Tuesday, March 6, 2018

तलाश

यह कहानी एक ऐसे लड़के की है जो बचपन से ही काफी अंतर्मुखी का था । घर मे वो अपने भाई बहनों में मझिला था । बड़ा उसे छोटा नही समझता था और छोटा उसे बड़ा नही समझता था । अपने भाव अपने तक ही सीमित रखने का गुण वक्त ने उसे सीखा दिया था। माँ बाप ने उसका नाम रोहित रखा था ।

जैसे तैसे बारहवीं पास करने के बाद रोहित ने दिल्ली के नामी कॉलेज में अपना दाखिला ले लिया। रैगिंग के डर से उसने कॉलेज जाना कुछ देर से शरु किया। जब वो पहले दिन डरा-सहमा, अपने कॉलेज पहुँचा, तो मानो उसके सीनियर उसका इंतज़ार कर रहे थे । रोहित को देखते ही उसके सीनियर्स ने उसे पकड़ लिया। खूब रैगिंग हुई, उसका पहला दिन अठन्नी, चवन्नी, एक रुपया, दो रुपया में ही गुजर गया।

क्लास में किसी का नाम जान पाता, उससे पहले ही दिन खत्म हो गया। कुछ दिन तो रैगिंग में ही निकल गए , क्लास के कुछ ही बच्चो को वो जान पाया था। क्लास में एक से एक धुरंधर भरे थे । कोई टॉप करके आया था, तो कोई सुपर टॉप करके आया था। रोहित की मिसाल ही क्या थी क्लास में । 12वी में तो वो तो सिर्फ पास ही हुआ था। धीरे धीरे वो क्लास की अगली लाइन से सबसे पिछली लाइन पर पहुच गया।

क्लास की पिछली लाइन में वहां उसकी मुलाकात दो ऐसे बंदों से हुई, जो सिर्फ अपने मे ही मस्त रहते थे। उनमे से एक लड़का था और एक लड़की। एक दूसरे के कान में न जाने क्या खुसुर-फुसुर करते रहते थे और न जाने किस बात पर मुस्कुरा देते थे। वो बात सिर्फ उन्हें ही पता रहती थी। अगल बगल वाले तो सिर्फ उन दोनों का मुँह ही देखते रहते थे। क्लास की अटेंडेंस रजिस्टर से उन दोने का नाम पता लगा । लड़के का नाम शेखर और लड़की का नाम गौरा था ।

दोनों पढ़ने में बहुत तेज़ थे। टीचर के हर प्रश्न का जवाब उनके पास रहता था। ऐसे ही किसी दिन रोहित को टीचर ने खड़ा कर,एक प्रश्न पूछ लिया, जिसका जवाब उसके पास नही था। रोहित थोड़ा घबराया और इधर उधर देखने लगा, तभी शेखर ने चुपके से प्रश्न का जवाब कॉपी के आखिरी पन्ने पर लिख दिया और रोहित ने टीचर के प्रश्न का जवाब दे दिया। रोहित शर्मिंदा होने से बच गया।

वक्त गुजरता गया,  रोहित और शेखर कभी कभी हाय बाय कर लेते थे पर गौरा सिर्फ शेखर तक ही सीमित थी। एक दिन शेखर और रोहित आपस मे बात करते करते अपने स्कूल के दिनों की बाते करने लगे ।  बाद में दोनों को पता चला कि वो दोनों एक ही शहर से है। फिर होना क्या था,  धीरे धीरे दोनों में छनने लगी। गौरा भी उसी के शहर से थी, बातो-बातो में पता चला कि,गौरा भी उसी स्कूल से थी जिस स्कूल में रोहित पढ़ा करता था पर ब्रांच अलग अलग थी।
  वक्त के साथ अब तीनो में अच्छी दोस्ती हो गयी, तीनों अपने शहर की खास बातों को साझा कर खूब हँसा करते थे। शेखर ने रोहित को बताया कि वो और गौरा बचपन के दोस्त है और एक दूसरे से बहुत प्यार करते है।

एक दिन की बात है जब गौरा, रोहित के पास आयी और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली "जो तुम दिखते हो, वो तुम हो नही" रोहित का सिर, यह बात सुन चकरा गया। अभी तक वो अंतर्मुखी था , अपनी भावनाओं को उसने कभी भी किसी के सामने प्रकट नही किया था, फिर गौरा ये कैसे जान सकती थी, कि मैं जो दिखता हूँ मैं वो हूँ नही।

यह बात रोहित के दिमाग मे काफी दिनों तक रही पर वक्त से साथ, जाती रही। तीनो अब अच्छे दोस्त बन चुके थे । गौरा और शेखर अपनी प्रेम कहानी अक्सर रोहित को सुनाया करते थे। कैसे दोनों में प्यार हुआ । कब दोनों के एक दूसरे को पहली बार अपने प्रेम का अहसास कराया। कहाँ कहाँ वो एक दूसरे से छुप कर मिला करते थे। कैसे दोनों ने एक ही कॉलेज में कैसे दाखिल लिया। इन सबके बाद भी दोनों के घर वालो को उनके प्रेम के बारे में कुछ नही पता चला।

