Friday, August 24, 2018

प्रेम का पहला ख़त

यह किस्सा तब का है जब हम स्कूल में पढ़ा करते थे। स्कूल की सबसे बातूनी क्लासेज में हमारी क्लास का पहला स्थान था ।  कोई भी टीचर हमारे क्लास में आती तो कुछ बच्चो को बिना कुछ बोले ही क्लास से बाहर निकाल देती या क्लास में सबसे पीछे खड़ा कर देतीं थीं और बोलती थीं  की तुम लोग वही से पढ़ो। इन सबके बावजूद हमारी क्लास का शोर पूरे स्कूल के शोर पर हावी रहता था। 

जब कभी भी टीचर के क्लास में आने में थोड़ी सी देरी हो जाती थी, तो क्लास की मॉनिटर चॉक से ब्लैक बोर्ड पर उनके नाम लिख देती थी।  अक्सर टीचर के आने से पहले ब्लैक बोर्ड साफ़ कर दिया जाता था। कभी शोर जब हद से ज़्यादा गुजर जाता था तो उन बच्चो का नाम कॉपी पर  लिख लिया जाता था और वो नाम टीचर तक पहुँच जरूर जाते थे।  फिर आगे क्या होता था इसकी अंदाज़ा लगाया ही जा सकता है। डंडे बरसते थे, तशरीफ़ पर, पर गिने नही जाते थे। 

शोर के अलावा हमारे क्लास के टॉपर भी पूरे स्कूल पर हावी थे। हमारी क्लास के कुछ बच्चे हमारी प्रिंसिपल के चहेते भी थे। अक्सर उनका उदाहरण हमारे सामने पेश किया जाता था। हमारे क्लास के दो टॉपर थे,  एक थी और एक था, जो थी वो थी दिव्या और जो था वो था अमित । दोनों कुछ ही नम्बरों से आगे पीछे रहते थे। टीचरों के हर सवाल का जवाब इनके पास रहता था। कभी कभी तो पूरी क्लास खड़ी रहती थी और ये दोनों बैठे रहते थे।


एक दिन की बात है हमारी क्लास टीचर तेज़ी से चलते हुए हमारी क्लास में एंटर की, चेहरे से तो बहुत गुस्से में लग रही थी, हमे लगा कुछ हुआ होगा, किसी की शिकायत किसी टीचर ने की होगी। मैं आगे से चौथी सीट पर बैठता था ।

अचानक क्लास टीचर ने गुस्से से चार बच्चो के नाम पुकारे, चारो मेरी क्लास के छटे हुए शरारती थे। टीचर के हाथ के एक कागज का टुकड़ा और दूसरे हाथ में लकड़ी के स्केल थी। चारो ब्लैक बोर्ड तक पहुँचते उससे पहले ही दो तीन रसीद हो चुके थे।


मैम का चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था। क्लास में उनके चेहरे को देख कर सन्नाटा छा चुका था। जिसे कहते है पिन ड्राप साइलेंट। कागज़ के टुकड़े को उन्हें दिखा कर मैम गुस्से में बोली,  ये किसने लिखा है? जब किसी का कोइ जवाब नही आया तो मैम ने एक बार फिर से तेज़ आवाज़ ने फिर से पूछा कि ये किसने लिखा है, जवाब फिर नही आया। 

गुस्से में सबकी तशरीफ पर दो-दो स्केल रसीद हो जाती है। सबने एक एक कर ना कही, किसी का भी कबूलनामा नहीं आया की उस पेपर पर किसने लिखा था। 


तभी  देखता क्या हूँ दिव्या ज़ोर ज़ोर से रोने लगी, साथ में बैठी लड़कियां और टीचर उसे शांत कराने लगी और बोलने लगी की हम ढूंढ कर ही रहेंगे की यह किसने लिखा है।  तभी एक और टीचर क्लास में आती है जो पुरे स्कूल में पिटाई के लिए कुख्यात थी , आते ही सारे बच्चो को  सम्बोधित करते हुए बोली की, कौन कौन इन्वॉल्व है मुझे बताओ , अगर अभी बता दोगे तो कुछ नहीं कहूँगी, नहीं तो ऐसी मार पड़ेगी की ज़िन्दगी भर याद करोगे और स्कूल से निकाल दिए जाओगे।  क्लास में सन्नाटा अभी भी छाया था।  कोई भी आवाज़ कही से भी नहीं आ रही थी।  तभी स्कूल की घंटी बजती है और लंच टाइम हो जाताहै ।  हर तरफ से बच्चो का शोर आ रहा था पर हमारी क्लास अभी भी शांत थी।  तभी टीचर ने बोला, आज किसी को भी लंच करने को नहीं मिलेगा , जब तक वो बच्चा सामने नहीं आता जिसने यह लिखा है।  

हम सब समझ नहीं पा रहे थे की हो क्या रहा है, किसने क्या लिखा है पर डर के मारे कोई कुछ बोल नहीं रहा था। भूख के मारे सबके चेहरे उतर से गये थे, हमारे मुरझाए हुए चेहरे देख मैम ने हमे जाने दिया खाना खाने के लिए। जाने से पहले हमसब की हिंदी और इंग्लिश की कॉपी जमा कर ली गयी थी।  मन में जिज्ञाशा लिए हमसब खुसुर फुसुर कर रहे थे की हुआ क्या है।  कुछ दोस्तों से पूछा क्या हुआ उन्हें भी नहीं पता था।  

