Thursday, March 14, 2019

विलेज ऑफ कॉक्स

दूर किसी गांव में कुछ मुर्गे और मुर्गियां रहा करती थी। गांव के सारे जानवरो से उनकी खूब गहरी दोस्ती थी। जब भी मुर्गियां, अपने चूज़ों के साथ, गली से निकलती तो हर कोई उन्हें देखकर बहुत नाज़ करते थे। सारे चूज़े अपनी माँ को बिना परेशान किये एक ही लाइन में चला करते थे और जब चूज़ों के पापा उनके साथ जाते तो वो बिना खिलौने लिए घर वापस नही आते थे। किसी को गुड़िया पसंद आती, तो किसी को गुड्डा।

एक दिन की बात है जब गांव की कुछ मुर्गो ने बताया कि पड़ोस के गांव में एक लोमड़ी आयी है जो बच्चो को उठा ले जाती है और उन्हें खा जाती है।

गांव के सारे जानवरो ने फैसला किया कि अब वो अपने बच्चो को बाहर खेलने नही भेजेंगे। बच्चे घर के आंगन में ही खेलेंगे और रात में सारे मुर्गे पहरा देंगे। दिन यूं ही बीत रहे थे। बच्चो ने बाहर जाना बंद कर दिया, वो घर मे ही आपस मे खेलते थे।

काफी दिन बीत जाने के बाद जब लोमड़ी गांव में नही आई तो बच्चो ने धीरे धीरे घर से बाहर खेलना शुरू किया। चूज़ों के पापा ने भी रात में पहरा देना कम कर दिया।

ऐसे ही किसी रोज़, लोमड़ी ने गांव में दबे पांव प्रवेश किया और देखा कि गांव के सारे मुर्गे सो रहे है । उसने सोंचा कि अच्छा मौका है किसी एक घर मे धावा बोल कर सबको खा लिया जाए।

लोमड़ी ने अक्कड़ बक्कड़ बोलकर एक घर को चुना। और उनके आंगन में कूद गई। मुर्गे अपने परिवार से साथ आंगन में ही सो रहे थे, उनकी आंख खुल गयी और देखा लोमड़ी उनके बच्चो पर झपट्टा मारने के लिए तैयार थी। तभी मुर्गे ने लोमड़ी को सावधान किया और बोला कि वो वहां से चली जाए, पर लोमड़ी कहाँ पीछे हटने वाली थी तभी मुर्गे के बांग लगाई और गांव से सारे मुर्गे एक आवाज़ साथ आ खड़े हुए।

तभी एक मुर्गे ने लोमड़ी पर आक्रमण कर दिया। लोमड़ी ताकतवर थी उसके एक ही वार ने मुर्गे को अधमरा कर दिया। सारे मुर्गे उसकी ताकत को देख घबरा गए और फिर कुछ और मुर्गो ने कोशिश की पर वो भी उससे हार कर अधमरे से हो गए।

मुर्गो ने आपस मे बात की कि ऐसे लड़ेंगे तो एक एक कर हम सब मारे जाएंगे, हम सब एक साथ लोमड़ी पर आक्रमण करते है, फिर जो भी होगा देखा जाएगा। सभी लोमड़ी की तरफ बढ़े किसी ने उसके मुंह पर चोंच मारे तो किसी ने उसके आँख पर, भीषण युद्ध चला मुर्गे घायल हो किनारे हटाते गए पर हार नही मानी। मुर्गिया भी पीछे नही रही उन्होंने भी युद्ध मे भाग लिया। लोमड़ी घायल हो भागने की फिराक में थी तभी मुर्गियों के एक झुंड ने उसका रास्ता रोक लिया और बोला तुम्हे ज़िंदा नही जाने देंगे । फिर सबने एक साथ एक आखिरी वार किया और लोमड़ी वही धरासायी हो गयी।

दूसरे दिन लोमड़ी के मारे जाने की खबर आस पास के गांव में फैली तो सब मरी हुई लोमड़ी को देखने आए और गांव से सारे मुर्गे और मुर्गियों की वीरता की प्रसंसा करने लगे।
ये खबर जब राज्य से राजा को पता लगी, तो राजा ने उस गांव को वीरो का गांव घोषित किया है।


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