धीरे-धीरे रोहित को उन दोनो के प्रेम से प्रेम हो गया और रोहित भी दोनों के एक हो जाने की दुआएं भगवान से मांगने लगा ।  गौरा स्वभाव से थोड़ी चुलबुली और हसमुख लड़की थी । वो जल्दी से किसी को दोस्त नही बनाती थी और जब वो बनाती थी तो खूब खुल कर बात करती थी। उसकी बातों में बनावटी पन नही था।  शेखर थोड़ा गम्भीर लड़का था । जल्दी से किसी के बारे में कोई राय नही बनाता था बहुत जल्दी खुश और नज़र नही होता था पर गौरा को बहुत प्यार करता था ।

गौरा की ज़रा से तबियत खराब हो जाने पर या चोट लग जाने पर वो बहुत घबरा जाता था।गौरा एक दिन अगर कॉलेज न आये तो दिन भर बस गौरा गौरा करते बीतता था।
गौरा भी शेखर को अपने हाथ से खाना खिलाती थी, वो शेखर की हर छोटी बड़ी बात का ध्यान रखती थी।

क्लास के सारे लोग उन्हें लैला मजनूं बोलते थे , पर शेखर इस बात पर चिढ़ता था कि लैला मजनूं कभी एक दूसरे के नही हो पाए।

जैसे जैसे कॉलेज के दिन बीत रहे थे,  तीनो एक दूसरे के काफी करीब आते जा रहे थे। रोहित भी, अब अंतर्मुखी से बहिर्मुखी होता जा रहा था। दोस्ती के साथ साथ तीनो साथ ही पढ़ाई भी करते थे, रोहित के भी अब अच्छे नंबर आने लगे थे । तीनो मिलजुल कर पढ़ाई और एसाइनमेंट करते थे।

कॉलेज खत्म होते होते गौरा और शेखर ने सोंचा की वो अपने घर वालो से अपने रिश्ते के बारे में बात करेंगे, पर गौरा अपने घर मे शेखर के बारे में बात करने से डरती थी। उसे डर था कि कही उसके घर वाले उसके प्रेम के बारे में सुन उसकी शादी किसी और से न करा दे।

गौरा और शेखर दोनों अलग अलग सामाजिक परिवेश से जो आते थे । शेखर ने सोंचा की जब दोनों की जॉब लग जायेगी तब वो गौरा के घर जाकर उसके घर वालो से उसका हाथ मांगेगा।

कॉलेज खत्म भी हो गया और तीनों का प्लेसमेंट भी एक अच्छी से कंपनी में हो गया । जोइनिंग लेटर लेने के बाद गौरा और शेखर दोनों ने अपने अपने घर पर बात की एक दूसरे से बारे में । दोनों के घर वाले एक दूसरे की शादी के खिलाफ थे। दोनों के घर वालो ने गौरा और शेखर में लाख कमियां निकल दी और किसी भी शर्त पर शादी ना करने देने की बात पर अड़ गए।

गौरा अपने की घर मे कैद हो गयी, उसका मोबाइल भी उससे छीन लिया गया , अब वो किसी से बात नही कर सकती थी। शेखर की भी हालत कुछ ठीक नही थी। शेखर भी पागल से हो गया था गौरा के बिना। दिन रात शेखर के आंखों में आंसू रहते थे, फिर शेखर ने वो किया जो कोई भी सोंच नही सकता था ।
उसने अपनी जान देने की कोशिश की,पर वक्त रहते उसकी बहन ने उसे हॉस्पिटल पहुँच उसकी जान बचाई। हफ़्तों हॉस्पिटल में रहने के बाद जब वो घर आया तो उसके माता पिता तैयार हो गए दोनों की शादी कराने के लिए।

शेखर अपने माता पिता को लेकर गौरा के घर पहुंचा तो नज़ारा कुछ और ही था । गौरा के घर वालो ने शेखर के घर वालो से बात ही नही की और न ही घर मे घुसने दिया। गौरा के भाइयो ने शेखर और उसके माता पिता से हाथा पाई तक कि नौबत आ गयी। घर की छत से उन्होंने गौरा से बुलवाया और कहलवाया की तुम यहाँ से चले जाओ मुझे तुमसे शादी नही करनी है।

शेखर और मुरझा गया । तीनो घर आ गए और धीरे धीरे शेखर डिप्रेशन में चला गया पर अब गौरा से बात करने की कोई जुगत ही नही सूझ रही थी। जब रोहित को ये सारी बात पता लगी तो उसने गौरा से बात करने की कोशिश की पर, कुछ न हुआ । एक दिन रोहित ने गौरा के घर फ़ोन किया तो , गौरा की भाभी ने फ़ोन उठाया और बताया गौरा घर पर नही है।

कुछ दिनों ने बाद गौरा ने रोहित को  ईमेल किया कि रोहित अब सबकुछ खत्म हो चुका है। मेरा भरोशा अब किसी चीज़ पर नही रहा है। ना दोस्ती पर और ना ही प्यार पर, तुम भूल जाओ मुझे, और फिर कभी मुझे फ़ोन मत करना और न ही कभी मिलने की कोशिश करना। तुम बहुत ही भावुक व्यक्ति हो , तुम्हे थोड़ी तकलीफ भी होगी, पर वक्त की यही मांग है। अपने दिल को मजबूत करो और ज़िन्दगी में आगे बढ़ो और अपने भविष्य को बेहतर बनाओ।

