Wednesday, June 28, 2023

गुंजा एक प्रेम कहानी -1

साधारण सा दिखने वाला, असाधारण सा एक लड़का, जो मोहब्बत के जज्बात दिल मे लिए, एक कॉलेज में दाखिल होता है। वो एक लड़की जिसे वो मन ही मन बहुत प्यार करता था, जिसको पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार था, वो लड़का, उसका पीछा करते हुए, घर से मीलो दूर किसी अनजान शहर के एक कॉलेज तक आ पहुँचा और उसी क्लास में प्रवेश लेता है जिसमे वो पढ़ा करती थी।

इश्क का जज़्बा इतना कि क्लास के हर लड़के को, ये बता बैठा की वो उस लड़की पर मरता है, उसे दिलोजान से चाहता है और क्लास के हर लड़के की वो भाभी है, सब उसे भाभी की नज़र से ही देखे न कि अपनी संभावित प्रियसी के रूप में।

वो लड़का जो  एक लड़की का पीछा करते हुए आया था उसका नाम अमित था और वो लड़की जिसका पीछा करते हुए अमित आया था उसका नाम प्रज्ञा था।
क्लास के ज़्यादातर लड़के प्रज्ञा को अमित के सामने भाभी ही बुलाते थे और वो बड़ा खुश होता था। वो धीरे-धीरे पूरे कॉलेज में उसके प्रेम के चर्चे होने लगी, वो प्रेम का ब्रांड एंबेसडर बन गया।पूरे कॉलेज में, उसके प्रेम के कसीदे सुनाए जाते थे ।

वीकेंड की एक रात, जब हॉस्टल के सारे लड़के इकठ्ठा थे और माहौल पूरी तरह गर्म था.. जश्न में सब सराबोर थे तभी कुछ लोगो ने अमित से बोला की, तुम जब उसे, इतना प्यार करते हो और  हमेशा बस उसके बारे में सोंचते हो, उसके बारे में बात करते हो, उसी को जीते हो और उसी पर मरते हो, तो तुम उससे अपनी मोहब्बत का इज़हार क्यों नही करते?? जाकर उसे अपने दिल का हाल क्यों नही सुनाते?? जाओ और बोल दो जो कुछ भी ज़ज्बात है तुम्हारे अंदर उसके लिए, फिर अमित शर्माते हुए बोला, कि वो कहना तो बहुत कुछ चाहता है उससे, पर कह नही सकता,  वो दुनिया मे बस एक ही चीज़ से डरता है। वो है प्रज्ञा के इनकार से, अगर उसने गलती से भी इनकार कर दिया तो शायद, वो इस दुनिया से रुखसती ले लेगा।

सबने अमित का हौसला बढ़ाया, उसे दुनिया भर की कसमें खिलाई गई और कुछ ने बोला कि यदि तुम मर्द हो, तो प्रज्ञा को प्रोपोज़ कर के दिखाओ। मर्द की बात सुन, अमित ने फ़ोन उठाया और प्रज्ञा को फ़ोन मिलाया, फ़ोन करते समय अमित के हाथ कांप रहे थे और चेहरे पर घबराहट साफ नजर आ रही थी, फ़ोन की घंटी बजी और प्रज्ञा ने फ़ोन उठाया, उधर से एक आवाज़ आयी, हाय अमित, बोलो क्या बात है??  इतनी देर रात फ़ोन किया , कुछ समस्या है क्या?? इतना सुनते ही अमित ने एक ही साँस में, प्रज्ञा से अपनी मोहब्बत का इज़हार कर डाला और बोला ना मत कहना, नही तो वो  ये बर्दास्त नही कर पाऊंगा।

अमित की पूरी बात सुनते ही प्रज्ञा ने उससे बोला कि उसने कभी भी उसे प्रेमी की नज़र से नही देखा है, वो उससे प्यार नही करती और न ही करना चाहती है।

