साधारण सा दिखने वाला, असाधारण सा एक लड़का, जो मोहब्बत के जज्बात दिल मे लिए, एक कॉलेज में दाखिल होता है। वो एक लड़की जिसे वो मन ही मन बहुत प्यार करता था, जिसको पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार था, वो लड़का, उसका पीछा करते हुए, घर से मीलो दूर किसी अनजान शहर के एक कॉलेज तक आ पहुँचा और उसी क्लास में प्रवेश लेता है जिसमे वो पढ़ा करती थी।
इश्क का जज़्बा इतना कि क्लास के हर लड़के को, ये बता बैठा की वो उस लड़की पर मरता है, उसे दिलोजान से चाहता है और क्लास के हर लड़के की वो भाभी है, सब उसे भाभी की नज़र से ही देखे न कि अपनी संभावित प्रियसी के रूप में।
वो लड़का जो एक लड़की का पीछा करते हुए आया था उसका नाम अमित था और वो लड़की जिसका पीछा करते हुए अमित आया था उसका नाम प्रज्ञा था।
क्लास के ज़्यादातर लड़के प्रज्ञा को अमित के सामने भाभी ही बुलाते थे और वो बड़ा खुश होता था। वो धीरे-धीरे पूरे कॉलेज में उसके प्रेम के चर्चे होने लगी, वो प्रेम का ब्रांड एंबेसडर बन गया।पूरे कॉलेज में, उसके प्रेम के कसीदे सुनाए जाते थे ।
वीकेंड की एक रात, जब हॉस्टल के सारे लड़के इकठ्ठा थे और माहौल पूरी तरह गर्म था.. जश्न में सब सराबोर थे तभी कुछ लोगो ने अमित से बोला की, तुम जब उसे, इतना प्यार करते हो और हमेशा बस उसके बारे में सोंचते हो, उसके बारे में बात करते हो, उसी को जीते हो और उसी पर मरते हो, तो तुम उससे अपनी मोहब्बत का इज़हार क्यों नही करते?? जाकर उसे अपने दिल का हाल क्यों नही सुनाते?? जाओ और बोल दो जो कुछ भी ज़ज्बात है तुम्हारे अंदर उसके लिए, फिर अमित शर्माते हुए बोला, कि वो कहना तो बहुत कुछ चाहता है उससे, पर कह नही सकता, वो दुनिया मे बस एक ही चीज़ से डरता है। वो है प्रज्ञा के इनकार से, अगर उसने गलती से भी इनकार कर दिया तो शायद, वो इस दुनिया से रुखसती ले लेगा।
सबने अमित का हौसला बढ़ाया, उसे दुनिया भर की कसमें खिलाई गई और कुछ ने बोला कि यदि तुम मर्द हो, तो प्रज्ञा को प्रोपोज़ कर के दिखाओ। मर्द की बात सुन, अमित ने फ़ोन उठाया और प्रज्ञा को फ़ोन मिलाया, फ़ोन करते समय अमित के हाथ कांप रहे थे और चेहरे पर घबराहट साफ नजर आ रही थी, फ़ोन की घंटी बजी और प्रज्ञा ने फ़ोन उठाया, उधर से एक आवाज़ आयी, हाय अमित, बोलो क्या बात है?? इतनी देर रात फ़ोन किया , कुछ समस्या है क्या?? इतना सुनते ही अमित ने एक ही साँस में, प्रज्ञा से अपनी मोहब्बत का इज़हार कर डाला और बोला ना मत कहना, नही तो वो ये बर्दास्त नही कर पाऊंगा।
अमित की पूरी बात सुनते ही प्रज्ञा ने उससे बोला कि उसने कभी भी उसे प्रेमी की नज़र से नही देखा है, वो उससे प्यार नही करती और न ही करना चाहती है।
प्रज्ञा का इनकार सुन, उसका दिल इस कदर टूट गया, की अमित फूट फूट कर रोने लगा, तभी वो अचानक उठा और वह छत की तरफ भाग। सारे साथी उसके पीछे भागे, उसे पकड़ने के लिए, हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर लोग उसे पकड़ पाए, वहीं पर लोगो ने अमित को समझाया की,भाई इतनी जल्दी निराश नही होते, प्रज्ञा को थोड़ा वक्त तो दो, तुम्हारे प्यार को समझने के लिए, समझा-बुझा कर लोग उसे, उसके रूम में ले आए , लोगो ने प्रज्ञा को दोबारा अलग से फ़ोन किया और सारी बात समझाई की अमित मारने जा रहा है, हाँ बोल दो, नही तो वो मर जायेगा।