गौरा का यह मेल देख रोहित थोड़ा दुखी तो था पर निराश नही। रोहित ने फिर गौरा को रिप्लाई किया कि, किसी को
भूल जाना या याद रखना ये किसी के बस में नही है। क्या तुम मुझे बता सकती हो ऐसा क्या हुआ । जिससे तुम्हारा दिल यूँ टूट गया। मैं कभी भी किसी को भूलता नही , तुम कही भी जाओ एक दिन आएगा जब मैं तुम्हे ढूंढ लूंगा।

फिर कभी गौरा ने मेल का रिप्लाई नही किया। रोहित भी अब अपनी जॉब और ज़िन्दगी में व्यस्त हो गया पर उसके दिल के किसी कोने में गौरा से मिलने की ख्वाहिश बाकी थी।
शेखर को उसके माँ बाबू जी ने बहुत समझाया फिर शेखर भी अपनी ज़िंदगी मे आगे बढ़ने का फैसला किया। वो भी नौकरी की तलाश शुरू की।

एक दिन रोहित , शेखर को अपने रूम पर ले गया और सारा माजरा समझे कि कोशिश करने लगा । जैसे ही गौरा के बारे में शेखर से रोहित ने पूछा कि, कुछ खबर है उसकी की वो कहाँ है। गौरा का ज़िक्र आते ही शेखर बहुत असहज से होने लगा , उसकी तबियत बिगड़ने लगी।  शेखर को शांत करने के बाद रोहित बिना कुछ बात किये सो गया। सुबह शेखर जल्दी ही रोहित के घर से निकल लिया। उस दिन के बाद दोनों की मुलाकात नही हुई।

अपने दो जिगरी दोस्तो से बिछड़ने का गम अक्सर रोहित को सताता था। शेखर उसके फेसबुक के फ्रेंड लिस्ट में था पर कभी बात नही होती थी। सिर्फ जन्म दिन की बधाई के अलावा कोई और बात नही ।

गौरा को वो अक्सर फेसबुक पर रोहित ढूंढता रहता था पर वो वहां भी कभी नही दिखी। शेखर ने भी अब अपनी नई ज़िंगदगी शरु कर ली थी । नौकरी लगने के बाद उसने उसके साथ ही काम करने वाली लड़की से शादी कर ली। रोहित, शेखर की शादी में नही गया।

रोहित ने भी घर वालो की पसंद की एक लड़की से विवाह कर अपनी ज़िंदगी मे व्यस्त हो गया।  ज़िन्दगी हर्षोल्लास से साथ बीत ही रही कि की एक दिन रोहित को गौरा दिखी पूरे 11 साल बाद। 

रोहित के बचपन के दोस्त के साथ फेसबुक पर। पहले तो वो समझ ही नही पर की वो गौरा है या उसकी हमशक्ल। जब वो उसकी प्रोफाइल पर गया तो देखा कि वो सच मे गौरा ही थी। उसकी एक बेटी भी है बिल्कुल गौरा की तरह। रोहित के खुशी का ढिकाना ही नही था उसका मन झूम कर नाचने लगा । इस खुशी का इज़हार वो किससे करे समझ मे नही आ रहा था।
इस बात का ज़िक्र वो अपनी पत्नी से कैसे करता, वो तो कुछ जानती ही नही थी उसके बारे में पर फिर भी रोहित ने उसे बताया पर वो समझ ही नही पाई की अगर आपने किसी को फेसबुक पर ढूंढ लिया है तो भी इसमें इतना खुश होने की क्या बात है।

रोहित शून्य सा चेहरा ले फेसबुक पर वापस आ गया। शेखर को वो क्या बताए , अब वो अपनी ज़िंदगी मे व्यस्त है। उसे बताने से कही उसकी ग्रहस्ती पर असर न पड़े। बताए तो वो किसे बताए। कोई क्या उसके ज़ज़्बात समझेगा।

एक दिन रोहित का मन किया कि वो जाए अपने बचपन के दोस्त के पास और वहां गौरा से भी मुलाकात हो जाएगी। कुछ प्रश्न उसके ज़हन में अचनाक आए।

गौरा से बात क्या करँगा।
गौरा का क्या रिएक्शन होगा उसे को देखकर।
एक अजनबी सा व्यवहार करेगी या एक बिछड़े दोस्त की तरह।
गौरा से शिकायतें करूँगा या कुछ बात नही करूँगा।
उसका पति क्या सोंचेगा की मैं किससे मिलने आया हूँ।

इतना सोंच उसके कदम रुक गए और रोहित से यह फैसला लिया कि अब वो कभी कोशिश नही करेगा गौरा से मिलने की । वक्त ने जब हम सब का बिछड़ना ही लिखा था तो ऐसा ही सही।

कभी किसी रोज़ वो अचानक मिल गयी तो देखा जाएगा।

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