Sunday, June 25, 2023

बुआ का बबुआ


बरसो नॉएडा रहने के दौरान आदि कभी परिवार के  किसी भी सदस्य से बहुत ज्यादा घुल मिल नहीं पाया। जबसे लखनऊ में रह रहा हूँ धीरे धीरे आदि भी सबसे मिल रहा था तो उसके अंदर भी जिज्ञासा जो रही है, सबसे मिले की, कुछ दिन पहले दिव्यांश और प्रियांश हमारे साथ रहने के लिए आये हमने एन्जॉय किया, और कुछ दिन बाद वो वापस चले गए।  

पड़ोस के घर में भी बच्चे अपनी बुआ के घर गए थे गर्मी की छुट्टियों में , उन्होंने आदि को बताया की सबने खूब मज़े किये।  

आदि को भी लगा की उसके भी तो बुआ है पर वो गर्मी की छुट्टियों में उनके घर गया ही नहीं।  आदि की गर्मी की छुट्टियां, बस खत्म ही होने वाली है, 2 हफ्ते ही बचे है कि , अचानक आदि को अपनी बुआ पर बहुत प्यार आया और शुरू हुआ बुआ के घर जाने की ज़िद, दिन रात बस एक ही बात बुआ बुआ और बस बुआ।
दीदी का  घर हमारे घर से अधिकतम 20 किलोमीटर दूर है, हमने प्लान बनाया दीदी के घर जाने का, हर बार का जाना और इस बार के जाने में ज़मीन आसमान का अंतर था। 

इस बार आदि अपना सूटकेस साथ लेकर गया था, खुद ही कपड़े निकाले और ठूस लिए जैसे तैसे जितने भी समाया, बस भर लिया । बुआ के घर पहुच कर आदि का रंग ही बदल गया। बस बुआ के घर ही रहना था और कुछ नही, पुरे घर में घूम रहा था जैसे पहली बार आया हो।  

आदि को स्वाति पहली बार अकेला छोड़ रही थी , अभी तक कभी आदि, स्वाति के बिना नहीं रहा है, इसकी शरुवात दीदी के घर से हुई है । स्वाति की भी हालत ठीक नही थी, भावुक हो रही थी, पर आदि बुआ के बबुआ बन बस बुआ के घर रहना है यही रट लगाए हुए था ।  स्वाति ने बोला कैसे रहोगे मेरे बिन, तब आदि बोलता है। 

"मैं बुआ के घर मे आपको अपने दिमाग मे आंटी फीड कर लूंगा, और जब घर आऊंगा तो आपको फिर से माँ फीड कर लूंगा " 

ऐसे में मुझे आपकी याद नहीं आएगी। 

जैसे तैसे हम आदि को छोड़, घर की तरफ बढ़े, रास्ते मे आइस क्रीम देख किसी ने बोला ही नही की दिला दो। बिना किसी ना और हाँ के, और बिना शोर शराबे के हम घर आ गए। घर में फैला सन्नाटा हमे काटने को दौड़ रहा था, इतना सन्नाटा तो हमने कभी फील ही नही किया । कोई काम ही नही था हमारे पास, सोते समय भी इतनी शांति थी कि पिन भी गिरे तो शोर लगे। 

दीदी को फ़ोन किया तो पता लगा आदि थोड़ी देर प्रियांशु के साथ खेल कर घोड़े बेच कर सोने जा रहे है। आदि दिव्यांशु और प्रियांशु के साथ गले लग कर सो गए। 

रात भर आदि को हम मिस करते रहे, स्वाति काफी देर तक जगती रही, फिर हम देर से  सो कर उठे, सुबह 10 बजे जब हमने कॉल की दीदी को तो पता लगा , कि महोदय सुबह जल्दी उठ गए थे और सबको नींद से उठा भी दिया। 

जबकि आदि यहाँ घर पर छुट्टियों में मजाल है कि 12 बजे से पहले उठा हो। आदि का बुआ के घर पर 10 बजे तक नाश्ता भी हो गया था। और हमारी नींद ही खुली थी। 

बुआ का भी प्रेम चरम पर था, तरह तरह के पकवान बनाये गए थे आदि के लिए। 

आदि ने पकवानो का मज़ा लिया, भाई की बाइसिकल चलायी, एक यूटूबर की तरह वीडियोस बनाये, दिव्यांशु की ऊपर लेटकर फोटो क्लिक कराई, दिव्यांशु भी बड़ी शांति से आदि के सरे नखरे उठा रहा था , प्रियांशु भाई से पंगे भी हुए, बुआ फूफा बस आदि और प्रियांशु में समझौता कराते कराते शनिवार से रविवार आ गया पता ही नहीं लगा।

इधर हमारा दिन ही नहीं कट रहा था , इस गठरी का माल उस गठरी में और उस गठरी का माल इस गठरी में करते रहे ताकि वक्त काट सके।  शाम चाचा के घर बिताई हमने, रात में फिर घर आते ही वही सन्नाटा।

  उधर दीदी के वादा किया था की रविवार को हम तुम्हे स्विमिंग पूल में ले जायेंगे ।  किसी कारणवश यह संभव नहीं हो पाया की स्विमिंग पूल ले जाया जा सके।  फिर आदि और प्रियांशु का तांडव शरू हुआ वाटर पार्क जाने का।  आनन् फानन में वाटर पार्क का प्लान बनाया गया।  वाटर पार्क हमारे घर के पास ही था। 

दीदी जीजा, सभी को लेकर घर आये और हमे भी चलने को कहा , हम भी तैयार हुए जाने को, एक ही गाड़ी में हमने अपने आपको में एडजस्ट किया और निकल पड़ी सवारी वाटर पार्क की तरफ।  मौसम भी अच्छा था , धुप छाओ लगी हुई थी । वाटर पार्क में जाते ही हमने आनंद की प्राप्ति शुरू हुई , इतनी गर्मी में पानी में डुपकी लगाने को  मिल जाये तो जीवन का आनंद ही कुछ और है।  हम सबने खूब नहाया , अलग अलग राइड्स ली , असली मज़ा तो तीनो बच्चो ने लिए , खूब कूदे , खूब झगड़ा किये।  कोई किसी पर लद रहा था कोई किसी और पर, दोनों में समझौता भी कराया।  बस दिव्यांश शांति से सब देख रहा था सबकुछ जैसे वो अचानक बहुत बड़ा हो गया हो।  

आखिरी में हम लहरों पर सवार हुए , मज़ा आ गया, ऐसे लगा हम समंदर में आ गए हो , इतनी बड़ी बड़ी लहरे थी जिनके ज़ोर से हम  बार बार हम किनारे पर आ जा रहे थे. 

शाम ५ बजे वाटर पार्क के बंद होने का समय आया और सवारी निकल पड़ी घर की तरफ, घर पहुंचते ही स्वाति के बोला आदि को, की रुक जाओ अब मत जाओ बुआ के घर, ऐसा कहते ही तांडव मचा दिया।  रोना शरू हुआ वह भी ऊँची आवाज़ में जैसे लग रहा था किसी ने कूट दिया हो। 

सोमवार से सबका ऑफिस था और दो बच्चो आपसे में भात्र प्रेम प्रकट कर रहे हो तो कोई एक व्यक्ति का रहना जरुरी है उनकी निगरानी के लिए , तो रोक लिया गया आदि को बुआ के घर जाने से , आदि इतना रोया की दीदी जाते जाते इमोशनल हो गयी।  

बरसो बाद दीदी को अहसास हुआ की वो बुआ है और उनका एक बबुआ है।  












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