Monday, January 28, 2019

गौरैया


हम कुछ ही दिन पूर्व ही शहर की घनी आबादी वाले इलाके से निकल उसी शहर की बाहरी इलाके में एक बहुमंजिला ईमारत में शिफ्ट हुए है।  शरू के कुछ दिन  में हमने बिलकुल भी अच्छे नहीं लगे। उस इलाके में हमारा कोई जानने वाला भी ना था।  एक सुबह देखता क्या हूँ एक नन्ही से गौरैया हमारे कमरे में दाखिल होती है। गर्मियों के दिन थे इसलिए हमने पंखा चला रखा था। गौरैया के आता देख हम झट से पंखे को ऑफ करने के लिए बढे। की कही चिड़िया को पंखे से चोट न लग जाये।

पंखा बंद तो हो गया पर चिड़िया बहार जाने का नाम ही नहीं ले रही थे, कभी परदे की रोड पर बैठ जाती तो कभी बंद पंखे के पारो पर।  भगाये तो कैसे भगाये  फिर हमने कमरे की सारी लाइट्स बंद की और सिर्फ एक ही दरवाज़ा खोला। अचानक चिड़िया फुर से उस गयी।


चिडियो को देख कर ना जाने क्यों हमे बहुत अच्छा सा लगा।  शहर की उस घनी आबादी में लोग तो बहुत थे बार कोई भी गौरैया नहीं थी।  हर जगह से गौरैया ख़त्म सी हो गयी है।  चहचहाने की की आवाज़े तो हमने बरसो बाद सुनी थी।  मानो ऐसा लग रहा था की हम किसी जीवित जगह आ गए है।

अब हम रोज़ चिडियो को अपनी बालकनी में दाना डालते है और जिस दिन भी हम भूल जाते थे चिडियो का चहचहाना बहुत ही बढ़ जाता है।  कुछ तो घर के अंदर आकर मानो हमे बताने का प्रयाश कर रही होती है की हम दाना डालना भूल गए हो।  हम झट से दरवाज़ा खोल दाना डालते है।  साथ में कुछ कबूतर भी दानो का मज़ा लेते है।




Monday, January 7, 2019

सनीलियोनि चाप


नए साल की शुरुवात हुए बस कुछ ही दिन हुए थे, हम अपनी पत्नी के साथ,अपने मुहल्ले की मार्केट की सैर कर  रहे थे कि, हमे एक दुकान दिखाई दी, जिसमे बड़ी भीड लगी हुई थी, हमारा भी मन किया कि हम जा कर देखे की क्या बिक रहा है। नज़दीक जा कर हमने देखा की दुकान में तरह तरह की चाप बिक रही थी। 
दुकानदार से हमने पूछा की चाप शाकाहारी ही होती है या नही? दुकानदार ने बोला सर् ये शाकाहारी होती है और इस दुकान में सबकुछ शाकाहारी ही है। पूछना थोड़ा जरूरी था क्योंकि चाप दिखने में मुर्गे की टांग की तरह लग रही थी। पत्नी भी साथ थी इसलिए पूछना थोड़ा ज्यादा जरूरी था। हमने कभी भी चाप नही खाई थी इसलिए मेरा मन किया कि चलो एक बार ट्राय किया जाए। पत्नी को हमने मनाया और उसने बड़ी हिम्मत की और चाप खाने के लिए तैयार हो गयी।
दुकानदार से हमने बोला, भाई चाप कैसे दे रहे हो? दुकानदार बोला सर् आप कौन सी चाप खाना पसंद करेंगे? बताइये। मैंने बोला, भाई, मुझे नही पता की हम कौन सी चाप खाए। आप ही बताओ कि हमे कौन सी चाप खानी चाहिए। आपके पास कौन सी मशहूर चाप है जिसे  लोग ज़्यादा पसंद करते है।
दुकानदार ने हमें बताया की, उसके पास एक स्पेशल चाप है, जिसका नाम सनीलियोनि चाप है।  सनीलियोनि का नाम सुन हमदोनो को हँसी आ गयी, थोड़ा हसने के बाद हमने बोला की ऐसी भी कोई चाप होती है क्या? मुस्कुराते हुए हमने अपनी पत्नी की तरफ देखा। हमारी पत्नी ने भी मुस्कुराते हुए सनीलियोनि चाप खाने के लिए तैयार हो गयी।
सनीलियोनि चाप सार्वजनिक जगह पर खाने की जगह हमने तय किया की हम घर जाकर सकून से इसका आनंद लेंगे। हम घर आये। मेरी पत्नी, एक सुंदर सी थाली में सनीलियोनि चाप परोसकर ले आयी। हमने पूरा आनंद लेकर चाप का सेवन किया। चाप खाने में बहुत चटपटी थी और छूने पर मख़मली ।  हमने अपने साले को भी चाप खिलायी। मेरे साले को सनीलियोनि चाप अच्छी लगी और उसने भी अपने हिस्से की चाप बड़े आनंद से खाई, बस उसे हमने चाप का नाम नही बताया।