प्रज्ञा का इनकार सुन, उसका दिल इस कदर टूट गया, की अमित फूट फूट कर रोने लगा, तभी वो अचानक उठा और वह छत की तरफ भाग। सारे साथी उसके पीछे भागे, उसे पकड़ने के लिए, हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर लोग उसे पकड़ पाए, वहीं पर लोगो ने अमित को समझाया की,भाई इतनी जल्दी निराश नही होते, प्रज्ञा को थोड़ा वक्त तो दो,  तुम्हारे प्यार को समझने के लिए, समझा-बुझा कर लोग उसे, उसके रूम में ले आए , लोगो ने प्रज्ञा को दोबारा अलग से फ़ोन किया और सारी बात समझाई की अमित मारने जा रहा है, हाँ बोल दो, नही तो वो मर जायेगा।

लाख समझाने के बाद प्रज्ञा ने अमित को फ़ोन किया और बोली, मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ और कल मिलकर तुमसे बात करूंगी, इतना कह कर प्रज्ञा ने फ़ोन काट दिया।
इतना सुन कर अमित की खुशी का ठिकाना ही नही रहा। पूरे होस्टल में जश्न का माहौल था। अमित ने रात में ही पार्टी देने के लिए सब को कैंटीन बुलाया और रात भर खूब परांठे खाये गए। उस रात का सारा बिल अमित के नाम रहा।

अमित को सुबह का इंतज़ार था की, जब को कॉलेज आएगी ,तो वो उसे अपने दिल का हाल पूरे विस्तार से सुनाएगा। रात आंखों में ही काट गयी, सुबह कॉलेज खुला, प्रज्ञा आयी और सीधे क्लास में चली गई। उसने अमित की तरफ देखा ही नही, एक क्लास बीती, दो क्लास बीती पर प्रज्ञा अमित से नही मिली, अमित ने क्लास में उससे बात करना चाह, तो प्रज्ञा ने अमित को भाव ही नही दिया, लंच हुआ तो अमित, प्रज्ञा से मिला।

प्रज्ञा ने अमित को देखते ही, गुस्से से आग बबूला हो गयी , प्रज्ञा ने अमित को खूब खरी खोटी सुनाई और बोली, क्या तुमने अपनी शक्ल देखी है, कभी,आईने मे???  दुनिया की कोई भी लड़की  तुमसे बात नही करना चाहेगी, प्यार तो बहुत दूर की बात है, और कल रात मैंने हाँ, इसलिए बोला था कि तुम मरने जा रहे थे। मैं नही चाहती कोई तुम जैसा मुझ पर मरे। आज के बाद कभी भी मुझसे बात मत करना। बात तो दूर, मुझे दिखाई भी मत देना, मेरे अगल बगल। इतना बोल प्रज्ञा फिर से क्लास में जा बैठी।

इतना खरी खोटी सुन अमित की आंखे भर आयी और वो तेज़ी से होस्टल की तरफ भागा। पीछे पीछे कुछ और लोग भागे, अमित को सबने मिलकर समझाया और हौसला रखने को बोला और कहा कि "बस ट्रेन और लड़की के पीछे भागना नही चाहिए, एक जाती है, तो दूसरी आती है"।

अमित के साथ कुछ ऐसे भी लोग थे जो उसे समझाते थे कि वो प्रज्ञा को समझाएंगे की तुम उससे बहुत प्यार करते हो, दुनिया मे तुमसे ज़्यादा उसे कोई नही चाहता है, ना चाहेगा, बस तुम मेरे फ़ोन में बैलेंस डालते रहना, प्रज्ञा से फ़ोन पर बात करने के लिए। सब कुछ करने के बाद भी प्रज्ञा न मानी, अमित का ख्वाब ख्वाब ही रह गया।
अमित को हमेशा प्रज्ञा की एक बात रह-रह कर याद आती थी कि "दुनिया की कोई भी लड़की उससे प्यार नही करेगी"।

दिन यूं ही बीत रहे थे प्रज्ञा और अमित एक दूसरे से कभी भी बात नही करते थे, जहाँ अमित होता था वहां प्रज्ञा नही और जहां प्रज्ञा वहां अमित नही।
दिन बीतने के साथ साथ ज़ख्म भी भरने लगे थे, सब अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गए, असाइनमेंट इतने थे कि अब सभी को वक्त की कमी होने लगी थी।

एक दिन की बात है जब अमित के फ़ोन पर एक कॉल आयी और उधर से एक लड़की बोली, आप कौन बोल रहे है, तभी अमित बोला की ,  फ़ोन आपने किया है, तो आप बताओ आप कौन  बोल रहीं है, मैं क्यों बताऊं की मैं कौन हूँ, वैसे आपकी आवाज बहुत अच्छी है, इतना बोलते ही कॉल कट हो जाता है।
थोड़ी देर के बाद फिर से कॉल आती है और वो बोलती है कि आपको बात करने की तमीज़ नही है........

