Friday, February 8, 2019

अनुषा

अनुजा का आठवां महीना पूरा होने को था, हम सब अक्सर इकट्ठा हो छोटे से बेबी की बातें किया करते थे। छोटा सा बेबी किस पर जाएगा शैलेंद्र पर या अनुजा पर। हम शैलेंद्र और अनुजा से पूछा करते थे कि वह बेटी चाहते हैं या बेटा, दोनों बस एक ही बात बोलते थे कोई भी हो पर स्वस्थ हो। इसके अलावा हमें कुछ और नहीं चाहिए। मुझे अक्सर लगता था कि शायद बेटी ही होगी,  पता नहीं अंदर से कुछ आवाज सी आती थी।

अनुजा को जब नवा महीना लगा । शैलेंद्र के मम्मी-पापा और बहन, अनुजा की देखभाल करने के लिए उसके घर आ चुके थे। वीकेंड में हम साथ बैठे बात कर रहे थे कि हमें कभी भी अनुजा को हॉस्पिटल ले जाना पड़ सकता है। एक रात में हम गहरी नींद में थे कि, फ़ोन की घंटी बजती है, बड़ी मुश्किल से रजाई के बीच से कही फ़ोन हाथ लगा और देखता क्या हूँ शैलेंद्र का फ़ोन आ रहा था। फोन की घंटी सुनते ही स्वाति भी उठ कर बैठ गई थी।  फ़ोन उठाते ही शैलेंद्र कि आवाज़ आयी, राहुल सो कर उठ जाओ, अनुजा को दर्द शुरू हो गया है और उसे  होस्पिटल ले जाने का वक्त आ गया है।

हम झट से उठे और सामान समेटकर जाने के लिए तैयार हो गए। आदि को उसके मामा के साथ छोड़ कर हम अनुजा को लेकर कैलाश हॉस्पिटल निकल लिए। गाड़ी हम धीरे-धीरे चला रहे थे कि,  कहीं अनुजा को कोई समस्या ना हो जाए। हम हॉस्पिटल पहुंचे और वहां की फॉर्मेलिटी पूरी की।  अनुजा को लेबर रूम ले जाया गया। डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश शुरू कर दी।  तभी अनुजा की एक चीख ने, हम सब को डरा दिया । शैलेंद्र भागा-भागा अनुजा के पास पहुंचा और बोला क्या हुआ? सब ठीक तो है ना? अनुजा को लेबर पेन इतना ज्यादा था कि वो बेचैन थी, अनुजा की हालत देख, शैलेंद्र की आंखों में भी आंसू, बस छलकने को ही थे। बड़ी मुश्किल से शैलेंद्र ने अपने आप को कंट्रोल किया। अनुजा की स्थिति को देखकर, शैलेंद्र ने निर्णय लिया कि वह ऑपरेशन के लिए जाएगा।

शैलेंद्र की हामी भरने के बाद डॉक्टरों ने डिलीवरी की तैयारी शुरू की, हम सभी ने अनुजा का हौसला बढ़ाया और अनुजा ऑपरेशन थिएटर के लिए निकल गई । बाहर शैलेंद्र हाथ बांधे खड़ा हुआ था, बहुत देर खड़े होने के बाद हम सब ने शैलेंद्र से कहा कि तुम बैठ जाओ, पर वह बैठ नहीं रहा था और बोल रहा था कि, जब तक अनुजा बाहर नहीं आती वह नहीं बैठेगा और ना ही कुछ खाएगा- पिएगा। थोड़ी देर के बाद डॉक्टर ने हमें बताया एक सुंदर सी बेटी ने जन्म लिया है, यह खबर सुन सभी बहुत खुश हुए और सुंदर सी बिटिया के फूफा खुशी के मारे मिठाई का डब्बा लेकर आए, मिठाइयां सब में बांटी गई और शैलेंद्र को भी खूब ढेर सी बधाई दी गई। दादी, बाबा, बुआ सब बहुत खुश थे।

अनुजा अभी लेबर रूम से बाहर नहीं आई थी,  शैलेंद्र वहीं खड़ा अनुजा का इंतजार कर रहा था । एक घंटा बीतने के बाद भी जब, अनुजा की कोई खबर नहीं आई तो वह दौड़ा - दौड़ा डॉक्टर के पास गया और बोला अनुजा कैसी है। डॉक्टरों ने शैलेंद्र को बताया की अनुजा अच्छी है और उसे थोड़ी देर में रूम में शिफ्ट कर देंगे। अभी उसे ऑब्जर्वेशन में रखा है। डॉक्टरों के बताने के बाद भी शैलेंद्र ऑपरेशन थियेटर के बाहर ही खड़ा रहा, थोड़ी देर के बाद जब अनुजा बाहर आई, अनुजा को देखने के बाद,  वह अपनी प्यारी सी बेटी से मिलने बेबी रूम में गया और वहां उसका वीडियो बनाकर हम सबको दिखाया। बिटिया बहुत छोटी और प्यारी थी और हम सब भी बहुत खुश थे की, अनुजा और छोटी सी बिटिया दोनों ही स्वस्थ हैं।

दोपहर होते-होते अनुजा को रूम में शिफ्ट कर दिया हम सब वही थे धीरे-धीरे करके सारी मित्र मंडली इकट्ठा हो गई। 3 दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद अनुजा घर आई और जश्न की तैयारी शुरू हो गई। छठी में हम झूम कर नाचे। उसके बाद बिटिया का नाम रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई। सभी लोगों ने अपने हिसाब से छोटी सी बिटिया के लिए नाम चुने, आखिर में बुआ ने उसका नाम शिवांशी सेलेक्ट किया, सर्वसम्मति से छोटी सी बिटिया का नाम शिवांशी फाइनल हो गया। प्यार से हम शिवांशी को शिवि भी बुलाते हैं।

जब शिवांशी 12 दिन की हुई तो हमने खूब जश्न मनाया,  शैलेंद्र ने सबको बुलाया। पुराने सारे दोस्त आए थे,  रिश्तेदारों का भी तांता लगा था। वह पार्टी यादगार रही दादी-दादा, बुआ-फूफा, मामा-मामी, मौसी और नानी सब झूम कर नाचे।

अब वह 6 महीने की होने को है,  शिवि ने शरारते शुरू कर दी है। वाह अक्सर पलट जाती है और जोर जोर से चिल्लाती है। मैं अक्सर उसे अनुशा कह कर बुलाता हूं। उसके इस नाम में अनुजा का अनु और शैलेंद्र क श है।

मैं  शिवि के सुंदर भविष्य की, ईश्वर से कामना करता हूं ईश्वर उससे अच्छी बुद्धि, संस्कार और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करें । मेरा और स्वाति का आशीर्वाद उसके साथ हमेशा रहेगा।  वाह मंडली की सबसे प्यारी बिटिया है और हम सब उसे खूब सारा प्यार देंगे।