलेज दिखाने लायी है, पर उसने अपने दोस्तों को उस लड़के को अपने मंगेतर की तरह मिलवाया। ये खबर की उसकी सगाई हो गयी है जंगल की आग की तरह पूरे कॉलेज में फ़ैल गयी। उस दिन कॉलेज में मातम मनाया गया। हर लड़का उन्हें बधाई तो देने आया, पर निगाहों में अश्क भरे हुए था। कोई किसी को ज़ाहिर नही करना चाह रहा था कि उसे दिल को आघात लगा है या ग़मज़दा है। सीने में जज्बात भरे हर बन्दा लोगो को दिखा रहा था कि जैसे कुछ हुआ ही नही।
वो दिन भी आया जब वो शादी कर विदेश जा बसी, अब सबकी निगाहें फेसबुक पर टिक गई, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई। वो खुशकिस्मत थे, जिनकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट हुई और वो बदकिस्मत जिनकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नही हुई, वो दूसरो के प्रोफाइल पर जा जा कर निहारते थे, शायद कोई टैग हो। वो मोहतरमा भी कम न थी। फेसबुक पर वो अक्सर कम ही आया करती थी, अपनी प्रोफाइल फोटो में सिर्फ उन्होंने अपने हाथ की फ़ोटो लगा रखी थी। एक पोस्ट में उन्होंने अपनी परछाई डाली । फिर फेसबुक पर कॉम्प्लिमेंट्स की झड़ी लग जाती। वो साल में एक या दो पोस्ट ही करती थी।
पिछले साल जब दीवाली पर उन्होंने अपनी पूरी तस्वीर लगाई, तो उनके चाहने वालो ने कॉम्प्लिमेंट्स के सारे रिकार्ड्स तोड़ डाले।ऐसा लगा मनो लोगो ने दीवाली फेसबुक पर ही मनाई। किसी ने कमेंट में कविताएँ लिखी किसी ने मोतियों जैसे शब्द चुने उन्हें कॉम्प्लिमेंट्स के लिए।
शादी के इतने सालो के बाद भी उन्हें देखकर ऐसा नहीं लगता है की उनमे कोई बदलाव आया है।
आज भी जब हम पुराने दोस्त इकट्ठा होते है तो उनके ज़िक्र के बिना बात खत्म नही होती। हमारे दोस्तो में एक ऐसा शख्स भी है जिसका दिल खूब धड़का था उसके लिए। अब दोस्त की शादी हो गयी, बच्चे भी हो गए पर, आज भी उसका ज़िक्र आते ही उसकी आंखों में अलग सी चमक आ जाती है पर वो डरता है कि ये बात अगर उसकी पत्नी को पता लगी तो हंगामा हो जाएगा।