Saturday, December 9, 2023

एक अनकही मौसी और मुँह का बोला मामा


साल खत्म होने को बस एक महीना ही बचा है। आफिस की एक मीटिंग में हम चर्चा कर रहे थे कि नए साल में  क्या लक्ष्य साधा जाए,  AI का प्रभाव हमारे आने वाले भविष्य पर क्या होगा, चैट जी.पी.टी और गूगल बार्ड अब हमारे जीवन का हिस्सा बनते जा रहे है और आगे आने वाले भविष्य में AI क्या परिवर्तन लाएगा, अभी इसका अंदाज़ा भी नही लगा सकते। AI अब ऐसे ऐसे काम सेकंडों में कर रहा है कि बीते कल में उसी काम में घंटो या महीनों लग रहे थे। 

चर्चा चल ही रही थी कि पापा का फ़ोन आया, मीटिंग में होने के कारण मैंने फ़ोन नही उठाया। मीटिंग खत्म होने के बाद जब मैंने उन्हें कॉल किया तो पता चला कि, हमारे नाना नानी द्वारा बनाये गए उनके घर, उनके ही रिश्तेदार जबरदस्ती कब्ज़ा कर के उसपर मकान बनाने की तैयारी कर रहे है। 

तभी हमारे दिमाग मे यह विचार आया कि हम एक वर्चुअल वर्ड में रह रहे है। दिमागी बाहुबल और शारीरिक बाहुबल में बहुत अंतर है। पढ़ लिख कर हम भविष्य बुन रहे है और कोई बिना पढ़े अतीत खाये जा रहा है और जड़े खोखली कर रहा है। 

पिता जी के अनुसार, कल हमे तड़के ही घर से ननिहाल जाना है। रात भर इसी तनाव में की कोई हमारे घर पर जबरदस्ती कब्ज़ा कर रहा है। नाना नानी उम्र भर आभाव में रह कर तिनका तिनका जोड़ कर घर बनाया, और आज उनके स्वर्गवास के बाद उनकी जमीन पर एक अनाधिकृत व्यक्ति कब्ज़ा कर रहा है। 

रात आंखों में कटी, सुबह हम तैयार होकर निकल पड़े ननिहाल। रास्ते भर हम पापा से नाना-नानी और माँ की चर्चा करते रहे। तीन-चार घंटो की यात्रा करने के बाद हम ननिहाल पहुचे। कार से उतरते ही हम देखते क्या है कि उन्होंने हमारे घर का लगभग आधा हिस्सा कब्ज़े में कर लिया है। छत डालने के पूरी तैयारी है। वक्त रहते हमे पता चल गया नही तो पूरा भी कब्ज़ा हो जाता।  माँ की बहन के पति ने पापा को फ़ोन किया था और कब्ज़े की जानकारी दी थी। 

मैंने अपनी माँ की बहन को उनके रिश्ते से कभी नही बुलाया। मेरे पैदा होने से पहले से ही हमारे परिवारों में अनबन थी। कानूनी तौर पर ननिहाल की संपत्ति, माँ के नाम पर थी और उनके जाने के बाद हम भाइयो में बटी। 
जिनके बेटे ने हमारी ननिहाल की संपत्ति पर कब्ज़ा किया था उन्हें हम मामा बुलाते है। 

पापा ने जब मामा से बात की, कि तुमने ऐसा क्यों किया। हम तो आप पर विश्वास करते थे कि मेरी संपत्ति आपके सामने कोई और कब्ज़ा नही कर सकता है। दुसरो की बात छोड़िये आप ही ने कब्जा कर लिया है। 

पुत्र मोह से ग्रसित मामा का जवाब आता है कि कभी कभी नियत में खोट आ जाता है। लोग एक दूसरे की संपत्ति कब्ज़ा कर लेते है, समझ लीजिए, वैसे ही मैंने भी कब्ज़ा कर लिया है आइये हम समझौता कर लेते है। थोड़े बहुत पैसे बनते है इस जमीन के, वह ले लीजिए और मामला खत्म करिए। 

पापा ने जवाब किया कि अगर हमे बेचना ही होता तो बरसो पहले बेच दिया होता पर यह संपत्ति बच्चो की नानी की निशानी है, यह दोनों बेचना नही चाहते है। तभी मेरी माँ की बहन आकर मामा से भिड़ जाती है कि यह संपत्ति मेरी माँ की है। हम आपस मे कितना भी लाडे यह हमारे घर का मुद्दा है। हम दोनों की लड़ता देख आपने हमारा हिस्सा की हड़प लिया। 

हम भी भवचक्के रह गए। पर बात तो सही ही कह रही थी। समय मिलने पर हमने पापा से बात की कि उन्हें भी संपत्ति में बराबर का हिस्सा दे कर अपने दिल का बोझ हल्का करो। परिवार से चर्चा कर हमने उन्हें बोला कि आधा हिस्सा तुम्हारा और आधा हमारा। 

चेहरे पर खुशी का अहसास साफ दिखाई दे रहा था। एक ही पल में मानो 47 साल की गिले शिकवे खत्म हो गए । ज़िन्दगी में पहली बार उस अनकही मौसी हो हमने मौसी कहा और पैर छुए। 

हमदोनो का समझौता देख मामा के पैरों तले जमीन खिसक गई हो हमने  ऐसा प्रतीत हो रहा था। मकान बनाने का काम रुकवाया गया। फिर शरू हुआ पुलिश और अदालत का सिलसिला।

मामा और उनका पुत्र हमसे कही आगे थे। पुलिस को पहले से ही जानकारी थी। कि क्या होने वाला है। हमारी ज़मीन को अपना बता पहले से तैयार थे। 

SDM को भी एप्लीकेशन दे कर आर्डर निकलवा लिया था। हमारे पीठ पीछे सारा खेल हो चुका था। अब हमे दर दर भटकना पड़े, इसका पूरा खेल रचा जा चुका था ।अपनी ही संपत्ति पर दावा करने के लिए सारे रास्ते पहले से ही बंद हो चुके थे। 

पुलिस और प्रशासन ने निवेदन करने पर भी कोई सुनवाई नही की। कुछ लोगो के सहयोग से हमने स्टे मिला। 
मौसी को घर छोड़ गया। उनका घर हमारे पैतृक निवास से 500 मीटर भी नही होगा, गाँव एक ही है। इतनी से दूरी तय करने में चार दशक लग गए।  माँ के जाने के बाद उनके जैसा पहली बार कोई मिला जो उनके जैसा है। जिन्हें हम ज़िन्दगी भर मामा बोलते रहे और समझते रहे, उन्होंने अपना अलग ही रंग दिखाया।


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