Thursday, January 9, 2020

दूध के दांत


2020 की पहली शाम थी, हम अपने दोस्तो के साथ घर पर ही नए वर्ष के पहले दिन का आनंद ले रहे थे। दोस्तो के साथ हम गप्पे मार ही रहे थे कि, तभी आदि, स्वाति के पास आया और बोला  मां, मेरा एक दांत हिल रहा है। 

स्वाति आश्चर्य में थी कि इतनी जल्दी आदि के दांत कैसे हिलने लगे। स्वाति ने आदि के दांतो पर हाथ लगा कर देखा और पाया की आदि के दांत सच में हिल रहे थे।   स्वाति ने मुझे बुलाया और बोला कि आदि के दांत गिरने वाले है। हमने आदि को समझाया कि बेटा कुछ दिनों में यह दांत गिर जाएगा और वहीं फिर से नया दात निकल आयेगा जो फिर नहीं टूटेगा। 

आदि अपनी हिलते हुए दांतो की समस्या भूल कर बच्चो के साथ खेलने में व्यस्त हो गया। घर बच्चो की चहचहाहट से भरा हुआ था। बच्चे आपस में खेल ही रहे की, आदि फिर से दौड़ता हुआ स्वाति के पास आया और बोला कि मां मुंह से खून निकल रहा है और मेरा दांत टूट गया है। आदि रोते रोते हुए बोला, की विवेक चाचू की जैकेट की वजह से मेरा दांत टूट गया है। 

विवेक भी समझ नहीं पा रहा था कि उसकी जैकेट की वजह से कैसे आदि का दांत टूट गया। खून की बात सुन हम सब भी आदि के पास पहुंचे, तो पाया कि आदि का मुंह खून से भरा हुआ था और उसका एक दांत गायब था। स्वाति भी भावुक हो बोलने लगी कि मेरा बेटा बड़ा हो रहा है।  उधर आदि का रोना बंद ही नहीं हो रहा था। कुल्ला कराया गया। मुंह तो साफ हो गया और खून का रिसाव भी कम हो गया था। स्वाति के बार बार समझाने और मेरे मित्र संदीप की बेटी के टूटे हुए दांत दिखाने के बाद आदि भी शांत हो गया। जब वह शांत हुआ तो हमने पूछा कि तुम्हारा टूटा हुआ दांत कहां है तो आदि बोला कि विवेक चाचू के पास होगा। विवेक भी हक्का बक्का कुछ समझ नहीं रहा था कि माजरा क्या है। 

दांत की ढूढाई शुरू की गई। ढूंढने पर दांत विवेक जहां बैठा था, उस कुर्सी के नीचे मिला। माजरा समझ में नहीं आ रहा था कि आदि के दांत और विवेक के बीच क्या संबंध है। आदि से जब पूछताछ की गई तो पता लगा कि आदि ने खेल-खेल में विवेक को काटने कि कोशिश की थी। जैकेट मोटी थी इसलिए विवेक को पता नहीं लगा। जैकेट की  पॉकेट की ज़िप में उसका दांत फस गया और खींचा तानी में दांत टूट गया। 

थोड़ा और तफ्तीश करने के बाद पता लगा कि, यह वह  दांत नहीं था जो हिल रहा था। यह उस हिलते हुए दांत के बगल वाला दांत था। 

माजरा खत्म होने के बाद हम सब दोस्त आपस में गप्पे मारने में व्यस्त हो गए, नए साल के पहला दिन क्या खाया जाए इसका प्लान बना रहे थे कि आदि, स्वाति के पास आया और बोला कि मां प्लीज मेरे मुंह में पट्टी बांध दो। इतना सुन हम सब हंस दिए। स्वाति ने आदि को समझाया कि बेटा मुंह में पट्टी नहीं बांधी जाती, इसे ऐसे ही छोड़ दो अपने आप ही सही हो जाएगा। 

आदि को समझाने के बाद, हम अपना खाने का  प्लान बनाने में व्यस्त हो गए । खाना लेने के लिए जैसे ही हम बाहर जाने लगे तो देखा कि बाहर के कमरे में, हीरो के बगल में फर्स्ट एड का बॉक्स  पड़ा हुआ था। पट्टी, बैंडेज और खून के निशान लगी कुछ रूई के टुकड़े पड़े हुए थे।  हमने सबको बुलाया, सभी आदि के देख कर ठहाके मार कर हसने लगे और हम अंदाज़ा लगाने लगे कि कैसे आदि ने कैसे अपने मुंह में पट्टी बांधने का प्रयास किया होगा और  जब वह ना बंधी होगी तो उसने कैसे बैंडेज लगाने की कोशिश की होगी।  आदि का चेहरा टूटे हुए दांत के साथ अजीब सा लग रहा था।

 मेरे यह लिखने  तक आदि का एक और दांत गिर चुका है। अबकी बार खून नहीं निकला सिर्फ दांत टूटा है।

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