दिव्या की दोस्त से हमने पूछा की क्या हुआ।  दिव्या इतना क्यों रो रही थी, तब उसने विस्तार से बताया की दिव्या को किसी ने प्रेम पत्र लिखा है और उसे उसके घर मे डाल गया है। प्रेम पत्र,  प्रेम के अलग अलग अलंकारों से भरा हुआ है।  दिव्या के घर वालो को जब इस प्रेम पत्र के बारे में पता लगा तो दिव्या की अच्छे से पिटाई की गई है और उसके पापा ने कहा है कि तुम इतनी छोटी से उम्र में प्रेम प्रसंग के चक्कर में पड़ गयी हो और तुम्हाराआगे का भविष्य तो मानो खत्म हो गया है। उसके घर वाले उसका नाम भी स्कूल से कटवा रहे है और उसके घरवालों ने बोला है की अब वो आगे की पढ़ाई नहीं करेगी। 

दूसरे दिन दिव्या रोते हुए क्लास टीचर के पास आयी और सारी बात बतायी और वो पत्र भी दिखाया।  तभी टीचर क्लास में आयी थी और सबसे पूछ रही थी। 

इतने बड़े कांड के बाद कुछ दिन तो हमारे बिना पढ़ाई के ही गुजरे।  टीचर्स हमारी क्लास में आती तो थी पर पढ़ाती नहीं थी और बोलती थी की आप लोग खुद ही पढ़ाई कर लो, जब तक पत्र लिखने वालो का नाम सामने नहीं आता कोई टीचर आप लोगो को नही पढ़ाएगी।  

दिन ऐसे ही बीत रहे थे, मुझे न जाने क्यों ऐसा लग रहा था की टीचर्स के जासूस कोने कोने में फैले हुए है, अफवाहों का भी बाजार बहुत की गरम था , कभी खबर आती थी कि  कि प्रेम पत्र इसने लिखा है तो कभी उसने। खबर तो यहां तक आयी थी की शायद कुछ लड़कियों जो दिव्या से जलती है उन्होंने ही पत्र लिखा और दिव्या के घर डाल आयी है। जिससे उसकी पढ़ाई बंद हो जाये। 

उन दिनों स्कूल की सारी टीचर्स क्लास की लड़कियों को  मासूम समझती थी और लड़को को घूर कर देखती थीं। उनकी निगाहों में हम गिर चुके थे। कोई भी अच्छे से बात नही करता था हमसे। हमने लड़कियों की तरफ देखना ही बंद कर दिया था। सब यही सोच रहे थे कि कही किसी ने गलती से भी शिकायत कर दी तो समझो आफत आ जाएगी। 

एक दिन सारी टीचर्स फिर से हमारी क्लास में आयी, उनके आते ही क्लास में फिर से सन्नाटा छा गया, हमे लगा अब फिर से कुछ होने वाला है किसी की फिर पिटाई। एक टीचर के हाथ मे एक मोटा सा डंडा भी था।  एक एक कर उन्होंने 6 बच्चो को बाहर निकाला, उन 6 बच्चो में हमारी क्लास का टॉपर अमित भी था।  

सबसे पहले टीचर ने अमित को बुलाया और  अमित के पास आते ही टीचर का डंडा चालू हो गया।  कोई गिन नहीं रहा था बस डंडे बरस रहे थे, वो भी जम कर, पर अमित की ज़ुबान खुल ही नही रही थी। टीचर्स ने थोड़ा और ज़ोर लगाया। थोड़ी देर के बाद अमित बोलता है, मैम अब बस करो, मुझे अब मत मारो मैं बताता हूँ, इसके पीछे किसका हाथ है। आंखों में आंसू लिए अमित बोला की मैंने ये पत्र नहीं लिखा है। इसके पीछे अभिनव है उसी ने यह पत्र लिखा है। अभिनव का नाम आते ही उसके पैर काँपने लगे। फिर अभिनव की बारी आयी, ४ डंडो में ही उसकी ज़ुबान खुल गयी और बोला ये लेटर उसने आशीष के कहने पर लिखा था, और जब आशीष की बारी आयी तो, उसने बिना डंडे खाये ही सबकुछ बोलना शरू कर दिया  और पूरी कहानी सामने रख दी, की पत्र अभिनव ने लिखा था, शब्द अमित के थे,  दिव्या के घर पत्र डालने दो लोग गौरव और संतोष गए थे और रमेश ने सारा प्लान बनाया और मैनेज किया।

इस कबूलनामे के बाद सबकी धुलाई अच्छे से हुई सारी टीचर्स ने अपने हाथ उनपर साफ किये और फिर उन सबको स्कूल से निकालने के प्रक्रिया शुरी की गयी। किसी को यकीन नही आ रहा था कि अमित इस कांड में शामिल होगा। पढ़ने लिखने में सबसे अच्छा है फिर भी ऐसी हरकत की है। सबके पेरेंट्स को स्कूल में बुलाया गया और सारी बात बताई गई, कुछ के पेरेंट्स ने तो उनकी सबके सामने धुनाई की, पेरेंट्स द्वारा टीचर्स को मनाने के बाद और सबके माफी मांगे की बाद उन्हें स्कूल से निकाला नहीं गया। 

 उस दिन से हमारी क्लास में दाहिनी तरफ लड़किया और बायीं तरफ लड़के बैठने लगे। लड़का लड़की आपस मे बात नही कर सकते थे। अगली क्लास आते आते लड़का लड़की अलग अलग सेक्शन में बैठने लगे। अमित बॉयज सेक्शन का टॉपर बना और दिव्या गर्ल्स सेक्शन की। 



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