आज हिंदी दिवस है इस अवसर पर मैं अपने जीवन मे हिंदी के महत्व पर कुछ शब्द लिखना चाहता हूं। मेरा जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहाँ हिंदी और अवधी का बोल बाला था। अंग्रजी सिर्फ मेरे पिता जी को आती थी, वो भी इतनी की सरकारी काम आसानी से निपट जाए।
आस पास का वातावरण भी जय हिंद और जय हिंदी का ही था। पूरी कॉलोनी में शायद ही कोई अखबार अंग्रजी का आता हो। हम भी हिंदी माध्यम से पढ़ रहे थे। अंग्रेजी पढाने के लिए तो बहुत लोग थे वहां, पर हमे यह कभी समझ नही आई।
हिंदी में अच्छे नंबर ही आते थे और अंग्रेजी में अक्सर लाल निशान वाले ही अंक मिले। जैसे तैसे, हम बिना अंग्रेजी में पारंगत हुए ही, हमने दसवी और बारहवीं की इम्तेहान पास किये। दोनों में ही हिंदी में अच्छे अंक रहे पर अंग्रेजी में अंक बस उत्तीर्ण होने जितने ही थे।
जीवन मे एक महत्त्वपूर्ण बदलाव स्नातक में आया जहां हिंदी का नामोनिशान ही नही था। हर विषय का सिर्फ अंग्रेजी में प्रारम्भ और अंग्रेजी में ही अंत होता था। कक्षा के पहले दिन ही जब सब अपना परिचय अंग्रेजी में दे रहे थे, तो मुझे घबराहट सी होने लगी कि, मैं अपना परिचय कैसे हिंदी में दूं। एक गहरी सांस लेने के बाद मैंने अपना परिचय हिंदी में ही दिया , पता नही क्यों मेरे मन मे हीन भावना घऱ करने लगी थी।
कक्षा के सारे बच्चे जब अघ्यापक के सारे प्रश्नों का जवाब अंग्रेजी में दे रहे थे, तब जवाब आने के बाद भी, जवाब नही दे पाना एक सामान्य से घटना हो गयी थी। अब सारी कॉपी और किताब अंग्रेजी में ही थी। अंग्रेजी की स्पेलिंग की तो चर्चा क्या करना । इसपर मेरे साथियो ने मेरी काफी मदद की।
पहले सेमिस्टर में अंग्रेजी का एक अलग विषय था, जिसे पढ़ाने के लिए जिस अध्यापिका को नियुक्त किया था, उनकी अंग्रेजी मेरे सर के ऊपर से जाती थी। इम्तेहान हुआ और जब रिजल्ट आया, तो मैंने देखा, कुछ चुनिंदा लोगो मे मेरा नाम था, जो अंग्रजी एवं अन्य विषय मे पास थे। मेरी खुशी का तो कोई ठिकाना ही नही था।
धीरे धीरे दोस्तो के मदद मेरे अंदर का अंग्रेजी का भूत भाग और स्नातक एवं परास्नातक, दोनों अच्छे नम्बरों से पास हुआ, पर अभी भी हाल बहुत अच्छे नही थे अंग्रेजी में मेरे, पर हिंदी तो थी ही नही कही की उसका दामन पकड़ मैं अपनी नैया पार लगा लूं।
अब हर काम अंग्रेजी में ही करने थे, इंटरव्यू हो या अपना सी.वी हो सब अंग्रेजी में। जैसे तैसे नौकरी का इंटरव्यू हिंग्रेजी में निकला।
आज जब मैं एक सॉफ्टवेर कंपनी में काम कर रहा हूँ, और एक सॉफ्टवेर इंजीनियर हूँ, यहां भी मेरे के.आर.ए में कम्युनिकेशन पर जोर देने की बात लिखी जाती है। अंग्रेजी सुधारने में भी यहां मेरे दोस्त काफी मदद करते है, मैं निरंतर प्रयासरत हूँ कि एक दिन अंग्रेजी पर विजय प्राप्त कर लूं।
हिंदी जो कि जीवन रेखा है, मैं इसका प्रयोग अपने दिल की बात कहने में करता हूँ। मेरा फेसबुक पर एक पेज है और एक ब्लॉग भी है जिसपर मैं हिंदी में खूब लिखता हूँ।
No comments:
Post a Comment