बाकी का हिस्सा अगली अंक में...... 

बिजली का बिल और एक अनोखा संघर्ष


किस्सा पिछलेेे साल का ही है।  रविवार का दिन था , मै परिवार के साथ इडली और सांभर का मज़ा ले रहे थे की मकान मालिक का बुलावा आया की कुछ बात करनी है आपसे। थोड़ी देर के लिए नीचे बात करने आ जाएगा।  हम भी खाना खत्म कर नीचे पहुंचे तो चर्चा शुरू हुई बिजली के बिल पर...

मकान मालिक ने चर्चा शुरू की, कि मेरे बिजली का बिल, उनके अनुसार काफी कम सा रहा है । मकान मालिक के अनुसार, मेरा बिजली का बिल AC चलाने के बाद भी कम आ रहा है। मकान मालिक के हिसाब से मेरा बिल 5000 और 6000 के आस पास रहना चाहिए।  जो की नहीं है इसलिए उन्हें शक है की मैंने शायद कोई यन्त्र लगा रखा है जिसे बिल काम आता है।  मैंने बोला की आप घर को चेक करा सकते है सबकुछ तो आपका ही है और आप ही की अंडर में है तो मै कैसे कोई डिवाइस लगा सकता हूँ और क्यों लगाऊंगा। १०००० कियारा देने के बाद १००० या २००० के लिए इतना झाम कौन करेगा। क्या यह इतनी बड़ी रकम है की जिसके लिए मै इतनी बड़ी परेशानी लूंगा। ६ साल से रह रहा हूँ तब नहीं किया तो अब क्यों करूँगा। पर भाई साहब कुछ भी सुनाने को तैयार ही नहीं हुए।  बोले आप घर खाली कर दो । अगले महीने १० तारीख तक।  हमने कहा ठीक है हम खाली कर देंगे। आपके शक का इलाज मेरे  पास नहीं है।  इतना बोल कर मै उनके यहां से निकल लिया और अपने घर आ बैठा और पूरा किस्सा मैंने अपनी पत्नी को सुनाया। 

स्वाति गुस्से से आग बबूला हो रही थी की अचानक घर खाली करने को कोई कैसे बोल सकता है।  अभी हमने कार खरीदी है कही और जायेंगे क्या हमे पार्किंग मिलेगी। इसी उधेड़बुन मे दिन निकल गया और हमने ये निर्णय लिया की घर ढूंढते है। मिलने पर जल्दी से जल्दी खाली कर देंगे। हम मकान मालिक द्वारा लगाए गए इलज़ाम का आधार अभी तक समझ नहीं पाए थे। 

तभी सोमवार पीडी सर का फोन आया कि उन्हें घर मिलनेे वाला उसकी पजेशन के लिए वह नोएडा जल्द ही आ रहे हैं। घर मिलने के बाद, वह उस घर में रहने के लिए किसी किराएदार को ढूंढ रहे थे। हमने सोचा कि वो किसी और को किराये पर देंगे इससे अच्छा है कि मैं ही ले लूं। 

बात की हमने और वो राज़ी भी हो गए। पी डी सर आये। हमने घर अपने कब्जे में ले लिया। आजके एक हफ्ते में ही घर खाली कर जाने को तैयार हो गए। माँ को भी हमने यह सारी बात बताई, माँ ने एक बात कही 

तुमने कोई चोरी नही की है। जाने से पहले मकान मालिक को बिना मिले मत आना और अपनी बात पूरी कर के ही आना। उनका आभार भी व्यक्त करके आना की अच्छा वक्त गुजर तुमने उनके घर मे पर चोरी की बार ठीक नही थी। वक्त आने पर आपको सच्चाई पता लग जएगी। 


हमने ऐसा ही किया। मूवर्स एंड पैकर्स को बुलाया । सारा सामान पैक हो गया था। बस निकलने को ही थे। मैं और स्वाति दोनो मकान मालिक और मालकिन से मिले। हमने अपनी बात कहना शरू किया।

