Tuesday, January 21, 2020

सच बोलना आता है मुझे- आदि

अपने साले की सगाई निपटा, मै रेलगाड़ी से दिल्ली कें लिए रवाना हुआ। लखनऊ पहुंचने वाला था और आप पास बैठे सहयात्रियों से बात हो रही थी। तभी स्वाति ने पूछा हम कितने बजे गाजियाबाद पहुंचेंगे। मैंने कहा अगर सब ठीक ठाक रहा और ट्रेन लेट ना हुई तो, हम सुबह  ३:३० तक गाजियाबाद पहुंच जाएंगे। 
तभी स्वाति ने बोला अगर हम टाइम से पहुंच गए तो आदि को स्कूल भेज देंगे। आदि जो कि सीट पर ऊपर नीचे कर रहा था आया और बोला कि कल शायद मै थक जाऊंगा और स्कूल नहीं जा पाऊंगा। मै स्कूल फिर कभी और चला जाऊंगा।

पहले भी जब कभी भी आदि का स्कूल जाने का मन नहीं करता था तो बोलता है कि मुझे बुखार आ सकता है या मेरा पेट दर्द कर रहा है। पूछने पर कि क्या तुम्हारा पेट दर्द कर रहा है तो बोलता है कि नहीं, अभी नहीं पर स्कूल में कर सकता है। 

इसी चर्चा में हमने बोला की आदि को सच और झूठ का मतलब भी नहीं पता है अभी। बच्चे सिर्फ बहाने बनाते है । सच या झूठ नहीं बोल पाते। तभी आदि बोलने लगा कि मै बहाने नहीं बनाता हूं और मै सच बोल लेता हूं। 

स्वाति के पास आ कर आदि ने बोला कि मै "सच" बोल लेता हूं।    तभी स्वाति ने बोला, सच क्या होता है जानते भी हो। ज़रा बोल कर दिखाओ। आदि बोला  सच सच सच.. बताओ कितनी बार बोलूं सच। आप भी बोलो १०० बार सच। तभी स्वाति भी सच का जाप करने लगी। १० बार ही हुए थे कि आदि बोलने लगा बस हो गया १०० बार। 

Saturday, January 18, 2020

प्याज़ का अर्क


जहां बाजार में प्याज ₹120 किलो बिक रहा है, लोग आजकल प्याज चूम कर काम चला रहे हैं और मेरी पत्नी प्याज का रस निकाल रही थी। मुझे क्या पता था,  खून पसीने की कमाई से खरीदे हुए प्याज का  प्रयोग मेरी पत्नी बालो की सुंदरता बढ़ाने के लिए करती है।

Friday, January 17, 2020

सवाल ए बेगम

मुहल्ले की एक पुलिया पर हम यारो के साथ तफरी काट रहे थे। हम सबका पसंदीदा विषय पत्नी पुराण चल रहा था। सभी अपनी  अपनी पत्नी के किस्से सुना रहे थे। वीकेंड का दिन था तो तफरी का मज़ा ही कुछ और था। वक्त सभी के पास था, ठहाके ज़ोर ज़ोर से लग रहे थे। सब बाते तो अपनी अपनी पत्नी की कर रहे थे पर सभी को यही लग रहा था कि उनकी ही पत्नी की बात हो रही हो। 

कोई शॉपिंग की लिस्ट से परेशान था,  तो कोई गिफ्ट से। किसी की शादी की सालगिरह आने वाली थी, तो किसी की बीत गई थी। किसी के वीकेंड का दर्द था तो किसी को ससुराल का। कोई तो पत्नी की नाराज़गी का कारण  ढूंढ़ रहा था तो कोई हल। 

मज़े की बात तो यह थी कि समस्याएं तो सबके पास थी पर हल किसी के पास नहीं था। सब एक दूसरे के दर्द पर दर्दे डिस्को कर रहे थे। 

तभी एक महोदय, ठहाको की आवाज़ सुन हमारी तरफ खींचे चले आए और हमारी मंडली में घुस गए। महोदय बस बातो का मज़ा ले रहे थे। किसी ने उनसे हाल चाल पूछा । हाल चाल ठीक बता, बस बाते पीने लगे। चर्चा जब अपने चरम पर थी और तभी किसी ने महोदय से पूछा कि भाई साहब आप भी भाभी जी के हाल चाल सुनाइए। कैसी है भाभी जी? भाभी जी का स्वास्थ्य ठीक तो है ना? आज कल आप को भी कपड़े और बर्तन तो नहीं धुलने पड़ रहे है घर में! 

महोदय जी को ये बात कुछ जमी नहीं। गंभीर मुद्रा में आ गए। दोबारा पूछने पर झट से प्रश्नों के बान चलाने लगे और बोले..

