"बड़ा बाप, छोट महतारी, बिच्चैक सीताराम"
अर्थात बड़े बच्चे को पिता बहुत प्रेम करते है, छोटे को माँ, पर बीच के बच्चे को कोई प्रेम नही करता है।
बचपन से यही सुनता आया हूँ, और आज यही देख भी रहा हूँ। बड़ा मुझे छोटा नही समझता और छोटा बड़ा।
बड़ा गलती कर तो बड़ा है, माफी नही मांगेगा, छोटा गलती करे तो माफ कर दो क्योंकि छोटा है, माफी तो वो भी नही मांगेगा।
रहा मैं, मेरी गलतियां कभी माफ नही होती।
सम्मान और प्यार दोनों की हिस्से में नही आते।
इसलिए मैंने सिर्फ एक ही संतान की, वह ना वो मेरी बड़ी संतान है, और ना ही छोटी ना माझिल और ना ही साँझील।
मैं बस इसी में खुश हूं
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