नमस्ते किया, और बोला एक आखिरी बात आपसे करनी है, हमने आपके घर मे अपनी गृहस्थी शरू की। आदि का लालन पालन भी यही हुआ। आप सबका प्यार भी मिला। आपने एक अभिभावक की तरह हमे बहुत कुछ सिखाया। अगर मुझसे कोई भी गलती हुई हो तो उसके लिए हम माफी मांगते है पर जो चोरी का आरोप हम पर लगाया यह ठीक नही लगा हमे। वक्त आने और जब भी कोई दूसरा किराएदार आएगा सच्चाई आपके सामने आ जायेगी। 

बस इतना बोल हम दोनों वहाँ  से निकल लिए, नए घर मे नया जीवन की शरूवात करने के लिए। 

Sunday, June 25, 2023

बुआ का बबुआ


बरसो नॉएडा रहने के दौरान आदि कभी परिवार के  किसी भी सदस्य से बहुत ज्यादा घुल मिल नहीं पाया। जबसे लखनऊ में रह रहा हूँ धीरे धीरे आदि भी सबसे मिल रहा था तो उसके अंदर भी जिज्ञासा जो रही है, सबसे मिले की, कुछ दिन पहले दिव्यांश और प्रियांश हमारे साथ रहने के लिए आये हमने एन्जॉय किया, और कुछ दिन बाद वो वापस चले गए।  

पड़ोस के घर में भी बच्चे अपनी बुआ के घर गए थे गर्मी की छुट्टियों में , उन्होंने आदि को बताया की सबने खूब मज़े किये।  

आदि को भी लगा की उसके भी तो बुआ है पर वो गर्मी की छुट्टियों में उनके घर गया ही नहीं।  आदि की गर्मी की छुट्टियां, बस खत्म ही होने वाली है, 2 हफ्ते ही बचे है कि , अचानक आदि को अपनी बुआ पर बहुत प्यार आया और शुरू हुआ बुआ के घर जाने की ज़िद, दिन रात बस एक ही बात बुआ बुआ और बस बुआ।
दीदी का  घर हमारे घर से अधिकतम 20 किलोमीटर दूर है, हमने प्लान बनाया दीदी के घर जाने का, हर बार का जाना और इस बार के जाने में ज़मीन आसमान का अंतर था। 

इस बार आदि अपना सूटकेस साथ लेकर गया था, खुद ही कपड़े निकाले और ठूस लिए जैसे तैसे जितने भी समाया, बस भर लिया । बुआ के घर पहुच कर आदि का रंग ही बदल गया। बस बुआ के घर ही रहना था और कुछ नही, पुरे घर में घूम रहा था जैसे पहली बार आया हो।  

आदि को स्वाति पहली बार अकेला छोड़ रही थी , अभी तक कभी आदि, स्वाति के बिना नहीं रहा है, इसकी शरुवात दीदी के घर से हुई है । स्वाति की भी हालत ठीक नही थी, भावुक हो रही थी, पर आदि बुआ के बबुआ बन बस बुआ के घर रहना है यही रट लगाए हुए था ।  स्वाति ने बोला कैसे रहोगे मेरे बिन, तब आदि बोलता है। 

"मैं बुआ के घर मे आपको अपने दिमाग मे आंटी फीड कर लूंगा, और जब घर आऊंगा तो आपको फिर से माँ फीड कर लूंगा " 

ऐसे में मुझे आपकी याद नहीं आएगी। 

जैसे तैसे हम आदि को छोड़, घर की तरफ बढ़े, रास्ते मे आइस क्रीम देख किसी ने बोला ही नही की दिला दो। बिना किसी ना और हाँ के, और बिना शोर शराबे के हम घर आ गए। घर में फैला सन्नाटा हमे काटने को दौड़ रहा था, इतना सन्नाटा तो हमने कभी फील ही नही किया । कोई काम ही नही था हमारे पास, सोते समय भी इतनी शांति थी कि पिन भी गिरे तो शोर लगे। 

दीदी को फ़ोन किया तो पता लगा आदि थोड़ी देर प्रियांशु के साथ खेल कर घोड़े बेच कर सोने जा रहे है। आदि दिव्यांशु और प्रियांशु के साथ गले लग कर सो गए। 

