बात 10 फरवरी की है, पापा का जन्मदिन मनाने के लिए हम केक, पनीर और नमकीन लाये थे , घर पंहुचा तो स्वाति ने बोला की मैं एक चक्कर लगा आती हूँ स्कूटर से, स्वाति स्कूटर ले चक्कर लगाने निकल गयी, हमने सामान घर के दरवाजे से लगे चबूतरे पर रख दिया। फिर आदि भी जिद करने लगा की वो पार्क में टहलने के लिए जायेगा। हम दोनों घर के सामने वाले पार्क में चले गए यह सोचकर की, कौन चोरी करेगा इस सामान को। स्वाति स्कूटी से चक्कर लगाने के बाद एक और चक्कर लगाने के लिए गयी। हम भी आदि के साथ पार्क में ही थे। स्वाति के दूसरा चक्कर लगाने के बाद हम घर के अंदर जाने के लिए सामान उठाने के लिए जैसे ही गए देखा की एक थैला गायब था उसमे ही सारा खाने का सामान था। हमने इधर उधर हर जगह देखा थैला कही नही था। ऊपर नीचे सबसे पूछा की कहीं गलती से उन्होंने तो नहीं उठा लिया थैला। सबने मना कर दिया। हम हैरान थे की कौन ले गया थैला। फिर हमने अपने आपको समझने की कोशिशें करना शुरू किया, की कोई बात नहीं कोई भी ले गया होगा। चलो आज उसका पेट भर जायेगा। ये दिन आ गए की खाना भी घर के सामने से चोरी होने लगा। मैंने भी अपने आपको समझाया और सारा सामान दोबारा लेने के लिए निकल पड़ा। बेकरी से केक और नमकीन, फिर डेरी पर पनीर लेने गया और बोला भाई पैकेट चोरी हो गया है भाई फिर से पनीर पैक कर दो। दुकानदार बोला भाई चोरी नहीं हुआ होगा । कोई कुत्ता उठा ले गया होगा। मुझे यकीन नहीं हो रहा था फिर भी पनीर ले हम घर की तरफ निकले। फिर देखता क्या हूँ घर के पास केक और नमकीन का पैकेट पड़ा हुआ था। थोड़ी दूर पर ब्रेड का पैकेट भी सही सलामत पड़ा हुआ था। फिर मैं आगे का सामान ढूंढने के लिए पार्क में गया। और कुत्तों को देख की रहा था कि कही पनीर भी सही सलामत मिल जाये। कुत्तो के पास जैसे ही पंहुचा देखता क्या हूँ, एक कुत्ता अचानक मुझे देख कर भाग़ गया। उसका व्यवहार भी कुछ अलग सा था। जैसे मैं उसके पीछे गया वो और तेज़ भागने लगा। झुण्ड के पास देखा की पनीर का पैकेट चाट किया जा चूका था। पास में ही ड्राई केक का पैकेट भी खुला पड़ा हुआ था। मैं उस कुत्ते के पीछे लग लिया देखता क्या हूँ वो एक कार के पीछे चुप गया। मैंने उससे पूछा क्यों की चोरी। उसके पीछे गया। वो कार के गोल गोल चक्कर काटने लगी मेरे साथ । कभी मै आगे तो वो पीछे। कभी मैं पीछे तो वो आगे। स्वाति भी घर से सारा नज़ारा देख रही थी । बाद में स्वाति ने बताया वो कुत्ता नहीं कुतिया थी और उम्मीद से थी।
यह जानकर दिल को सकूँ मिला की चलो खाना किसी जरुरत मंद के काम आया। व्यर्थ नहीं गया।
यह जानकर दिल को सकूँ मिला की चलो खाना किसी जरुरत मंद के काम आया। व्यर्थ नहीं गया।
Bahut hi acha vivran Dia AAP ne. Yeh Jaan ke Kushi Hui ki chachaji ke janamdiwas pe kisi jaruratmand ki maddat Hui.
ReplyDeleteAwe...heart touching episode ho gaya....hence proved every dog has a day....☺️🎂💐👌👍
ReplyDeletechorni.. :)
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