जबसे मिटू हैश टैग आया है और लोगो ने अपने ऊपर हुए अत्याचार की घटनाओं को शेयर किया है, मुझे भी लगा कि मैं भी कुछ लिखूं। लोगो से शेयर करू अपना भी अनुभव जिसमे मैं या मेरे जान पहचान दे लोग शामिल रहे हों।
मैं अपने भाई बहनों में मझला हूँ। घर मे मेरी बड़ी बहन का ही वर्चस्व रहा । कभी भी हमने उनसे तेज़ आवाज़ में बात नही की थी। कभी दीदी से पंगा भी हुआ तो दबी हुई
आवाज़ में ही हमने उनका विरोध किया।
किस्सा उन दिनों का है जब हम नौंवी क्लास में पढ़ते थे। स्कूल घर से बहुत दूर था। स्कूल हम स्कूल बस से जाते थे और बस घर से लगभग एक किलोमीटर दूर मिलती थी। सुबह हम अक्सर भाग भाग कर बस पकड़ते थे और शाम आराम से टहलते हुए आते थे। एक दिन की बात है, जब मैं बस से उतरा तो मेरे सीनियर ने कहा कि, तुम इतनी दूर पैदल क्यों जाते हो, मेरा घर पास मे है, मैं रिक्शा कर के जाता हूँ। एक काम करो मेरे साथ चला करो और मैं अपने घर पर उतर जाऊंगा और तुम रिक्शा लेकर अपने घर चले जाना । पैसे मैं दे दूंगा, रिक्शे वाला पैसे तो उतना ही लेगा जितना मेरे घर के लिए लेता है।
मैंने उन्हें मना कर दिया यह सोचकर कि दीदी को पता लगा कि मैं रिक्शे से आया हूँ और पैसे किसी और ने दिए है तो मेरी अच्छे से धुलाई हो जाएगी।
ऐसे ही किसी दिन स्कूल से जल्दी छुट्टी होने पर मैं बस से उतरा और फिर मेरे सीनियर ने कहा आज चल मेरे साथ रोज़ तो जाता नही है, मैंने सोंचा की चलो चलते है एक ही दिन की तो बात है।
हम रिक्शे पर बैठे और घर की तरफ निकले । तभी देखता हूँ एक लड़की जो किसी और रिक्शे पर थी, स्कूल से घर जा रही थी। तभी मेरा सीनिय, रिक्शे वाले से बोलता है कि इसका पीछा करो और उसके रिक्शे के बराबर लेकर आओ। मैं तुम्हे दुगने पैसे दूंगा। तभी रिक्शे वाले ने तेज से रिक्शा चलाया और लड़की के रिक्शे के पास जैसे ही पहुँचा, मेरे सीनियर ने बोला अपना रिक्शा उसके रिक्शे से लड़ा दो, मैं तुम्हे और भी पैसे दूंगा। मेरा माथा ठनका और मैंने बोला सर रहने दो। फिर उसने बोला अभी मज़ा आएगा। तभी रिक्शे वाले ने अपना रिक्शा लड़की के रिक्शे से लड़ा दिया और वो बोला , Hi Sweety, How are you? You are very beautiful. In which class do you read?
लड़की ने पीछे देखा और सहम गईं। तभी वो फिर बोला और लड़ाओ रिक्शा। लड़की के रिक्शे वाले ने शायद हालात को समझा और वो रिक्शा तेज़ी से निकाल ले गया। तब तक मेरे सीनियर का घर आ गया था। वो घर नही हवेली थी। उसने उस रिक्शे वाले को 50 रुपये की नोट पकड़ाई और बोला, इसे घर छोड़ देना जहां भी हो। मैं सहम सा दोबारा उसके साथ न आने का प्रण लिए घर आ गया। उस घटना ने मेरे दिल पर काफी गहरा असर डाला और उसे मैं कभी भूल नही पाया।
फिर किसी रोज़ मैंने उस लड़की को अपने ही मुहल्ले के पास के घर मे देखा। डर के मारे मेरी फिर कभी हिम्मत नही हुई उस गली में जाने की, कि कही किसी रोज़ उसने मुझे पहचान लिया और ये बात मेरे घर तक पहुच गयी तो मेरी बहन मुझे इतना पीटेंगी की दुनिया का कोई भी इंसान मुझे बचा नही पायेगा।