लाख समझाने के बाद प्रज्ञा ने अमित को फ़ोन किया और बोली, मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ और कल मिलकर तुमसे बात करूंगी, इतना कह कर प्रज्ञा ने फ़ोन काट दिया।
इतना सुन कर अमित की खुशी का ठिकाना ही नही रहा। पूरे होस्टल में जश्न का माहौल था। अमित ने रात में ही पार्टी देने के लिए सब को कैंटीन बुलाया और रात भर खूब परांठे खाये गए। उस रात का सारा बिल अमित के नाम रहा।
अमित को सुबह का इंतज़ार था की, जब को कॉलेज आएगी ,तो वो उसे अपने दिल का हाल पूरे विस्तार से सुनाएगा। रात आंखों में ही काट गयी, सुबह कॉलेज खुला, प्रज्ञा आयी और सीधे क्लास में चली गई। उसने अमित की तरफ देखा ही नही, एक क्लास बीती, दो क्लास बीती पर प्रज्ञा अमित से नही मिली, अमित ने क्लास में उससे बात करना चाह, तो प्रज्ञा ने अमित को भाव ही नही दिया, लंच हुआ तो अमित, प्रज्ञा से मिला।
प्रज्ञा ने अमित को देखते ही, गुस्से से आग बबूला हो गयी , प्रज्ञा ने अमित को खूब खरी खोटी सुनाई और बोली, क्या तुमने अपनी शक्ल देखी है, कभी,आईने मे??? दुनिया की कोई भी लड़की तुमसे बात नही करना चाहेगी, प्यार तो बहुत दूर की बात है, और कल रात मैंने हाँ, इसलिए बोला था कि तुम मरने जा रहे थे। मैं नही चाहती कोई तुम जैसा मुझ पर मरे। आज के बाद कभी भी मुझसे बात मत करना। बात तो दूर, मुझे दिखाई भी मत देना, मेरे अगल बगल। इतना बोल प्रज्ञा फिर से क्लास में जा बैठी।
इतना खरी खोटी सुन अमित की आंखे भर आयी और वो तेज़ी से होस्टल की तरफ भागा। पीछे पीछे कुछ और लोग भागे, अमित को सबने मिलकर समझाया और हौसला रखने को बोला और कहा कि "बस ट्रेन और लड़की के पीछे भागना नही चाहिए, एक जाती है, तो दूसरी आती है"।
अमित के साथ कुछ ऐसे भी लोग थे जो उसे समझाते थे कि वो प्रज्ञा को समझाएंगे की तुम उससे बहुत प्यार करते हो, दुनिया मे तुमसे ज़्यादा उसे कोई नही चाहता है, ना चाहेगा, बस तुम मेरे फ़ोन में बैलेंस डालते रहना, प्रज्ञा से फ़ोन पर बात करने के लिए। सब कुछ करने के बाद भी प्रज्ञा न मानी, अमित का ख्वाब ख्वाब ही रह गया।
अमित को हमेशा प्रज्ञा की एक बात रह-रह कर याद आती थी कि "दुनिया की कोई भी लड़की उससे प्यार नही करेगी"।
दिन यूं ही बीत रहे थे प्रज्ञा और अमित एक दूसरे से कभी भी बात नही करते थे, जहाँ अमित होता था वहां प्रज्ञा नही और जहां प्रज्ञा वहां अमित नही।
दिन बीतने के साथ साथ ज़ख्म भी भरने लगे थे, सब अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गए, असाइनमेंट इतने थे कि अब सभी को वक्त की कमी होने लगी थी।
एक दिन की बात है जब अमित के फ़ोन पर एक कॉल आयी और उधर से एक लड़की बोली, आप कौन बोल रहे है, तभी अमित बोला की , फ़ोन आपने किया है, तो आप बताओ आप कौन बोल रहीं है, मैं क्यों बताऊं की मैं कौन हूँ, वैसे आपकी आवाज बहुत अच्छी है, इतना बोलते ही कॉल कट हो जाता है।
थोड़ी देर के बाद फिर से कॉल आती है और वो बोलती है कि आपको बात करने की तमीज़ नही है........
बाकी का हिस्सा अगली अंक में......