क्यों जानना चाहते हो मेरी पत्नी के बारे में?
जान कर क्या करोगे?
मेरी पत्नी में इतना इंट्रेस्ट क्यों ले रहे हो?
क्या तुम मेरी पत्नी को जानते हो? जो उसके हाल पूंछ रहे हो। 

महोदय की भाव भंगिमा देख सबके ठहाके थम गए। सन्नाटा पसर गया। महोदय के इन प्रश्नों का जवाब देने से तफ़री का मज़ा किरकिरा हो जाता।  तभी हमने बोला । 

माफ़ कर दीजिए भाई साहब!
हमने गलती की, कि आपसे भाभी का हाल पूछा। 
अगली बार हाल हम स्वयं पूछ लेंगे। आप जाईए। 

उनको दरकिनार कर हम फिर से गप्पो में व्यस्त हो गए। 

Thursday, January 9, 2020

दूध के दांत


2020 की पहली शाम थी, हम अपने दोस्तो के साथ घर पर ही नए वर्ष के पहले दिन का आनंद ले रहे थे। दोस्तो के साथ हम गप्पे मार ही रहे थे कि, तभी आदि, स्वाति के पास आया और बोला  मां, मेरा एक दांत हिल रहा है। 

स्वाति आश्चर्य में थी कि इतनी जल्दी आदि के दांत कैसे हिलने लगे। स्वाति ने आदि के दांतो पर हाथ लगा कर देखा और पाया की आदि के दांत सच में हिल रहे थे।   स्वाति ने मुझे बुलाया और बोला कि आदि के दांत गिरने वाले है। हमने आदि को समझाया कि बेटा कुछ दिनों में यह दांत गिर जाएगा और वहीं फिर से नया दात निकल आयेगा जो फिर नहीं टूटेगा। 

आदि अपनी हिलते हुए दांतो की समस्या भूल कर बच्चो के साथ खेलने में व्यस्त हो गया। घर बच्चो की चहचहाहट से भरा हुआ था। बच्चे आपस में खेल ही रहे की, आदि फिर से दौड़ता हुआ स्वाति के पास आया और बोला कि मां मुंह से खून निकल रहा है और मेरा दांत टूट गया है। आदि रोते रोते हुए बोला, की विवेक चाचू की जैकेट की वजह से मेरा दांत टूट गया है। 

विवेक भी समझ नहीं पा रहा था कि उसकी जैकेट की वजह से कैसे आदि का दांत टूट गया। खून की बात सुन हम सब भी आदि के पास पहुंचे, तो पाया कि आदि का मुंह खून से भरा हुआ था और उसका एक दांत गायब था। स्वाति भी भावुक हो बोलने लगी कि मेरा बेटा बड़ा हो रहा है।  उधर आदि का रोना बंद ही नहीं हो रहा था। कुल्ला कराया गया। मुंह तो साफ हो गया और खून का रिसाव भी कम हो गया था। स्वाति के बार बार समझाने और मेरे मित्र संदीप की बेटी के टूटे हुए दांत दिखाने के बाद आदि भी शांत हो गया। जब वह शांत हुआ तो हमने पूछा कि तुम्हारा टूटा हुआ दांत कहां है तो आदि बोला कि विवेक चाचू के पास होगा। विवेक भी हक्का बक्का कुछ समझ नहीं रहा था कि माजरा क्या है। 

दांत की ढूढाई शुरू की गई। ढूंढने पर दांत विवेक जहां बैठा था, उस कुर्सी के नीचे मिला। माजरा समझ में नहीं आ रहा था कि आदि के दांत और विवेक के बीच क्या संबंध है। आदि से जब पूछताछ की गई तो पता लगा कि आदि ने खेल-खेल में विवेक को काटने कि कोशिश की थी। जैकेट मोटी थी इसलिए विवेक को पता नहीं लगा। जैकेट की  पॉकेट की ज़िप में उसका दांत फस गया और खींचा तानी में दांत टूट गया। 

थोड़ा और तफ्तीश करने के बाद पता लगा कि, यह वह  दांत नहीं था जो हिल रहा था। यह उस हिलते हुए दांत के बगल वाला दांत था। 

माजरा खत्म होने के बाद हम सब दोस्त आपस में गप्पे मारने में व्यस्त हो गए, नए साल के पहला दिन क्या खाया जाए इसका प्लान बना रहे थे कि आदि, स्वाति के पास आया और बोला कि मां प्लीज मेरे मुंह में पट्टी बांध दो। इतना सुन हम सब हंस दिए। स्वाति ने आदि को समझाया कि बेटा मुंह में पट्टी नहीं बांधी जाती, इसे ऐसे ही छोड़ दो अपने आप ही सही हो जाएगा। 

आदि को समझाने के बाद, हम अपना खाने का  प्लान बनाने में व्यस्त हो गए । खाना लेने के लिए जैसे ही हम बाहर जाने लगे तो देखा कि बाहर के कमरे में, हीरो के बगल में फर्स्ट एड का बॉक्स  पड़ा हुआ था। पट्टी, बैंडेज और खून के निशान लगी कुछ रूई के टुकड़े पड़े हुए थे।  हमने सबको बुलाया, सभी आदि के देख कर ठहाके मार कर हसने लगे और हम अंदाज़ा लगाने लगे कि कैसे आदि ने कैसे अपने मुंह में पट्टी बांधने का प्रयास किया होगा और  जब वह ना बंधी होगी तो उसने कैसे बैंडेज लगाने की कोशिश की होगी।  आदि का चेहरा टूटे हुए दांत के साथ अजीब सा लग रहा था।

 मेरे यह लिखने  तक आदि का एक और दांत गिर चुका है। अबकी बार खून नहीं निकला सिर्फ दांत टूटा है।