Monday, February 16, 2026

विवाह के चौदह बरस


आज हमारे विवाह को 14 वर्ष हो गए। कहते हैं 14 वर्ष का समय बहुत बड़ा होता है। राम ने 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर जब अयोध्या लौटकर अपने प्रियजनों को गले लगाया होगा, तो वह मिलन कितना मधुर रहा होगा।
हमारे इन 14 वर्षों में भी कितने ही मौसम आए- कभी धूप, कभी छाँव, कभी बारिश की नमी, तो कभी सर्द सुबहों की खामोशी।
प्रेम हुआ… झगड़े भी हुए… रूठना भी आया… मनाना भी।
पर हर बार अंत में जो बचा, वह सिर्फ “हम” थे।
कहते हैं समय के साथ प्रेम कम हो जाता है, पर मुझे लगता है हमारा प्रेम बदला है- गहरा हुआ है, शांत हुआ है, समझदार हुआ है।
अब हाल कुछ ऐसा है कि मैं अगली बात क्या कहूँगा, यह उन्हें पहले से पता होता है।
मेरे तर्क, मेरे बहाने, मेरी आधी अधूरी दलीलें- सब उनकी मुस्कान के आगे हार मान लेती हैं।
कई बार बिना बोले ही बातें पूरी हो जाती हैं, जैसे दिलों के बीच कोई अदृश्य संवाद चलता हो।
इन 14 वर्षों में उन्होंने सिर्फ मेरा साथ नहीं दिया, उन्होंने मुझे समझा, सँभाला, और कई बार मुझसे बेहतर “मुझे” जाना।
उनके बिना यह सफर अधूरा था, है और रहेगा।
आज इन 14 वर्षों के बाद मैं कोई ठहराव नहीं देखता-
मैं एक नई शुरुआत देखता हूँ।
नए सपनों के साथ, नए वादों के साथ, और उसी पुराने प्रेम के साथ…
जो हर सुबह फिर से नया लगता है।
आप सभी परिवारजनों और इष्टमित्रों का आशीर्वाद यूँ ही बना रहे....
समय से परे, शब्दों से परे… सिर्फ प्रेम में।🙏

Thursday, February 12, 2026

दिखावे का महोत्सव और हाशिए पर दोस्ती: आडंबर और सच्ची दोस्ती के बीच का संघर्ष।


​हम आज उस दौर में हैं, जिस दौर में कभी हमारे माता-पिता थे। कॉलेज के दिन बीत चुके हैं और शादी के बाद अब बच्चे भी बड़े हो गए हैं। बच्चे अब अपना ख्याल खुद रख सकते हैं। अब हमारे पास दोस्ती निभाने का वक्त और हौसला दोनों है, पर मैं देख क्या रहा हूँ?

​समय के साथ दोस्ती के सारे समीकरण बदल रहे हैं। जो दोस्त हमारे साथ फकीरी में रहे, जिन्होंने एक ही थाली में निवाले तोड़-तोड़ कर खाए, अब उनका परिवेश बदल चुका है। उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार उनके मित्र और मंडली बदल गई है। हम अलग-अलग आर्थिक समूहों में बंट गए हैं, जहाँ एक समूह का व्यक्ति दूसरे समूह में अब सहजता से जा नहीं सकता।

​यदि आप एक साधारण जीवन जीते हुए यह चाहते हैं कि सामने वाला भी वैसा ही सरल रहे, तो यह अब संभव नहीं लगता। आपकी सरलता कभी-कभी आपके लिए ही कठिनाई बन जाती है, क्योंकि जब आप सादगी चुनते हैं, तो सामने वाला आपके प्रति अपना व्यवहार कठिन (जटिल) कर लेता है।

​दोस्त अब हमें हमारी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के अनुसार ही दावत पर बुलाते हैं। 'विशिष्ट' श्रेणी के मित्रों के लिए 'रिटर्न गिफ्ट' अलग से पैक होता है और यदि आप साधारण हैं, तो आपके हिस्से साधारण उपहार ही आता है।

​जन्मदिन और विवाह की वर्षगांठ पर आपको घर तो बुलाया जाता है, पर उस दिन नहीं जिस दिन वास्तविक उत्सव होता है। आपको कुछ दिन पहले या बाद में बुलाया जाता है, क्योंकि उस मुख्य दिन पर तो उन्हें अपने 'खास' लोगों के साथ ही जश्न मनाना है।

​हम बचपन से साथ रहे और हर पल साथ जिया, पर अब उन्हें पुरानी दोस्ती भी निभानी है और नए रसूखदार लोगों के साथ भी जुड़े रहना है। इसलिए असली दिन 'उनके' नाम रहता है और बाकी कोई दिन 'हमारे' नाम, ताकि उनके मन में कोई अपराधबोध (गिल्ट) भी न रहे और उनका महोत्सव भी संपन्न हो जाए।

जब आप यह तय करते है कि आप किसी को तकलीफ नही देंगे तो अंत में हासिल यही होता है की  स्वयं आप किसी की तकलीफ का कारण बन गए हो