Wednesday, April 8, 2015

आदरणीय पापा

आदरणीय पापा,
आज आपका जन्मदिन  है।  बहुत बहुत मुबारक हो।
 मै आपके पास नहीं हूँ अभी,  पर मै आपको बहुत मिस कर रहा हूँ।
मै बहुत ही सौभाग्यशाली हूँ की मैंने आपके पुत्र के रूप में जन्म लिया है।
आपने बहुत संघर्ष किया है हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए।  आपने मुझे अच्छी शिक्षा दी।  अच्छे संस्कार दिए जिससे की मै अपने जीवन  में आई चुनौतियां का सफलता पूर्वक सामना कर सका और आपके उन्ही संस्कारो  के द्वारा मै भविष्य में आने वाली चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करूँगा।
  मै अब बड़ा हो गया हूँ और अब आपका जूता मेरे पैरो में आने लगा है।  मै आपकी स्थिति समझने की कोशिश करने लगा हूँ।  एक पिता होने की नाते आपके द्वारा दिए गए  संस्कारो को आगे बढ़ने का दायित्वा अब मेरे कंधो पर है।  मै पूरी कोशिश करूँगा की आपके द्वारा दिए गए संस्कार अगली पीढ़ी तक पहुँचाऊँ।

मै आपके बेहतर स्वस्थ और लम्बी उम्र की कामना ईश्वर से करता हूँ।  

देव और दानव के बीच में है "मानव"


कोई व्यक्ति सिर्फ देव नहीं होता जो हमेशा सच्चा हो  ना ही कोई व्यक्ति दानव होता है जो हमेशा झूठा हो।  वो मानव है थोड़ा सा बुरा,  थोड़ा सा अच्छा, थोड़ा सा सच्चा और थोड़ा सा झूठा , यह अलग बात है की वो देव के नज़दीक है या दानव के ,  यदि हम अपने आपको सिर्फ मानव ही माने और देव या दानव बनाने की कोशिश न करे तो हम अपने अच्छे और बुरे का आंकलन ठीक से कर सकते है,  जिससे हमारे अंदर सुधार की अपार संभावनाए उत्पन्न हो सकती है।