रात भर आदि को हम मिस करते रहे, स्वाति काफी देर तक जगती रही, फिर हम देर से  सो कर उठे, सुबह 10 बजे जब हमने कॉल की दीदी को तो पता लगा , कि महोदय सुबह जल्दी उठ गए थे और सबको नींद से उठा भी दिया। 

जबकि आदि यहाँ घर पर छुट्टियों में मजाल है कि 12 बजे से पहले उठा हो। आदि का बुआ के घर पर 10 बजे तक नाश्ता भी हो गया था। और हमारी नींद ही खुली थी। 

बुआ का भी प्रेम चरम पर था, तरह तरह के पकवान बनाये गए थे आदि के लिए। 

आदि ने पकवानो का मज़ा लिया, भाई की बाइसिकल चलायी, एक यूटूबर की तरह वीडियोस बनाये, दिव्यांशु की ऊपर लेटकर फोटो क्लिक कराई, दिव्यांशु भी बड़ी शांति से आदि के सरे नखरे उठा रहा था , प्रियांशु भाई से पंगे भी हुए, बुआ फूफा बस आदि और प्रियांशु में समझौता कराते कराते शनिवार से रविवार आ गया पता ही नहीं लगा।

इधर हमारा दिन ही नहीं कट रहा था , इस गठरी का माल उस गठरी में और उस गठरी का माल इस गठरी में करते रहे ताकि वक्त काट सके।  शाम चाचा के घर बिताई हमने, रात में फिर घर आते ही वही सन्नाटा।

  उधर दीदी के वादा किया था की रविवार को हम तुम्हे स्विमिंग पूल में ले जायेंगे ।  किसी कारणवश यह संभव नहीं हो पाया की स्विमिंग पूल ले जाया जा सके।  फिर आदि और प्रियांशु का तांडव शरू हुआ वाटर पार्क जाने का।  आनन् फानन में वाटर पार्क का प्लान बनाया गया।  वाटर पार्क हमारे घर के पास ही था। 

दीदी जीजा, सभी को लेकर घर आये और हमे भी चलने को कहा , हम भी तैयार हुए जाने को, एक ही गाड़ी में हमने अपने आपको में एडजस्ट किया और निकल पड़ी सवारी वाटर पार्क की तरफ।  मौसम भी अच्छा था , धुप छाओ लगी हुई थी । वाटर पार्क में जाते ही हमने आनंद की प्राप्ति शुरू हुई , इतनी गर्मी में पानी में डुपकी लगाने को  मिल जाये तो जीवन का आनंद ही कुछ और है।  हम सबने खूब नहाया , अलग अलग राइड्स ली , असली मज़ा तो तीनो बच्चो ने लिए , खूब कूदे , खूब झगड़ा किये।  कोई किसी पर लद रहा था कोई किसी और पर, दोनों में समझौता भी कराया।  बस दिव्यांश शांति से सब देख रहा था सबकुछ जैसे वो अचानक बहुत बड़ा हो गया हो।  

आखिरी में हम लहरों पर सवार हुए , मज़ा आ गया, ऐसे लगा हम समंदर में आ गए हो , इतनी बड़ी बड़ी लहरे थी जिनके ज़ोर से हम  बार बार हम किनारे पर आ जा रहे थे. 

शाम ५ बजे वाटर पार्क के बंद होने का समय आया और सवारी निकल पड़ी घर की तरफ, घर पहुंचते ही स्वाति के बोला आदि को, की रुक जाओ अब मत जाओ बुआ के घर, ऐसा कहते ही तांडव मचा दिया।  रोना शरू हुआ वह भी ऊँची आवाज़ में जैसे लग रहा था किसी ने कूट दिया हो। 

सोमवार से सबका ऑफिस था और दो बच्चो आपसे में भात्र प्रेम प्रकट कर रहे हो तो कोई एक व्यक्ति का रहना जरुरी है उनकी निगरानी के लिए , तो रोक लिया गया आदि को बुआ के घर जाने से , आदि इतना रोया की दीदी जाते जाते इमोशनल हो गयी।  

बरसो बाद दीदी को अहसास हुआ की वो बुआ है और उनका एक बबुआ है।