Tuesday, December 24, 2024

आज का अय्यार और बहरूपिया


चालाक, जासूस,, गुप्तचर,  छल करने वाला, मक्कार, धोखेबाज,  ठग, चोर ।

कभी चंद्रकांता में हमने देखा था कि एक अय्यार कैसे अलग-अलग वेश बदलकर, दूसरे राज्यों में जाकर एक-दूसरे को लड़ाने का काम करते थे। और जो अय्यार ठीक थे, बिगड़ी बना भी देते थे।

इतने बरसों के बाद आज मुझे फिर से उनकी याद आई। अय्यार अब कोई व्यक्ति नहीं जिस पर हम कंट्रोल कर सकें। वो कोई और नहीं, अभी हाल ही में जन्मा अपना AI है। अक्सर हम फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर AI द्वारा बनाई गई फोटो और वीडियो देखते हैं, जिसमें हमारे नायकों का ही प्रयोग कर उनसे उनकी मर्जी के बिना ही कुछ भी कहलवाया जाता है।

देखने में भेद करना मुश्किल होता जा रहा है कि कौन असली है और कौन नकली। अभी तो AI बच्चा है। भविष्य में वह क्या गुल खिलाएगा, अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।

बहुत ही सावधानी से इस नए अय्यार का प्रयोग करना होगा नही तो यह हमको हमसे ही लड़ा कर स्वयं कही किनारे खड़ा होकर बस यह तमाशा देखेगा। 







Sunday, June 16, 2024

मेरे अंदर का पिता



मेरे अंदर से एक व्यक्ति हर वक्त बाहर झांकता रहता है। मैं जब भी आईना देखता हूँ, वही नज़र आता है। दाढ़ी बनाते समय मेरे चेहरे के हर भाव में, मेरे उठने , मेरे बैठने, रोने और हंसने में भी उन्ही की छवि दिखाई देती है। उन्हें मैं हर दिन अपने अंदर ही महसूस करता हूं। 


उनके जाने के बाद उनकी अच्छाइयों और बुराइयो का आंकलन समाज तो करेगा या कर रहा है और मैं ? मैं उनके जैसा बनना तो कभी नही चाहता था, पर क्या करूँ ?

 

चाह कर या ना चाहकर उन्ही के जैसा ही हूँ। उसके जाने के बाद मैं उनका ही प्रतिनिधित्व कर रहा हूँ। उन्होंने जो कमाया वही मुझे विरासत में मिल रहा है। 


अब मैं अपने आपको उनकी जगह और अपने बेटे को अपनी जगह रख कर जी रहा हूँ। जो व्यवहार उन्हें मेरे साथ करना चाहिए था , मैं बस वही कर रहा हूँ। जो गलत था उसे सुधार रहा हूँ। 


वो अब कहीं भी हो अगर वो मुझे देख सुन रहे हो तो उन्हें बताना चाह रहा हूँ कि आपका बेटा आपसे बहुत प्यार करता था, है और रहेगा।