Friday, January 17, 2020

सवाल ए बेगम

मुहल्ले की एक पुलिया पर हम यारो के साथ तफरी काट रहे थे। हम सबका पसंदीदा विषय पत्नी पुराण चल रहा था। सभी अपनी  अपनी पत्नी के किस्से सुना रहे थे। वीकेंड का दिन था तो तफरी का मज़ा ही कुछ और था। वक्त सभी के पास था, ठहाके ज़ोर ज़ोर से लग रहे थे। सब बाते तो अपनी अपनी पत्नी की कर रहे थे पर सभी को यही लग रहा था कि उनकी ही पत्नी की बात हो रही हो। 

कोई शॉपिंग की लिस्ट से परेशान था,  तो कोई गिफ्ट से। किसी की शादी की सालगिरह आने वाली थी, तो किसी की बीत गई थी। किसी के वीकेंड का दर्द था तो किसी को ससुराल का। कोई तो पत्नी की नाराज़गी का कारण  ढूंढ़ रहा था तो कोई हल। 

मज़े की बात तो यह थी कि समस्याएं तो सबके पास थी पर हल किसी के पास नहीं था। सब एक दूसरे के दर्द पर दर्दे डिस्को कर रहे थे। 

तभी एक महोदय, ठहाको की आवाज़ सुन हमारी तरफ खींचे चले आए और हमारी मंडली में घुस गए। महोदय बस बातो का मज़ा ले रहे थे। किसी ने उनसे हाल चाल पूछा । हाल चाल ठीक बता, बस बाते पीने लगे। चर्चा जब अपने चरम पर थी और तभी किसी ने महोदय से पूछा कि भाई साहब आप भी भाभी जी के हाल चाल सुनाइए। कैसी है भाभी जी? भाभी जी का स्वास्थ्य ठीक तो है ना? आज कल आप को भी कपड़े और बर्तन तो नहीं धुलने पड़ रहे है घर में! 

महोदय जी को ये बात कुछ जमी नहीं। गंभीर मुद्रा में आ गए। दोबारा पूछने पर झट से प्रश्नों के बान चलाने लगे और बोले..

क्यों जानना चाहते हो मेरी पत्नी के बारे में?
जान कर क्या करोगे?
मेरी पत्नी में इतना इंट्रेस्ट क्यों ले रहे हो?
क्या तुम मेरी पत्नी को जानते हो? जो उसके हाल पूंछ रहे हो। 

महोदय की भाव भंगिमा देख सबके ठहाके थम गए। सन्नाटा पसर गया। महोदय के इन प्रश्नों का जवाब देने से तफ़री का मज़ा किरकिरा हो जाता।  तभी हमने बोला । 

माफ़ कर दीजिए भाई साहब!
हमने गलती की, कि आपसे भाभी का हाल पूछा। 
अगली बार हाल हम स्वयं पूछ लेंगे। आप जाईए। 

उनको दरकिनार कर हम फिर से गप्पो में व्यस्त हो गए। 

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